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तंदूरी चिकन और कड़ाही चिकन दोनों ही प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं, लेकिन इनके पकाने का तरीका कैलोरी और फैट में बड़ा अंतर ला सकता है. जानिए हाई-प्रोटीन डाइट, वजन घटाने और मसल्स बनाने के लिए दोनों में से कौन सा चिकन बेहतर विकल्प है.
तंदूरी और कढ़ाई चिकन.
चिकन को प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है, लेकिन इसे पकाने का तरीका उसकी कुल कैलोरी, फैट और पोषण प्रोफाइल को काफी बदल सकता है. यही वजह है कि फिटनेस या हाई-प्रोटीन डाइट लेने वाले लोगों के मन में अक्सर सवाल रहता है कि तंदूरी चिकन ज्यादा फायदेमंद है या कड़ाही चिकन. दोनों ही डिश में मुख्य सामग्री चिकन है, इसलिए प्रोटीन की मात्रा पूरी तरह अलग नहीं हो जाती. असली फर्क इसमें इस्तेमाल होने वाले तेल, मक्खन, क्रीम, ग्रेवी और चिकन के हिस्से से पड़ता है. आइए जानते हैं इसके फायदे…
तंदूरी चिकन में प्रोटीन ज्यादा मिलेगा?
अगर तंदूरी चिकन बिना ज्यादा मक्खन और तेल के बनाया गया है, तो यह हाई-प्रोटीन डाइट के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है. चिकन को दही और मसालों में मैरिनेट करके तंदूर में पकाया जाता है. इसमें आमतौर पर अलग से ज्यादा ग्रेवी या तेल की जरूरत नहीं होती. चिकन के मांस में सभी जरूरी अमीनो एसिड पाए जाते हैं, इसलिए यह complete protein का स्रोत है. प्रोटीन शरीर में मांसपेशियों की मरम्मत और निर्माण के अलावा कई दूसरे जरूरी कामों में भी भूमिका निभाता है.
हालांकि तंदूरी चिकन को पूरी तरह हेल्दी मान लेना भी सही नहीं है. अगर पकाने के दौरान बहुत ज्यादा तेल, मक्खन या क्रीम लगाई गई है, तो इसकी कैलोरी और फैट बढ़ सकते हैं.
कड़ाही चिकन में क्या बदल जाता है?
कड़ाही चिकन में चिकन को आमतौर पर तेल में प्याज, टमाटर, मसालों और दूसरी सामग्री के साथ पकाया जाता है. इसलिए इसकी पौष्टिकता रेसिपी पर काफी निर्भर करती है. अगर कम तेल में स्किनलेस चिकन, टमाटर, शिमला मिर्च और मसालों के साथ कड़ाही चिकन बनाया गया है, तो यह भी प्रोटीन से भरपूर और संतुलित भोजन का हिस्सा हो सकता है. लेकिन रेस्टोरेंट वाली कड़ाही चिकन में तेल की मात्रा ज्यादा हो सकती है, जिससे कुल कैलोरी काफी बढ़ सकती है.
वजन घटाने में कौन बेहतर?
अगर आपका लक्ष्य वजन नियंत्रित करना है, तो सिर्फ तंदूरी या कड़ाही नाम देखकर फैसला न करें. कम तेल वाला तंदूरी चिकन आमतौर पर कम कैलोरी वाला विकल्प हो सकता है. वहीं ज्यादा तेल और गाढ़ी ग्रेवी वाला कड़ाही चिकन कैलोरी में भारी पड़ सकता है. एक और जरूरी बात है चिकन का हिस्सा. स्किनलेस चिकन ब्रेस्ट आमतौर पर चिकन के फैटी हिस्सों की तुलना में कम फैट और ज्यादा प्रोटीन देता है.
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विविधा सिंह हिंदी डिजिटल पत्रकारिता का उभरता हुआ नाम हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में साढ़े चार साल का अनुभव है. वर्तमान में वह News18 हिंदी में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह लाइफस्टाइल वर्टि…
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