Cut Fruits Storage: गर्मियों में ज्यादातर लोग तरबूज, खरबूजा, पपीता या अनानास जैसे फलों को काटकर फ्रिज में रख देते हैं ताकि बार-बार काटने की झंझट न रहे और ठंडे फल आसानी से मिल जाएं. देखने में यह आदत काफी आसान लगती है, लेकिन कई बार यही छोटी सी लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है. बहुत से लोग सोचते हैं कि फ्रिज में रखने के बाद फल पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं, जबकि सच यह है कि कटने के बाद फलों की ताजगी तेजी से कम होने लगती है. हवा, नमी और बैक्टीरिया के संपर्क में आने के बाद उनमें खराबी शुरू हो जाती है, अगर सही तरीके से स्टोर न किया जाए तो कटे हुए फल पेट से जुड़ी दिक्कतों की वजह भी बन सकते हैं.

खासकर गर्म मौसम में बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं और फल जल्दी खराब हो जाते हैं. यही कारण है कि एक्सपर्ट कटे फलों को ज्यादा देर तक स्टोर करने से बचने की सलाह देते हैं, अगर आप भी अक्सर कटे हुए फल फ्रिज में रखते हैं, तो यह जानना जरूरी है कि उन्हें कितनी देर तक सुरक्षित रखा जा सकता है और स्टोर करने का सही तरीका क्या है.

कटे हुए फल जल्दी क्यों खराब होते हैं?
जब भी किसी फल को काटा जाता है, उसकी बाहरी सुरक्षा परत हट जाती है. इसके बाद फल सीधे हवा और नमी के संपर्क में आ जाता है. यही वजह है कि उनमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं. साल्मोनेला, ई. कोलाई और लिस्टेरिया जैसे हानिकारक बैक्टीरिया कटे फलों में तेजी से बढ़ सकते हैं. फ्रिज बैक्टीरिया की रफ्तार को धीमा जरूर करता है, लेकिन उन्हें पूरी तरह खत्म नहीं करता. इसलिए यह मान लेना गलत है कि फ्रिज में रखा हर कटे फल पूरी तरह सुरक्षित है.

ऑक्सीडाइजेशन से कम हो जाते हैं पोषक तत्व
आपने कई बार देखा होगा कि कटने के कुछ देर बाद सेब या केला भूरा पड़ने लगता है. यह ऑक्सीडाइजेशन की वजह से होता है. हवा के संपर्क में आने पर फलों में मौजूद विटामिन-सी जैसे पोषक तत्व धीरे-धीरे कम होने लगते हैं. यानी फल सिर्फ स्वाद ही नहीं खोते, बल्कि उनका न्यूट्रिशन भी कम होने लगता है. लंबे समय तक कटे फल रखने से उनकी गुणवत्ता प्रभावित होती है.

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कितने समय तक सुरक्षित रहते हैं कटे फल?
कटे फलों की सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि उन्हें किस तापमान पर रखा गया है. अगर फल कमरे के तापमान पर रखे हैं, तो उन्हें 4 से 6 घंटे के अंदर खा लेना चाहिए. अगर फ्रिज का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से कम है, तो ज्यादातर कटे फल करीब 24 घंटे तक ठीक रह सकते हैं. तरबूज, खरबूजा, पपीता और अनानास जैसे ज्यादा पानी वाले फल जल्दी खराब होते हैं. केला और सेब जैसे फल जल्दी रंग बदलते हैं, इसलिए इन्हें काटने के तुरंत बाद खाना बेहतर माना जाता है.

लोग स्टोर करते समय कौन सी गलतियां करते हैं?
कई लोग कटे फलों को प्लेट में खुला छोड़ देते हैं या हल्के फॉयल में ढककर फ्रिज में रख देते हैं. इससे फल लगातार हवा के संपर्क में बने रहते हैं और जल्दी खराब हो जाते हैं. इसके अलावा बार-बार फ्रिज खोलने से अंदर का तापमान बदलता रहता है. तापमान में उतार-चढ़ाव होने पर फलों में खराबी तेजी से बढ़ती है. कई बार लोग एक ही कंटेनर को बार-बार खोलते रहते हैं, जिससे बाहर की दूषित हवा अंदर पहुंचती रहती है.

कटे फलों को सुरक्षित रखने का सही तरीका

1. एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल करें
कटे हुए फलों को हमेशा कांच या अच्छी क्वालिटी के एयरटाइट कंटेनर में रखें. इससे हवा अंदर कम जाती है और फल ज्यादा समय तक ताजे बने रहते हैं.

2. साफ-सफाई का ध्यान रखें
फल काटने से पहले हाथ, चाकू और कटिंग बोर्ड अच्छी तरह साफ करें. गंदे बर्तन या चाकू से बैक्टीरिया सीधे फल के अंदर पहुंच जाते हैं.

3. तुरंत फ्रिज में रखें
फल काटने के बाद उन्हें ज्यादा देर बाहर न छोड़ें. तुरंत फ्रिज में रखना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है.

4. छोटे हिस्सों में स्टोर करें
अगर ज्यादा फल काट रहे हैं, तो उन्हें छोटे-छोटे कंटेनर में रखें. इससे हर बार पूरा कंटेनर खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

कैसे पहचानें कि फल खराब हो चुके हैं?
कई बार फल देखने में ठीक लगते हैं, लेकिन अंदर से खराब हो चुके होते हैं. ऐसे में इन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है. फल से खट्टी या फर्मेंटेशन जैसी गंध आना, फल का चिपचिपा हो जाना, ज्यादा पानी छोड़ना, रंग का बहुत ज्यादा गहरा या काला पड़ जाना, स्वाद में बदलाव महसूस होना. अगर इनमें से कोई भी संकेत दिखे, तो ऐसे फल खाने से बचना चाहिए.

बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा जरूरी सावधानी
कटे हुए खराब फल बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए ज्यादा नुकसानदायक हो सकते हैं. ऐसे लोगों में फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए उनके लिए हमेशा ताजे और तुरंत कटे फल देना ज्यादा सुरक्षित रहता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)



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