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मिथिलांचल के दरभंगा में बड़े पैमाने पर ‘दूधिया मालदह’ आम की बागवानी कर रहे किसान मनोज कुमार झा ने इसके कई दिलचस्प राज खोले हैं. मालदह की ‘क्वीन’ कहा जाने वाला यह आम अपने कागज जैसे पतले छिलके, रेशे रहित पीले गूदे और दूध जैसे गाढ़े-मीठे रस के लिए मशहूर है. इसे छीलते ही रस टपकने लगता है, जिसके चलते दिल्ली-मुंबई से लेकर विदेशों तक इसकी भारी मांग है. मनोज झा ने बताया कि बरसात में 3 साल पुराना पौधा लगाने से 2-3 साल में ही बेहतरीन फल मिलने लगते हैं. पढ़िए इसकी खासियत.
दरभंगा: मिथिलांचल को यूं ही आम की राजधानी नहीं कहा जाता. यहां की मिट्टी, हवा और धूप आम को ऐसा स्वाद देती है कि दूर-दूर तक इसकी चर्चा होती है. मिथिला के आमों में भी अगर किसी को राजा का ताज पहनाया जाए तो वो है मालदह. मार्केट में इसके दाम हर साल बने रहते हैं. पतले छिलके और गूदे की भरमार के लिए ये आम पूरे देश में जाना जाता है. लेकिन मालदह की भी एक क्वीन है. जिसके आकार, स्वाद के सामने अन्य आम का स्वाद फेल है.
कौन है मालदह की क्वीन?
क्या आप जानते हैं कि मालदह की भी एक ‘क्वीन’ है? जी हां, उसे कहते हैं ‘दूधिया मालदह’. स्वाद और क्वालिटी में ये मालदह की सबसे बेस्ट किस्म मानी जाती है. कई जगह इसे लंगड़ा मालदह भी कहा जाता है. दरभंगा के किसान मनोज कुमार झा ने दूधिया मालदह की बागवानी बड़े पैमाने पर लगा रखी है. वे बताते हैं कि ये आम दिखने में सीधा-सादा है, पर स्वाद में बादशाह है.
दूधिया मालदह की खासियत
इस आम की सबसे बड़ी पहचान इसका कागज जैसा पतला छिलका है. छीलते समय ही रस टपकने लगता है. गूदा पीला, रेशे रहित और इतना मीठा कि एक बार खा लें तो बाकी आम फीके लगेंगे. इसी वजह से इसे दूधिया नाम मिला क्योंकि इसका रस दूध की तरह गाढ़ा और मीठा होता है.
आम का राजा मालदह गर्मी की शान है. इसका पौधा बरसात के मौसम में रोपा जाता है. मनोज झा कहते हैं, “हम हमेशा 3 साल पुराना तैयार पौधा लगाने की सलाह देते हैं. तीन साल का पेड़ जल्दी फल देता है और फल की क्वालिटी भी शानदार होती है. नए पौधे में 4-5 साल लग जाते हैं, पर पुराना पेड़ 2-3 साल में ही बाग को महका देता है.
मिथिला की पहचान
मालदह सिर्फ फल नहीं, मिथिला की पहचान है. इसका पतला छिलका और भरपूर गूदा इसे एक्सपोर्ट क्वालिटी भी बनाता है. दिल्ली, मुंबई से लेकर विदेश तक मिथिला का मालदह डिमांड में रहता है. दूधिया मालदह की बागवानी करके मनोज जैसे किसान न सिर्फ अच्छी कमाई कर रहे हैं, बल्कि मिथिला के आम के राजा की विरासत को भी बचा रहे हैं. जब अगली बार बाजार से आम खरीदें, तो दूधिया मालदह जरूर मांगिएगा पतले छिलके में लिपटी मिठास का असली मजा तभी आएगा.
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