दिल्ली में विरोध प्रदर्शन की आग पटना समेत देश को दूसरे हिस्से में पहुंच चुकी है तो इधर जंतर मंतर पर छात्र डटे हुए हैं। दिल्ली से लेकर पटना तक हंगामा हाई है। प्रदर्शनकारी जंतर मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े हैं। उधर, विपक्ष संसद से लेकर सड़क तक हंगामा और शोर मचा रहा है। छात्रों के नाम पर विपक्ष जमकर सियासत कर रहा है। सरकार पर प्रेशर बनाने की कोशिश हो रही है। हालांकि धर्मेंद्र प्रधान पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की लाइन अलग-अलग है। कांग्रेस जहां शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़ी है तो वहीं अखिलेश यादव के रुख नर्म है। अखिलेश सदन में नीट पर चर्चा चाहते हैं। 

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, आज दोपहर 12 बजे जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तब हंगामा हो रहा था। अखिलेश यादव समेत सपा के सांसद भी अपनी बात रखना चाहते थे। अखिलेश यादव अपनी बात कहना चाह रहे थे लेकिन स्पीकर ने कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल को बोलने के लिए कहा। फिर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू बोलने लगे। इसके बाद स्पीकर ओम बिरला के सामने आपत्ति जताते हुए अखिलेश ने कहा कि आपने बीजेपी-कांग्रेस को बोलने का मौका दिया, क्या आपने इनसे समझौता कर लिया। इस दावे को लेकर केसी वेणुगोपाल ने अखिलेश से सवाल-जवाब किए। 

आज संसद में क्या हुआ?

  1. केसी वेणुगोपाल ने कांग्रेस की तरफ से बोलते हुए कि मंत्री का इस्तीफा हो और कांग्रेस सांसदों को कहा- वेल में चलिए।
  2. वहीं, अखिलेश को स्पीकर ने बोलने के लिए कहा और कांग्रेस नारेबाजी कर रही थी। इसपर अखिलेश ने नाराज होकर कहा कि आप दोनों ने बोल दिया, हमें बोलने नहीं दिया, आपकी साँठ-गाँठ है।
  3. जिसके बाद केसी वेणुगोपाल ने कहा- आप ऐसा कैसे कह सकते हैं। हमारे नेता के साथ पुलिस ने कितनी ज्यादती की।
  4. सूत्रों का दावा है कि बातचीत के दौरान अखिलेश ने यहां तक कहा कि राजनीति आपसे नहीं दिखनी।
  5. इस वाकये के वक्त लोकसभा स्थगित हो गई थी और माइक बंद हो गया था।

वेणुगोपाल से बहस पर क्या बोले अखिलेश?

हालांकि, बाद में अखिलेश यादव ने इशारों में वेणुगोपाल से जुड़ी बहस का खंडन भी किया है। कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा, “यह सच है कि हमें जानकारी नहीं दी गई थी, लेकिन जब कांग्रेस ने बुलाया तो हमने अपना सारा काम छोड़ दिया और जो सांसद जा सकते थे, वे गए, हम आपसी तालमेल बेहतर करेंगे। इसे और बेहतर होना चाहिए। सोचिए सरकार कितनी कमज़ोर है कि वह अपने ही मंत्रियों और सहयोगियों से इस्तीफा भी नहीं ले पा रही है। कम से कम सरकार को यह तो मानना ​​ही चाहिए कि हां, गलती हुई है।”

वहीं, छात्र मुद्दों और कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में आज कांग्रेस, सपा और टीएमसी समेत विपक्षी सांसदों ने संसद में काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया। 

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