Khedha Bhaji Dal Recipe: गर्मी में हल्का, पौष्टिक और आसानी से पचने वाला भोजन बढ़िया होता है. ऐसे में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक खेड़हा भाजी और मिक्स दाल की रेसिपी मौसम के अनुसार मुफीद है. इस रेसिपी में स्वाद और सेहत का बेहतरीन संगम है. ग्रामीण अंचलों में पीढ़ियों से बनाई जा रही यह देसी डिश न केवल शरीर को आवश्यक पोषण देती है, बल्कि गर्मी में ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करती है.

खेतों और मेड़ों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली खेड़हा भाजी को चना, अरहर और मसूर दाल के साथ पकाकर तैयार किया जाता है. देसी मसालों और सरसों के तड़के से सजी यह रेसिपी छत्तीसगढ़ की समृद्ध खानपान संस्कृति की पहचान मानी जाती है. स्वाद, पौष्टिकता और परंपरा का अनोखा मेल लिए यह व्यंजन आज भी गांवों की रसोई में खास स्थान रखता है.

छत्तीसगढ़ की देसी और पौष्टिक सौगात खेड़हा भाजी
खेड़हा भाजी छत्तीसगढ़ के गांवों में मिलने वाली एक पारंपरिक हरी भाजी है, जो खेतों और आसपास के प्राकृतिक क्षेत्रों में उगती है. ग्रामीण महिलाएं इसे सावधानीपूर्वक चुनकर और साफ करके भोजन में शामिल करती हैं. यह भाजी पोषक तत्वों से भरपूर होती है और गर्मी के मौसम में शरीर को हल्का एवं स्वस्थ रखने में मदद करती है.

तीन दालों का मेल 
इस खास रेसिपी में चना दाल, अरहर दाल और मसूर दाल का उपयोग किया जाता है. तीनों दालें प्रोटीन, फाइबर, आयरन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं. खेड़हा भाजी के साथ इनका संयोजन इसे एक संपूर्ण और संतुलित भोजन बना देता है, जो शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करता है.

देसी अंदाज में करें तैयार
बिलासपुर की गृहिणी भाग्यवती बताती हैं कि सबसे पहले खेड़हा भाजी और तीनों दालों को कुकर में अच्छी तरह पकाया जाता है. इसके बाद कढ़ाही में सरसों के तेल और जीरे का तड़का लगाया जाता है. इसमें लहसुन, अदरक, हरी मिर्च और प्याज को सुनहरा होने तक भूनकर मसाले तैयार किए जाते हैं. फिर टमाटर डालकर मसाले को पकाया जाता है और अंत में पकी हुई भाजी-दाल को इसमें मिलाकर कुछ देर तक धीमी आंच में पकाया जाता है. ऊपर से हरा धनिया डालने से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है.

शरीर को देता है जरूरी पोषण
खेड़हा भाजी और मिक्स दाल का यह व्यंजन गर्मी के मौसम के लिए काफी लाभदायक माना जाता है. इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है, जबकि दालों का प्रोटीन शरीर को ताकत और ऊर्जा प्रदान करता है. यह भोजन बच्चों, बुजुर्गों और मेहनत करने वाले लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद माना जाता है.

छत्तीसगढ़िया थाली की शान
ग्रामीण क्षेत्रों में यह व्यंजन खासतौर पर गर्मी और बरसात के मौसम में बनाया जाता है. गरम चावल, रोटी या बाजरे की रोटी के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. छत्तीसगढ़ की परंपरा और देसी स्वाद को पसंद करने वाले लोगों के लिए यह रेसिपी किसी विरासत से कम नहीं है.

देसी स्वाद और सेहत का संगम
खेड़हा भाजी और मिक्स दाल की यह पारंपरिक रेसिपी छत्तीसगढ़ की समृद्ध खाद्य संस्कृति की झलक प्रस्तुत करती है. यदि आप गर्मी के मौसम में स्वादिष्ट, पौष्टिक और देसी भोजन का आनंद लेना चाहते हैं, तो यह रेसिपी आपकी थाली के लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है.



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