होमफोटोलाइफ़फूड

किसानों ने नहीं बोया फिर भी फल से लद गए पेड़! भरतपुर के खजूर बना रहे नई पहचान

Last Updated:

Bharatpur Unique Fruit Khajoor: भरतपुर के ग्रामीण इलाकों में बिना बोए उगे खजूर के पेड़ फलों से लदे. विशेषज्ञ बोले अच्छी मिट्टी और सिंचाई से रेगिस्तान के बाहर भी खजूर की सफल खेती संभव है. भरतपुर के ग्रामीण इलाकों में खजूर के पेड़ लगे हुए हैं. और इन पेड़ों में खजूर लग रहे हैं. खास बात है कि इनको ना तो किसी किसान द्वारा बोया जाता है और ना ही इनकी देख रेख की जाती है.

भरतपुर जिले से ऐसी तस्वीर सामने आई है. जिसने लोगों को चौंका दिया है. आमतौर पर खजूर की खेती का नाम आते ही राजस्थान के जैसलमेर बाड़मेर जैसे रेगिस्तानी इलाकों की छवि दिमाग में आती है. लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग है.यहां न तो दूर-दूर तक रेत के टीले हैं. और न ही सूखी बंजर जमीन फिर भी खजूर के पेड़ फलों से लदे हुए नजर आ रहे हैं. पेड़ों पर लटकते खजूर के गुच्छे लोगों को हैरान कर रहे हैं.

भरतपुर के ग्रामीण इलाकों में खजूर के पेड़ लगे हुए हैं. और इन पेड़ों में खजूर लग रहे हैं. खास बात है कि इनको ना तो किसी किसान द्वारा बोया जाता है और ना ही इनकी देख रेख की जाती है. फिर भी इन पेड़ों में खजूर के गुच्छे लगे हुए है. यह पेड़ खेत की डोर मेंडो पर अपने आप उग जाते हैं. अब ये पेड़ पूरी तरह विकसित हो चुके हैं. और इनमें मीठे खजूर के गुच्छे साफ नजर आ रहे है.

विशेषज्ञों का मानना है कि खजूर की खेती केवल रेगिस्तानी जलवायु तक सीमित नहीं है. यदि मिट्टी की गुणवत्ता अच्छी हो सिंचाई की सही व्यवस्था हो और पौधों की देखभाल नियमित रूप से की जाए तो खजूर की खेती अन्य क्षेत्रों में भी सफल हो सकती है. भरतपुर में भी यही देखने को मिल रहा है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

यह खजूर आम खजूर से थोड़ा अलग होता है. लेकिन स्वाद वही होता है जो खजूर में होता है. पोषण के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद फल माना जाता है. इसमें आयरन, फाइबर, कैल्शियम और कई जरूरी विटामिन्स पाए जाते हैं. जो शरीर के लिए लाभकारी होते हैं. इन दिनों अब यह फल भरतपुर के ग्रामीण इलाके में पककर तैयार हो गया है.

भरतपुर के ऐसी कोई ग्रामीण इलाके हैं जहां यह खजूर काफी अधिक संख्या में देखने के लिए मिलते हैं. कई क्षेत्रों में लोग इनको जंगली खजूर के नाम से भी जानते है. बात करें अगर इसके स्वाद और इसकी बनावट की तो यह फल पक करके लाल और थोड़ा पीला हो जाता है. जो देखने में भी अच्छा और खाने में भी अच्छा होता है.

भरतपुर में खजूर के यह पेड़ एक नई दिशा दिखा रहे है. बदलते समय के साथ खेती के तौर-तरीकों में नवाचार जरूरी है. सही जानकारी तकनीक और मेहनत के दम पर किसान किसी भी क्षेत्र में नई तस्वीर उगाकर सफलता हासिल कर सकते हैं. और भरतपुर के खजूर के पेड़ इसकी जीती-जागती मिसाल बन चुके हैं.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

Write A Comment