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कश्मीर के पारंपरिक खानपान में हाक साग की खास जगह है. स्थानीय हरी पत्तियों से बनने वाली यह देसी सब्जी कम मसालों और साधारण तरीके से तैयार की जाती है. जानिए क्या है हाक साग, इसे बनाने का पारंपरिक तरीका और कश्मीरी थाली में क्यों है इसकी खास पहचान.

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हाक साग में आमतौर पर मसालों की लंबी सूची नहीं होती.

कश्मीर के खानपान की बात आते ही रोगन जोश, यखनी और गुश्ताबा जैसे व्यंजन याद आ जाते हैं, लेकिन कश्मीरी भोजन की असली खूबसूरती सिर्फ इन शाही पकवानों में नहीं है. यहां रोजमर्रा की रसोई में बनने वाले कई बेहद साधारण व्यंजन भी अपनी अलग पहचान रखते हैं. हाक साग ऐसा ही एक पारंपरिक कश्मीरी व्यंजन है. हरी पत्तेदार सब्जियों से बनने वाली यह डिश कम मसालों में तैयार होती है और कश्मीर की घरेलू रसोई से गहराई से जुड़ी हुई है.

क्या होता है हाक साग?

कश्मीर में ‘हाक’ शब्द आम तौर पर कई तरह की पत्तेदार सब्जियों के लिए इस्तेमाल होता है. इनमें कोलार्ड जैसी पत्तियां, स्थानीय हरी सब्जियां और मौसम के अनुसार मिलने वाले दूसरे leafy greens शामिल हो सकते हैं. इसलिए हाक किसी एक खास पौधे का नाम नहीं, बल्कि कश्मीरी खानपान में पत्तेदार सब्जियों की एक व्यापक परंपरा से जुड़ा शब्द है. घर के खाने में हाक को अक्सर साधारण तरीके से पकाया जाता है, ताकि सब्जी का प्राकृतिक स्वाद बरकरार रहे. यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है.

कम मसाले ही बनाते हैं इसे खास

हाक साग में आमतौर पर मसालों की लंबी सूची नहीं होती. कई पारंपरिक तरीकों में सरसों का तेल, नमक और सूखी लाल मिर्च जैसे सीमित ingredients से इसे तैयार किया जाता है. कुछ परिवारों में लहसुन भी डाला जाता है, जबकि बनाने का तरीका घर और समुदाय के अनुसार बदल सकता है. पहले पत्तियों को अच्छी तरह साफ करके मोटे डंठल अलग किए जाते हैं. इसके बाद उन्हें पानी के साथ पकाया जाता है. जब पत्तियां नरम हो जाती हैं तो तेल में मसालों या लहसुन का हल्का तड़का लगाकर सब्जी में मिलाया जाता है. इसमें गाढ़ी ग्रेवी या क्रीम की जरूरत नहीं होती.

कश्मीरी थाली में क्यों है खास?

हाक साग की खासियत यही सादगी है. कश्मीर की पारंपरिक रसोई में मौसम के हिसाब से मिलने वाली हरी सब्जियों का इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है. स्थानीय और आसानी से उपलब्ध सामग्री से तैयार होने के कारण हाक घरेलू भोजन का हिस्सा बन गया. इसे आमतौर पर चावल के साथ खाया जाता है. गर्म चावल और हल्के मसालों वाली हाक की जोड़ी कश्मीरी घरेलू खाने का बेहद सरल उदाहरण है.

सेहत के लिहाज से भी फायदेमंद

हरी पत्तेदार सब्जियां आम तौर पर फाइबर, विटामिन और कई micronutrients का स्रोत होती हैं. हाक साग में इस्तेमाल होने वाली पत्तियों की nutritional value उनकी किस्म और पकाने के तरीके पर निर्भर करती है. कम तेल और कम मसालों में बनाई गई सब्जी रोजमर्रा के संतुलित भोजन का हिस्सा बन सकती है. हालांकि इसे किसी बीमारी का इलाज या विशेष medicinal food मानना सही नहीं है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह सब्जियों को रोज के खाने में शामिल करने का स्वादिष्ट और पारंपरिक तरीका है.

कश्मीर की रसोई की सादगी

हाक साग हमें यह भी बताता है कि किसी व्यंजन की पहचान हमेशा महंगे ingredients या जटिल recipe से नहीं बनती. स्थानीय पत्तियां, थोड़ा तेल, नमक और सीमित मसाले मिलकर ऐसा खाना तैयार कर सकते हैं जिसकी अपनी सांस्कृतिक पहचान हो.

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Vividha SinghSub Editor

विविधा सिंह हिंदी डिजिटल पत्रकारिता का उभरता हुआ नाम हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में साढ़े चार साल का अनुभव है. वर्तमान में वह News18 हिंदी में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह लाइफस्टाइल वर्टि…

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