Highlights

  • जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026 लोकसभा से पास
  • जन्म और मृत्यु पंजीकरण के अब सख्त हो गए हैं नियम
  • दो वर्ष से अधिक की देरी पर होगी परेशानी

लोकसभा ने शुक्रवार (31 जुलाई 2026) को  ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को बिना किसी बहस के पारित कर दिया। यह विधेयक, 2026 को 29 जुलाई, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। इस विधेयक का उद्देश्य ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969’ के प्रावधानों में संशोधन करना है ताकि जन्म और मृत्यु की समय पर रिपोर्टिंग को बढ़ावा दिया जा सके। इस बिल का मकसद जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन में देरी के मामलों को और सख्त बनाना है। इसके तहत, किसी बच्चे के जन्म या किसी की मौत के दो साल बाद होने वाले रजिस्ट्रेशन के लिए ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (फर्स्ट क्लास) के आदेश की ज़रूरत होगी। मौजूदा कानून के तहत, एक साल से ज़्यादा की देरी वाले रजिस्ट्रेशन के लिए डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट या अधिकृत एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के आदेश की ज़रूरत होती है।

Image Source : INDIATVपंजीकरण के नए नियम

नए कानून में क्या है खास

  • दो साल तक की देरी के मामलों में यही नियम लागू रहेगा।
  • इस कानून को पेश करने की मंज़ूरी यूनियन कैबिनेट ने 20 जुलाई को दी थी।
  • यह 2023 में मूल कानून में किए गए बदलावों के बाद, रजिस्ट्रेशन में देरी की प्रक्रिया में और बदलाव का प्रस्ताव करता है।
  • यह बिल कानूनी परिभाषाओं को भी अपडेट करता है।
  • इसमें “एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट” शब्द को ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023’ के अनुरूप बनाया गया है
  •  1973 के ‘कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर’ के पुराने संदर्भों को हटा दिया गया है। 
  • जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026 को अब राज्यसभा की मंज़ूरी का इंतज़ार है।

 

जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियम क्यों बदले गए


इस बिल को लाने का मकसद फर्जी दस्तावेज़ के सहारे रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाना है। अभी कई लोग बच्चे के जन्म के कई साल बाद बर्थ सर्टिफिकेट बनाते हैं, Date of Birth में भी हेरफेर करते हैं। लेकिन अब ऐसा करना बहुत मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा Fake Birth Certificate पर भी रोक लगेगी। ठीक ऐसे ही परिवार में किसी की मृत्यु के बाद सर्टिफिकेट बनाने में देरी की जाती है। सरकार का मानना है कि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र आज सिर्फ एक दस्तावेज नहीं रह गए हैं, स्कूल में एडमिशन से लेकर पासपोर्ट बनाने, सरकारी योजनाओं, संपत्ति विवाद और कानूनी प्रक्रियाओं तक में इनकी जरूरत पड़ती है। ऐसे में गलत या फर्जी प्रमाणपत्र बड़ी समस्या बन सकते हैं। इसी वजह से पंजीकरण के नियमों में बदलाव की जरूरत थी। 

पहले क्या थे जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियम

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन करना था। पहले इस अधिनियम के तहत, जन्म या मृत्यु की सूचना घटना घटने के एक वर्ष बाद रजिस्ट्रार को दिए जाने पर पंजीकरण हेतु आदेश जारी करना आवश्यक था। ऐसा आदेश (i) जिला मजिस्ट्रेट, (ii) उप-विभागीय मजिस्ट्रेट, या (iii) जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया जा सकता था। आदेश सत्यता की जांच के बाद और निर्धारित शुल्क के भुगतान पर जारी किया जा सकता है। अब नए विधेयक में इसके विपरीत यह प्रावधान है कि दो वर्ष से अधिक की देरी होने पर आदेश केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा ही जारी किया जा सकता है।   

नया नियम कब से होगा लागू

  • नए एक्ट को जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन (संशोधन) एक्ट, 2026 कहा जा सकता है।
  • यह उस तारीख से लागू होगा जिसे केंद्र सरकार, ऑफिशियल गजट में नोटिफिकेशन के ज़रिए तय करे।
  • जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1969 में, धारा 13 में, उप-धारा (3) की जगह निम्नलिखित उप-धाराएं जोड़ी जाएंगी।
  • जन्म या मृत्यु की सत्यता की पुष्टि करने के बाद और निर्धारित शुल्क के भुगतान पर ही किया जाएगा।


 

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