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Besan Stuffed Karela Bharwa Recipe: करेला का भरवा तो आपने बहुत खाया होगा. आज आपको बेसन वाला करेला भरवा के बारे में बता रहे हैं. जो एक महीने तक खराब नहीं होगा. आपका जब मन करें इसको तले और खा लें. इसका स्वाद इतना तगड़ा है कि आप बार-बार इसको ट्राई करेंगे. सीतामढ़ी की प्रोफेसर खुश्बू कुमारी ने बेसन वाले भरवा करेले की आसान रेसिपी बताई. जिसे बनाकर एक महीने तक फ्रिज में स्टोर कर सफर और टिफिन में इस्तेमाल किया जा सकता है.
सीतामढ़ी: आधुनिक जीवनशैली में जहां लोग समय की कमी के चलते हर रोज नए पकवान बनाने से कतराते हैं, वहीं सीतामढ़ी की जानी-मानी गृहणी और प्रोफेसर खुश्बू कुमारी ने रसोई को एक नया और बेहद आसान नजरिया दिया है. उन्होंने अपने अनुभव से ‘बेसन वाले भरवा करेले’ की एक ऐसी लाजवाब रेसिपी साझा की है. जो न केवल स्वाद में बेमिसाल है बल्कि कामकाजी महिलाओं के लिए समय की बचत भी करती है. प्रोफेसर खुश्बू का कहना है कि इस खास तरीके से तैयार किए गए भरवा करेले को बनाकर आप पूरे एक महीने तक फ्रिज में सुरक्षित (स्टोर) रख सकती हैं. जब भी खाने का मन हो इसे निकालें, हल्का तलें और गरमा-गरम परोसें. यह सफर पर जाने वालों और टिफिन के लिए एक आदर्श विकल्प है.
जानें इस स्वादिष्ट व्यंजन की रेसिपी
इस स्वादिष्ट व्यंजन को तैयार करने की बारीकियां समझाते हुए प्रोफेसर खुश्बू कुमारी ने बताया कि इसके लिए मुख्य रूप से 250 ग्राम ताजे करेले और 150 ग्राम भुने हुए बेसन की आवश्यकता होती है. सबसे पहले करेलों को अच्छी तरह छीलकर, बीच से चीरा लगाकर उनके अंदर के सारे बीजों को निकाल लिया जाता है. इसके बाद, करेलों का कड़वापन पूरी तरह से दूर करने के लिए एक बर्तन में गुनगुना पानी लेकर उसमें एक बड़ा चम्मच नमक मिलाया जाता है.
करेलों को आधे घंटे के लिए उसमें डुबोकर रख दिया जाता है. इस बीच, स्टफिंग यानी मसाला तैयार करने के लिए भुने हुए बेसन में एक चौथाई चम्मच हल्दी, चुटकी भर हींग, लाल मिर्च पाउडर, अमचूर पाउडर और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है. स्वाद को दोगुना करने के लिए इसमें भुनी और दरदरी पिसी हुई सौंफ, साबुत धनिया, दालचीनी और अजवाइन का विशेष मसाला मिश्रण तैयार कर मिलाया जाता है. जिसमें थोड़ा सा तेल और हल्की सी मिठास के लिए चीनी भी डाली जा सकती है.
याद रखें ये महत्वपूर्ण टिप्स
प्रोफेसर खुश्बू ने आगे की प्रक्रिया के महत्वपूर्ण टिप्स देते हुए कहा कि आधे घंटे बाद करेलों को नमक के पानी से निकाल कर एक छन्नी में रख देना चाहिए. हाथों से हल्का दबाकर उसका सारा अतिरिक्त पानी निचोड़ लेना चाहिए. इसके बाद, तैयार बेसन और मसालों के सूखे मिश्रण को चम्मच या उंगलियों की मदद से करेलों के भीतर अच्छी तरह दबा-दबाकर भरा जाता है. करेले के भीतर मौजूद हल्की नमी के कारण यह सूखा मसाला अंदर ही अंदर नरम हो जाता है. तलते समय बाहर नहीं निकलता. सारे करेलों में स्टफिंग भरने के बाद इन्हें एक प्लेट में सजाकर रख लिया जाता है. यदि आप इन्हें तुरंत खाना चाहते हैं, तो यह तलने के लिए तैयार हैं. अन्यथा इन्हें इसी स्थिति में एयर-टाइट डिब्बे में बंद करके फ्रिज में स्टोर भी किया जा सकता है.
रेसिपी के अंतिम चरण में ये संतुलन जरूरी
रेसिपी के अंतिम चरण में धीमी और मध्यम आंच का संतुलन सबसे जरूरी होता है. एक पैन में दो से तीन बड़े चम्मच तेल गर्म करके इन करेलों को कड़ाही में डाला जाता है. ढककर पकाया जाता है. प्रोफेसर खुश्बू कुमारी के अनुसार, लगभग 10 से 15 मिनट तक करेलों को बीच-बीच में उलट-पुलट कर तब तक तलना चाहिए जब तक कि इनका रंग हर तरफ से आकर्षक गोल्डन ब्राउन हो जाए। पकने के बाद मसालों की सोंधी खुशबू पूरे घर में फैल जाती है जो किसी की भी भूख बढ़ा सकती है. खुश्बू कुमारी ने विश्वास जताया कि इस विधि से बने करेले घर के बच्चे भी उंगलियां चाटकर खाएंगे, क्योंकि इसमें पारंपरिक कड़वाहट की जगह मसालों का अनोखा चटपटापन होता है.
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