पूरी दुनिया जानती है कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम कभी भी किसी एक जगह तक सीमित नहीं रहा है। ईरान ऐसे ही अमेरिका और इजरायल से भिड़ने का माद्दा नहीं रखता, उसने पिछले दो दशकों में एनरिचमेंट प्लांट, यूरेनियम कन्वर्ज़न सेंटर और ज़मीन के नीचे बने बंकरों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया है, इनमें से कई तो पहाड़ों के अंदर बने हैं या हवाई हमलों से बचाने के लिए चट्टानों की गहरी परतों के नीचे दबाया गया है। ईरान का यह पाताल लोक एक बार फिर दुनिया भर की कड़ी नज़र में है।
क्या ईरान ने अमेरिका को चकमा दिया था
ईरान का कहना है कि युद्ध के दौरान बुशेर में उसके एकमात्र न्यूक्लियर पावर प्लांट के आस-पास के इलाकों पर पहले ही हमले हो चुके हैं, हालांकि रूस द्वारा संचालित उसके रिएक्टर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। तेहरान ने यह भी कहा कि अमेरिका ने उस साफ़ किए गए इलाके पर हमला किया जहां वह ‘डारखोविन न्यूक्लियर प्लांट’ बनाने की योजना बना रहा है, जबकि संयुक्त राष्ट्र की ‘इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी’ का कहना है कि पिछली बार जब उन्होंने उस जगह का निरीक्षण किया था, तो वहां कोई परमाणु सामग्री नहीं थी।
ईरान के खास न्यूक्लियर साइट्स
ईरान का मुख्य यूरेनियम संवर्धन केंद्र रहा नतांज तेहरान से लगभग 220 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है, जो ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम का मुख्य केंद्र है। इस परिसर में ‘फ्यूल एनरिचमेंट प्लांट’ (FEP) है, जहां हज़ारों गैस सेंट्रीफ्यूज यूरेनियम को संवर्धित किया जाता है। साथ ही, यहां ‘पायलट फ्यूल एनरिचमेंट प्लांट’ भी है, जिसका इस्तेमाल ज़्यादा उन्नत सेंट्रीफ्यूज मॉडल के परीक्षण के लिए किया जाता है। इस ठिकाने को बार-बार गुप्त और सैन्य अभियानों में निशाना बनाया गया है। लेकिन ईरान का परमाणु कार्यक्रम खत्म नहीं हुआ।
ईरान का नतांज
नतान्ज़ के बाद फोर्डो भी ईरान का अहम न्यूक्लियर साइट है। लेकिन, अब एक नये पाताल लोक का पता चला है जिसने ईरान के नये परमाणु रहस्य से पर्दा उठाया है और इस सबसे नए और शायद सबसे विवादित जगह का नाम है ‘पिकएक्स माउंटेन, जो नतान्ज़ के ठीक दक्षिण में स्थित है। इस जगह पर निर्माण कार्य कथित तौर पर 2020 के आसपास शुरू हुआ था। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि पहाड़ के अंदर एक विशाल भूमिगत सुरंग का जाल बना हुआ है, जिससे यह दुनिया की सबसे सुरक्षित भूमिगत जगहों में से एक है।
कहां हैं ईरान का पाताल लोक?
ईरान ने हज़ारों यूरेनियम-एनरिचमेंट सेंट्रीफ्यूज को जहां छिपा रखा है, उसका नाम ‘पिकएक्स माउंटेन कॉम्प्लेक्स’ है, जो बहुत ज़्यादा सुरक्षित है और यहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता। इस खबर ने अमेरिका और इजरायल की नींद उड़ा दी है। ट्रंप और नेतन्याहू को डर है कि महीनों के हमलों के बाद ईरान शायद अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम के अहम हिस्सों को बचाने या उन्हें फिर से बनाने की कोशिश कर रहा है।
‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में छपी रिपोर्टों में इज़राइली इंटेलिजेंस के अनुमानों का हवाला दिया गया है। इन अनुमानों के मुताबिक, नतांज़ न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स के पास ‘पिकएक्स माउंटेन’ (जिसे ‘माउंट कोलांग गज़ ला’ भी कहा जाता है) के नीचे बनी सुरंगों में हज़ारों सेंट्रीफ्यूज पहुंचाए गए हैं। हालांकि अबतक ईरान ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है और इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) को इस जगह की जांच करने की इजाज़त भी नहीं मिली है।
ईरान ने कहां छुपाया अपना एनरिच यूरेनियम
अमेरिका को ‘पिकएक्स माउंटेन’ की चिंता क्यों है?
चिंता सिर्फ़ इस बात की नहीं है कि ईरान के पास एक और ज़मीन के नीचे बना ठिकाना है। बल्कि चिंता यह है कि ‘पिकएक्स माउंटेन’ शायद नतान्ज और फोर्डो से कहीं ज़्यादा गहरा और मज़बूत हो सकता है, जिससे यह अमेरिका के सबसे ताकतवर पारंपरिक बंकर-बस्टर हथियारों की पहुंच से भी बाहर हो सकता है। इसकी दो वजहें हैं, जिसमें से एक तो खुफिया रिपोर्टों से पता चलता है कि यहां अब एनरिचमेंट (संवर्धन) के अहम उपकरण हो सकते हैं। दूसरे ईरान लगातार यहां खुदाई का काम कर रहा है।
ईरान अमेरिका युद्ध
ऐसा क्या रखा है पिकएक्स माउंटेन के अंदर
‘पिकएक्स माउंटेन’ के अंदर क्या रखा गया है, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था को कभी भी इस साइट तक पहुंचने की अनुमति नहीं मिली है। लेकिन मंगलवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संभावना को स्वीकार किया कि ईरान ने पिकएक्स माउंटेन में सेंट्रीफ्यूज (centrifuges) पहुंचा दिए होंगे। ट्रंप ने कहा, “हम उस इलाके पर हमला करेंगे… शायद बहुत जल्द। और वे इसके बारे में कुछ नहीं कर पाएंगे।”
पिकएक्स माउंटेन के बारे में क्या क्या पता चला है
- सैटेलाइट तस्वीरों में इसके कई एंट्री पॉइंट दिखाई देते हैं।
- 2023 में, ‘एसोसिएटेड प्रेस’ की ‘पिकएक्स माउंटेन’ पर एक रिपोर्ट में ‘जेम्स मार्टिन सेंटर फॉर नॉन-प्रोलिफरेशन स्टडीज़’ के एक्सपर्ट्स का एनालिसिस शामिल था। इसमें कहा गया था कि ईरान शायद 80 मीटर (260 फ़ीट) से 100 मीटर (328 फ़ीट) की गहराई पर एक फैसिलिटी बना रहा है। तब से इस साइट पर खुदाई जारी है और कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह ज़मीन के नीचे और भी गहरी हो सकती है।
- एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट का साइज़ बताता है कि ईरान शायद इस अंडरग्राउंड फैसिलिटी का इस्तेमाल यूरेनियम को एनरिच करने और सेंट्रीफ्यूज बनाने के लिए कर पाएगा।
- सेंट्रीफ्यूज, जो ट्यूब के आकार के उपकरण होते हैं और दर्जनों मशीनों की बड़ी कतारों में लगे होते हैं, यूरेनियम गैस को तेज़ी से घुमाकर उसे एनरिच (शुद्ध और शक्तिशाली) करते हैं। घूमने वाली अतिरिक्त कतारों की मदद से ईरान पहाड़ की सुरक्षा के बीच तेज़ी से यूरेनियम को एनरिच कर पाएगा।
- 2025 के हमलों से पहले, ईरान ने यूरेनियम को लगभग 60% तक एनरिच कर लिया था, जो हथियारों में इस्तेमाल होने वाले लेवल के करीब है। तब से, ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि ईरान ने एनरिचमेंट का काम फिर से शुरू किया हो, और माना जाता है कि उसका स्टॉक अभी भी उन्हीं एनरिचमेंट साइट्स पर है जिन पर बमबारी की गई थी।
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