घर पर तैयार किया गया मल्टीग्रेन आटा न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है. बाजार में मिलने वाले आटे की तुलना में यह अधिक पोषक और शुद्ध होता है, क्योंकि इसमें आपके द्वारा चुने गए अनाज का संतुलित मिश्रण शामिल होता है. आइए जानते हैं इसे बनाने का आसान तरीका.
मल्टीग्रेन आटा क्यों है खास?
मल्टीग्रेन आटे में कई प्रकार के अनाज होते हैं, जैसे गेहूं, जौ, बाजरा, मक्का, रागी, ओट्स, चना आदि. यह फाइबर, प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और विटामिन से भरपूर होता है. इससे पाचन बेहतर होता है, वजन नियंत्रण में मदद मिलती है और शरीर को भरपूर ऊर्जा मिलती है.
आवश्यक सामग्री
गेहूं – 5 किलो
जौ – 500 ग्राम
बाजरा – 500 ग्राम
मक्का – 500 ग्राम
रागी – 250 ग्राम
चना (भुना या कच्चा) – 250 ग्राम
सोया बीन – 200 ग्राम
ओट्स – 200 ग्राम
इसके अलावा आप अपनी पसंद के अनुसार मात्रा को कम या ज्यादा भी कर सकते हैं.
बनाने की विधि
सफाई करें: सबसे पहले सभी अनाज को अच्छी तरह साफ करें. ध्यान रखें कि इनमें किसी प्रकार की मिट्टी या कंकड़ न हो.
धोना: कुछ लोग अनाज को हल्का धोकर सुखाते हैं, लेकिन ध्यान दें कि पानी पूरी तरह सूख जाए.
धूप में सुखाएं: सभी अनाज को 1–2 दिन अच्छी धूप में फैलाकर सुखाएं. इससे नमी खत्म हो जाती है और आटा लंबे समय तक खराब नहीं होता.
हल्का भूनना: जौ, चना और सोया बीन को हल्का भून लें. इससे स्वाद बढ़ता है और पाचन आसान होता है.
पीसना: सभी अनाज को मिलाकर चक्की में पिसवा लें या घर की ग्राइंडर मशीन में धीरे-धीरे पीसें.
छानना: यदि आप मुलायम आटा चाहते हैं तो इसे चलनी से छान लें.
उपयोग कैसे करें?
इस मल्टीग्रेन आटे से आप रोटी, पराठा, पूरी, ढोकला या यहां तक कि चीला भी बना सकते हैं. इसका स्वाद गेहूं की रोटी से थोड़ा अलग लेकिन बेहद लाजवाब होता है.
सेहत के फायदे
पाचन सुधारता है: ज्यादा फाइबर होने से कब्ज की समस्या दूर होती है.
दिल के लिए अच्छा: यह कोलेस्ट्रॉल को संतुलित करने में मदद करता है.
वजन नियंत्रण: लंबे समय तक पेट भरा रहता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती.
हड्डियों को मजबूत बनाता है: कैल्शियम और आयरन की अच्छी मात्रा मिलती है.
ध्यान रखने वाली बातें
आटे को हमेशा एयरटाइट कंटेनर में रखें.
अधिक समय के लिए स्टोर न करें, बेहतर है 1 महीने के अंदर उपयोग कर लें.
बरसात के मौसम में नमी से बचाकर रखें.