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Mattha Bada recipe: गर्मी के मौसम में जब रोज-रोज के खाने से मन ऊब जाए और कुछ ठंडा, स्वादिष्ट व देसी खाने का दिल करे, तब अवध का पारंपरिक व्यंजन मट्ठा बड़ा स्वाद का बेहतरीन विकल्प बन जाता है. खट्टे-चटपटे मट्ठे में डूबे नरम उड़द दाल के बड़े न सिर्फ जीभ का स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि गर्मी से भी राहत देते हैं. खास बात यह है कि भोज से लेकर घरेलू दावतों तक में पसंद किया जाने वाला यह व्यंजन बेहद आसान तरीके से घर पर तैयार किया जा सकता है. तो आइये आज हम आपको इसे बनाने की पूरी विधि बताते हैं. जिससे आप भी घर बैठे बेहतरीन स्वाद ले सकते हैं.
व्यंजन स्पेशलिस्ट सविता श्रीवास्तव लोकल 18 से बताते बताती हैं कि उत्तर भारत के सुल्तानपुर समेत पूरे अवध क्षेत्र में कई पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनमें मट्ठा बड़ा का विशेष स्थान है. यह व्यंजन उड़द दाल से तैयार किए गए बड़े और मसालेदार मट्ठे से बनता है. बड़े को मट्ठे में भिगोने के बाद उसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. मट्ठे की खटास और मसालों का मिश्रण इसे गर्मी के मौसम में बेहद पसंदीदा व्यंजन बनाती है. यदि इसे फ्रिज में रखकर ठंडा करने के बाद खाया जाए तो यह और स्वादिष्ट लगेगा.
मट्ठा बड़ा बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण दाल उड़द की दाल होती है. इसके सलिए सबसे पहले उड़द की दाल को रात भर पानी में भिगोया जाता है. क्योंकि जब दाल अच्छी तरह फूल जाती है और पीसने में आसानी होती है. अगले दिन दाल को खुरदुरी बनावट में पीसा जाता है. इस मिक्सचर में मसाले मिलाकर तैयार किया जाता है. सही तरीके से तैयार की गई दाल ही स्वादिष्ट और मुलायम बनाने के लिए बेहतर होती है.
सविता आगे बताती हैं कि दाल पीसने के बाद उसमें नमक, हींग और काली मिर्च मिलाई जाती है. इसके बाद मिश्रण को अच्छी तरह फेंटा जाता है ताकि वह हल्का और फूला हुआ बने. हरी मिर्च, अदरक और बारीक कटी धनिया पत्ती मिलाने से स्वाद और सुगंध दोनों बढ़ जाता है. मसालों का सही मिश्रण ही बड़े को स्वादिष्ट बनाता है.
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मट्ठा बड़ा बनाते समय एक महत्वपूर्ण बात का ध्यान रखना चाहिए कि बड़े या पेटीज के बीच में गोल छेद अवश्य बनाना चाहिए. इससे तलते समय बड़ा टूटता नहीं है और उसका आकार बना रहता है. छेद होने से तेल भी आसानी से अंदर तक पहुंचता है. यही कारण है कि पकने के बाद बड़ा आकर्षक दिखता है और उसका स्वाद भी बेहतर होता है.
जब मिश्रण तैयार हो जाए तो सरसों के तेल में इसे तब तक भूनें जब तक कि सुनहरा होने तक तला न जाए. सरसों के तेल की खुशबू बड़े के स्वाद को और भी बेहतर बनानती है. बड़े को मध्यम आंच पर तलने से वह बाहर से कुरकुरा और अंदर से नरम बनता है. सही तरीके से तला गया बड़ा मट्ठे में डालने के बाद भी अपना स्वाद और बनावट बनाए रखता है.
मट्ठा बड़ा का असली स्वाद उसके मट्ठे में छिपा होता है. मट्ठे में भुना हुआ जीरा, काला नमक और अन्य हल्के मसाले मिलाए जाते हैं. ये मसाले मट्ठे को सुगंधित और स्वादिष्ट बनाते हैं. अच्छी तरह फेंटा गया मट्ठा बड़े में आसानी से समा जाता है. मसालों का संतुलन ही इस व्यंजन को खास पहचान दिलाता है.
मट्ठा बड़ा विशेष रूप से गर्मियों के मौसम में काफी पसंद किया जाता है. ठंडा मट्ठा शरीर को ताजगी देता है और पाचन में भी सहायक माना जाता है। स्वाद, पौष्टिकता और परंपरा का अनोखा संगम होने के कारण यह व्यंजन अवध क्षेत्र के कई घरों में आज भी बनाया जाता है. इसकी सादगी और स्वाद ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है. यह श्राद्ध, ब्रह्म भोज जैसे कार्यक्रमों में बनवाया जाता है जिसे लोग बड़े चाव से खाते हैं.
मट्ठा बड़ा विशेष रूप से गर्मियों के मौसम में काफी पसंद किया जाता है. ठंडा मट्ठा शरीर को ताजगी देता है और पाचन में भी सहायक माना जाता है। स्वाद, पौष्टिकता और परंपरा का अनोखा संगम होने के कारण यह व्यंजन अवध क्षेत्र के कई घरों में आज भी बनाया जाता है. इसकी सादगी और स्वाद ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है. यह श्राद्ध, ब्रह्म भोज जैसे कार्यक्रमों में बनवाया जाता है जिसे लोग बड़े चाव से खाते हैं.