वैश्विक अर्थव्यवस्था और ब्रिक्स (BRICS) संगठन के बड़े खिलाड़ियों के बीच हर देश की अपनी एक तय ताकत दिखाई देती है। चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क है, रूस के पास अपार तेल व गैस का ऊर्जा भंडार है और यूएई व सऊदी अरब जैसे नए सदस्यों के पास भारी-भरकम कैपिटल यानी पूंजी है। ऐसे में यह सवाल काफी अहम हो जाता है कि इस शक्तिशाली मंच पर भारत की सबसे अनूठी और मजबूत पहचान क्या है?

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में भारत ने साबित कर दिया है कि उसकी असली ताकत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), यूपीआई (UPI), फार्मास्यूटिकल्स और तकनीकी क्षमता है। भारत तकनीक के इसी मॉडल को पूरे ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) के विकास का मुख्य हथियार बनाकर पेश कर रहा है।

1. डिजिटल क्रांति

भारत ने वित्तीय समावेशन और डिजिटल कनेक्टिविटी के मामले में दुनिया के सामने एक सफल मॉडल पेश किया है। भारत में सिर्फ UPI के जरिए हर साल 250 अरब से ज्यादा डिजिटल लेनदेन हो रहे हैं। यह दुनिया में होने वाले कुल डिजिटल लेनदेन के 50 फीसदी से भी ज्यादा है। भारत ने BRICS देशों के लिए एक साझा ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) रिपोजिटरी’ बनाने का सुझाव दिया है। इसका मकसद अलग-अलग देशों के डिजिटल सिस्टम को आपस में जोड़ना और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार व सीमा पार भुगतान को आसान बनाना है। भारत चाहता है कि BRICS देश UPI जैसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जुड़ें, ताकि देशों के बीच भुगतान तेज और आसान हो सके।

2. स्वास्थ्य सुरक्षा

वैश्विक महामारी से लेकर सप्लाई चेन के मौजूदा संकट तक, भारत ने दुनिया की दवा जरूरतों को पूरा करने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। जेनेरिक दवाओं और किफायती टीकों के उत्पादन के कारण भारत ब्रिक्स देशों के बीच स्वास्थ्य सुरक्षा का सबसे विश्वसनीय स्तंभ बना हुआ है।

3. स्किल्ड वर्कफोर्स और नई तकनीक

चीन जहां बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा जोर दे रहा है, वहीं भारत का फोकस आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्किल्ड कर्मचारियों को तैयार करने पर है। भारत BRICS देशों में क्षमता निर्माण केंद्रों के जरिए लोगों को नई तकनीकों की ट्रेनिंग देने और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार वर्कफोर्स बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

ग्लोबल साउथ की आवाज बनता भारत

पश्चिमी देशों और चीन के बीच बढ़ रहे तकनीकी और आर्थिक ध्रुवीकरण के बीच, भारत खुद को एक विश्वबंधु और विकासशील देशों के एक विश्वसनीय और निष्पक्ष साझेदार के रूप में स्थापित कर रहा है। चीन का मॉडल जहां कर्ज और इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित रहता है, वहीं भारत का इंसाफपसंद टेक्नोलॉजी मॉडल दूसरे देशों को आत्मनिर्भर बनने की आजादी देता है। यही वजह है कि BRICS के मंच पर भारत का UPI, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और किफायती फार्मास्यूटिकल्स केवल भारत का ट्रेडमार्क ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक नया आर्थिक और सामाजिक रास्ता बन चुका है।

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