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कटहल का अचार भारतीय रसोई का पारंपरिक और पसंदीदा स्वाद है. अगर आप कम तेल में भी स्वादिष्ट और लंबे समय तक टिकने वाला अचार बनाना चाहते हैं, तो सही विधि, संतुलित मसालों और कुछ आसान सावधानियों के साथ इसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है.
कम तेल वाला कटहल का अचार बनाने के लिए लगभग एक किलो ताजा और कच्चा कटहल लेना चाहिए. इसे छीलकर मध्यम आकार के टुकड़ों में काट लें. कटहल काटते समय हाथों और चाकू पर थोड़ा तेल लगा लें, जिससे चिपचिपाहट कम हो जाएगी. अब नमक पानी में टुकड़ों को 8 से 10 मिनट तक हल्का उबालें. ध्यान रहे कटहल केवल नरम रहे, लेकिन पूरी तरह गले नहीं. इसके बाद पानी को अच्छे से निकालकर टुकड़ों को कपड़े पर फैला देना चाहिए.
कटहल के टुकड़ों को 2 से 3 घंटे तक छाया या हल्की धूप में सुखा ले, ताकि नमी न रहे. इससे अचार लंबे समय तक खराब नहीं होता है. नमी रहने के कारण अचार में फफूंद लगने या स्वाद बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है. अतः इसमें जल्दबाजी न करें और टुकड़ों को पूरी तरह सूखने दें. अच्छी तैयारी ही स्वादिष्ट और टिकाऊ अचार का आधार है.
अब मसालों की जरूरत पड़ती हैं. एक बर्तन में तीन बड़े चम्मच दरदरी पीली सरसों, दो बड़े चम्मच सौंफ, एक बड़ा चम्मच हल्का भुना मेथी दाना, एक छोटा चम्मच हल्दी, दो बड़े चम्मच लाल मिर्च पाउडर, स्वादानुसार नमक और आधा छोटा चम्मच हींग मिलाना चाहिए. थोड़ा सा कलौंजी भी डाला जा सकता हैं. यह मसाला अचार में गजब की खुशबू और पारंपरिक स्वाद जोड़ देता हैं.
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राजकीय फल संरक्षण केंद्र बलिया के प्रवेक्षक त्रिभुवन राम के अनुसार, केवल चार से पांच बड़े चम्मच सरसों का तेल गर्म करें और जब तेल से हल्का धुआं निकल जाए, तो गैस बंद कर दें और उसे पूरी तरह ठंडा होने दें. ठंडा तेल मसाले में मिलाएं और फिर कटहल के सूखे टुकड़ों को उसमें अच्छी तरह लपेट दे. हर टुकड़े पर मसाले की परत बराबर लगाए.
ध्यान रहे, इसको पूरी तरह सूखे और साफ कांच के जार में भर दें. ऊपर से भी तेल डाल दें, ताकि मसाले अच्छी तरह सेट हो जाएं. जार का ढक्कन एकदम सही से बंद करें और लगातार तीन से चार दिनों तक धूप दिखाए. हर दिन एक बार सूखे चम्मच से अचार को हल्के हाथों से जरूर मिलाए. इससे मसाले हर टुकड़े तक पहुंचकर स्वाद को धीरे-धीरे निखरते हैं.
अचार कई महीनों तक खराब न हो, इसके लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए. अचार निकालते समय हमेशा सूखा और साफ चम्मच का प्रयोग करें. जार में पानी या नमी बिल्कुल न जाने दें. इसे सूखी जगह पर रखें. बरसात या अधिक नमी वाले मौसम में बीच-बीच में जार को धूप दिखाना बहुत जरूरी होता है. इससे अचार लंबे समय तक सही रहता है.
कम तेल होने के बावजूद भी यह पारंपरिक अचार किसी से कम नहीं होता हैं. सरसों, सौंफ, मेथी आदि के मसालों का सही संतुलन कटहल के हर टुकड़े में गहरा स्वाद भर देता है. यह अचार पराठे, पूरी, दाल-चावल, खिचड़ी और साधारण रोटी के साथ भी लाजवाब होता है. कम तेल होने के कारण यह कटहल का अचार हल्का महसूस और रोजमर्रा के भोजन में दोगुना स्वाद जोड़ देता हैं.
अगर आप भी अपने घर में स्वाद और सेहत का बेहतरीन मेल कम तेल वाला कटहल का अचार आसानी से बनाया जा सकता हैं. थोड़ी सावधानी, सही मसालों का चयन और साफ-सफाई का ध्यान रखते हुए तैयार किया गया यह अचार लंबे समय तक ताजा बना रहता है. एक बार यह विधि अपनाने के बाद शायद आप भी बाजार का अचार भूल जाएंगे.