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Vidhayak Kachori Ghazipur : गाजीपुर के नवाबगंज में स्थित ‘विधायक जी की दुकान’ सिर्फ जायके का अड्डा नहीं, बल्कि सियासत की गवाह है. मुख्तार अंसारी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले शंकर प्रसाद जायसवाल की इस दुकान पर आज भी रोजाना 20,000 खस्ता-कचौड़ियां बिक जाती हैं. कम मसालेदार और शुद्ध स्वाद के चलते यहां कलराज मिश्र जैसे बीजेपी के नेता भी कचौड़ी खाने आ चुके हैं. 20000 खस्ता-कचौड़ी 1 दिन में बिक जाती है. नवाबगंज मोहल्ले या नवाब साहब फाटक के पास स्थित यह दुकान गाजीपुर की विरासत का हिस्सा है.
गाजीपुर. कहावत है कि ऊंची दुकान-फीका पकवान, लेकिन आज हम आपको गाजीपुर की एक ऐसी दुकान पर ले आए हैं, जहां यह कहावत पूरी तरह बदल जाती है. यहां दुकान भी ऊंची है और पकवान का दमदार है. यह है गाजीपुर के नवाबगंज इलाके की मशहूर ‘विधायक जी की दुकान. वही दुकान जिसके मालिक शंकर प्रसाद जायसवाल ने कभी चुनावी मैदान में मुख्तार अंसारी को चुनौती दी थी. आज भी राजनीति के किस्सों के साथ यहां खस्ता कचौड़ी और छोले का जायका परोसा जाता है.
कभी बिकती थी चाय
नवाबगंज मोहल्ले या नवाब साहब फाटक के पास स्थित यह दुकान गाजीपुर की विरासत का हिस्सा है. दुकान के मालिक शंकर प्रसाद जायसवाल ने 1994 के उस ऐतिहासिक उपचुनाव में सदर विधानसभा सीट से ताल ठोकी थी, जिसमें मुख्तार अंसारी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के टिकट पर मैदान में थे. कभी यहां राजनीति की चर्चाओं के बीच चाय की चुस्कियां ली जाती थीं, लेकिन आज यहां की खस्ता कचौड़ी पूरे शहर की जुबान पर चढ़ी हुई है.
सुबह 7 से रात 11 तक
लोकल 18 टीम की टीम जब इस दुकान पर पहुंची, तो शंकर जायसवाल से बातचीत हुई. आज शंकर जी इस विरासत को संभाल रहे हैं. यहां की कचौड़ी की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘सादगी भरा स्वाद’ है. ग्राहकों का कहना है कि ये कचौड़ियां बहुत ही कम मसालेदार और कुरकुरी होती हैं, जिससे एसिडिटी की कोई समस्या नहीं होती. ताजा छोला और शुद्धता का ऐसा संगम है कि सुबह 7 बजे से ही यहां भीड़ जुटना शुरू हो जाती है और 11 बजे तक कड़ाही खाली हो जाती है. लगभग 20000 खस्ता-कचौड़ी 1 दिन में बिक जाती है.
दिग्गजों का ठिकाना
इस दुकान की साख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि राजनीति के बड़े सूरमा भी स्वाद लेने पहुंचते रहे हैं. कलराज मिश्र, विजय मिश्रा और मार्कंडेय चंद जैसे दिग्गज नेता भी इस स्वाद के मुरीद रहे हैं. महज 30 से रुपये में पेट भरने वाला यह नाश्ता आज भी गाजीपुर की रवायत को जिंदा रखे हुए है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें