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Champaran Murki Sweets: पूर्वी चंपारण के तुरकौलिया की सुप्रसिद्ध मुरकी मिठाई का स्वाद अंग्रेजों से लेकर पूर्व CM नीतीश कुमार तक को दीवाना बना चुका है. बिना तेल-घी के चीनी के पाग में बनने वाली इस अनोखी मिठाई की कीमत ₹500 किलो है. पढ़ें इसका दिलचस्प इतिहास.

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आदित्य गौरव/पूर्वी चंपारण: चंपारण की धरती का इतिहास बहुत समृद्ध है. यहां का खान-पान भी उतना ही लाजवाब है. चंपारण मीट (मटका मीट) के बाद अब यहां की एक खास पारंपरिक मिठाई पूरे देश में अपनी मिठास बिखेर रही है. हम बात कर रहे हैं पूर्वी चंपारण जिले की सुप्रसिद्ध मुरकी मिठाई की. जिसका स्वाद आम जनता से लेकर बड़े-बड़े राजनेताओं और ब्रिटिश अफसरों तक को अपना दीवाना बना चुका है. इस मिठाई की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हर जगह नहीं मिलती. असली और पारंपरिक मुरकी मिठाई का स्वाद चखने के लिए आपको पूर्वी चंपारण जिले के तुरकौलिया प्रखंड अंतर्गत तुरकौलिया चौक पर ही आना होगा.

अंग्रेजों के जमाने से जुड़ा है इतिहास
इस अनूठी मिठाई की शुरुआत अंग्रेजों के शासनकाल में हुई थी. इसे सबसे पहले बनाने वाले स्वर्गीय गोपाल चौधरी थे. उनके पुत्र उमेश पटेल उर्फ भुआल जी बताते हैं कि उनके पिताजी ने जब इसकी शुरुआत की थी. उस समय तुरकौलिया कोठी पर तैनात ब्रिटिश अफसर इसके स्वाद के दीवाने हो गए थे. वे अक्सर कोठी पर इस मिठाई को विशेष तौर पर मंगवाया करते थे.

छेने का खुरमा पर बिना तेल के तैयार
उमेश पटेल ने बतलाया कि मुरकी मिठाई का विचार पारंपरिक खुरमा को देखकर आया था. इसे सीधे शब्दों में छेना का खुरमा भी कहा जा सकता है. हालांकि इसका आकार सामान्य खुरमे से काफी बड़ा होता है. इसे बनाने में शुद्ध छेने का उपयोग होता है. जिसे केवल चीनी के पाग (चाशनी) में पकाया जाता है. सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने में किसी भी तरह के तेल या घी का इस्तेमाल नहीं होता. जिससे इसका मूल स्वाद और शुद्धता बरकरार रहती है.

नीतीश कुमार के राजगीर कार्यक्रम में लगा था स्टॉल
मुरकी मिठाई की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इसके मुरीद हैं. उमेश पटेल ने बताया कि राजगीर में आयोजित एक राजकीय कार्यक्रम के दौरान जहां बिहार के चुनिंदा जिलों के प्रसिद्ध व्यंजनों के स्टॉल लगे थे. वहां मुख्यमंत्री के निर्देश पर विशेष रूप से तुरकौलिया की मुरकी मिठाई का भी स्टॉल लगवाया गया था.

देश ही नहीं, सात समंदर पार भी है मांग
मौजूदा समय में इस लाजवाब मिठाई की कीमत 500 रुपये प्रति किलो है. लेकिन इसके बावजूद दुकान पर खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ती है. स्थानीय लोगों और अधिकारियों के अलावा, दूसरे राज्यों से आने वाले लोग भी इसे चाव से ले जाते हैं. उमेश गर्व से बताते हैं कि उनके हाथों से बनी यह मुरकी मिठाई भारत ही नहीं विदेशों में रहने वाले प्रवासियों तक भी सौगात के रूप में पहुंच रही है.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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