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Bikaner Special Sweet: गर्मियों के मौसम में एक खास पारंपरिक मिठाई लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. इस अनोखी मिठाई की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पहले कूटा जाता है और फिर इससे स्वादिष्ट लड्डू तैयार किए जाते हैं. देसी स्वाद और पारंपरिक विधि से बनने वाली यह मिठाई गर्मी के दिनों में काफी पसंद की जाती है, जिसके चलते इसकी मांग तेजी से बढ़ जाती है. स्थानीय मिठाई दुकानों पर इसे खरीदने वालों की भीड़ देखने को मिल रही है. मिठाई बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री शरीर को ठंडक देने में भी मदद करती है, इसलिए लोग इसे खास तौर पर गर्मियों में खाना पसंद करते हैं.
बीकानेर. बीकानेर देशभर में अपनी पारंपरिक मिठाइयों और नमकीनों के लिए खास पहचान रखता है. यहां की भुजिया, रसगुल्ले और विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है. लेकिन भीषण गर्मी के मौसम में बीकानेर में एक ऐसी अनोखी मिठाई तैयार की जाती है, जिसका नाम और बनाने का तरीका दोनों ही बेहद खास हैं. यह मिठाई है “कुटवा लड्डू”, जिसे बनाने के लिए पहले बूंदी तैयार की जाती है और फिर उसे कूटकर लड्डू का रूप दिया जाता है.
भीषण गर्मी के दिनों में इस मिठाई की मांग काफी बढ़ जाती है. स्थानीय लोगों के अनुसार यह लड्डू स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. खासकर पेट को ठंडक पहुंचाने और गर्मी में होने वाली पेट संबंधी परेशानियों से राहत दिलाने के कारण लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं. यही वजह है कि दुकान पर बनते ही यह लड्डू हाथों-हाथ बिक जाता है.
मिठाई को तैयार करने में लगभग पूरा दिन लग जाता
कुटवा लड्डू बनाने वाले दुकानदार जोरावर बताते हैं कि इस खास मिठाई को तैयार करने में लगभग पूरा दिन लग जाता है. इसकी रेसिपी आम लड्डुओं से बिल्कुल अलग होती है. सबसे पहले बेसन को घी में तलकर फीकी बूंदी बनाई जाती है. इसके बाद उस बूंदी को बड़े ही पारंपरिक तरीके से कूटा जाता है. बूंदी जितनी बारीक कुटती है, स्वाद उतना ही खास हो जाता है. इसके बाद उसमें चाशनी मिलाई जाती है और खुशबू व स्वाद बढ़ाने के लिए गुलाबजल, केसर, पिस्ता और बादाम जैसे ड्राई फ्रूट्स डाले जाते हैं. आखिर में इस मिश्रण को लड्डू का आकार दिया जाता है.
बीकानेर में ‘कुटवा लड्डू’
जोरावर बताते हैं कि इस मिठाई का नाम भी इसकी प्रक्रिया से ही पड़ा है. पहले लोग फीकी बूंदी को सीधे खाते थे, लेकिन ग्रामीण इलाकों में लोगों ने बूंदी को कूटकर खाने की शुरुआत की. बाद में उसी से लड्डू बनाए जाने लगे और इसका नाम “कुटवा लड्डू” पड़ गया. उनका कहना है कि जैसे जैसलमेर में ‘घुटवा लड्डू’ प्रसिद्ध है, वैसे ही बीकानेर में ‘कुटवा लड्डू’ अपनी अलग पहचान बना चुका है.
पर्यटक भी इस खास मिठाई का स्वाद लेना नहीं भूलते
बाजार में इस लड्डू की कीमत करीब 440 रुपये प्रति किलो है. स्वाद और पारंपरिक पहचान के कारण लोग इसे अपने रिश्तेदारों और परिचितों के लिए पैक करवाकर दूसरे शहरों में भी भेजते हैं. गर्मी के मौसम में बीकानेर आने वाले पर्यटक भी इस खास मिठाई का स्वाद लेना नहीं भूलते.
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