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पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच सियासत के साथ-साथ खाने-पीने की चीजें भी खूब चर्चा में हैं. पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का झालमुड़ी खाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, और अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पंता भात अचानक ट्रेंड में आ गया है. वोटिंग को लेकर दिए गए उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर इस पारंपरिक डिश को लेकर मीम्स, रील्स और रेसिपी वीडियो की बाढ़ आ गई. ऐसे में अब हर कोई जानना चाहता है कि आखिर पंता भात क्या है और क्यों यह चुनावी मौसम में इतना मशहूर हो गया है. आइए जानते हैं इस डिश के बारे में…

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पंता भात की खास रेसिपी.

पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच जहां राजनीतिक बयानबाजी तेज है, वहीं इस बार चर्चा सिर्फ नेताओं की नहीं बल्कि खाने की एक पुरानी डिश की भी हो रही है. पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के झालमुड़ी खाते वीडियो ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं, और अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक अपील के बाद ‘पंता-भात’ अचानक ट्रेंड में आ गया है. बहुत से लोग इस नाम को पहली बार सुन रहे हैं और जानना चाह रहे हैं कि आखिर यह डिश क्या है, जिसे लेकर इतना शोर मचा हुआ है.

दरअसल, ममता बनर्जी ने वोटिंग के दिन लोगों से कहा कि जरूरत हो तो खाना बनाने की चिंता न करें, एक दिन पहले पंता-भात तैयार करके रख लें. उनका मकसद था कि लोग सुबह जल्दी मतदान करने जाएं और खाना बनाने में समय खराब न हो. लेकिन सोशल मीडिया ने इस बयान को अलग ही रंग दे दिया. देखते ही देखते पंता-भात पर मीम्स, वीडियो और रेसिपी पोस्ट वायरल होने लगे. इसके बाद यह साधारण सी डिश फिर से चर्चा में आ गई.

क्या है पंता भात?
पंता-भात बंगाल की बेहद पुरानी और पारंपरिक डिश है. इसे बनाने का तरीका बहुत आसान है. रात के बचे हुए चावल को पानी में भिगोकर रातभर रखा जाता है और अगले दिन इसे खाया जाता है. सुबह तक चावल हल्का खमीर जैसा स्वाद लेने लगता है, जो इसे खास बनाता है.

कैसे बनता है पंता भात?
इसे नमक, हरी मिर्च, प्याज, सरसों के तेल की कुछ बूंदें या तली हुई चीजों के साथ खाया जाता है. कुछ लोग इसके साथ मछली भुजिया या आलू भर्ता भी पसंद करते हैं. यह डिश सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि जरूरत और समझदारी से भी जुड़ी रही है. पुराने समय में जब फ्रिज नहीं होते थे, तब बचे हुए चावल को फेंकने के बजाय पानी में भिगोकर सेफ रखा जाता था. इससे चावल खराब भी नहीं होता था और अगले दिन खाने लायक भी रहता था. खासतौर पर गांवों में किसान सुबह जल्दी खेतों में निकल जाते थे, ऐसे में पंता-भात उनके लिए झटपट तैयार होने वाला खाना था. पेट भरता था, शरीर को ठंडक मिलती थी और गर्मी में राहत भी मिलती थी.

क्या है इस डिश के फायदे?
गर्मियों के मौसम में पंता-भात खाने का अलग ही मजा माना जाता है. यह ठंडा होता है और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है. कई लोग मानते हैं कि इसमें हल्का फर्मेंटेशन होने से पाचन में भी फायदा मिल सकता है. हालांकि इसे बहुत ज्यादा देर गर्म जगह पर रखना सही नहीं माना जाता, क्योंकि इससे खराब होने का डर रहता है. इसलिए इसे सही समय पर बनाकर ताजा खाना बेहतर रहता है.

ओडिशा में इसे पखाला भात कहा जाता है
बंगाल के अलावा देश के दूसरे हिस्सों में भी ऐसी डिश मिलती है. ओडिशा में इसे पखाला भात कहा जाता है, जो काफी लोकप्रिय है. वहीं कुछ ग्रामीण इलाकों में लोग बचे चावल को पानी में भिगोकर अलग-अलग तरीकों से खाते हैं. इससे साफ है कि यह सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि भारतीय रसोई की पुरानी समझ और बचत की संस्कृति का हिस्सा है. आज सोशल मीडिया की वजह से पंता-भात फिर से लोगों की नजर में आया है.

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Vividha SinghSub Editor

विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें



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