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Best Food For Summer Season: आहोर में एक आहार सभी का फेवरेट बना हुआ है, यहां की 125 साल पुरानी राठी रबड़ी लोग बड़े चाव से खाते हैं. गाय के दूध और कम शक्कर से बनी यह सभी के दिलों पर राज कर रही. यह गर्मी में देसी कूलिंग मिठाई है. आसपास के लोग तो इसे खाने आते ही हैं साथ ही वीआईपी भी इसके दीवाने हैं. दाम की बात करें तो यह 450 रुपये किलो है. यह आहोर की पहचान बन गई है.

जालौर. तपती गर्मी में जहां लोग ठंडक की तलाश में इधर-उधर भटकते नजर आते हैं, वहीं जालौर जिले के आहोर में एक ऐसी देसी मिठास लोगों को राहत दे रही है, जो स्वाद के साथ ठंडक का भी अहसास कराती है. हम बात कर रहे हैं आहोर की मशहूर राठी रबड़ी की, जो पिछले करीब 125 सालों से अपनी खास पहचान बनाए हुए है.

राजकीय अस्पताल के सामने स्थित राठी मिष्ठान भंडार पर बनने वाली यह रबड़ी गाय के शुद्ध दूध से तैयार की जाती है. खास बात यह है कि इसमें शक्कर का इस्तेमाल बेहद कम किया जाता है, जिससे इसका स्वाद प्राकृतिक और हल्का रहता है. यही वजह है कि भीषण गर्मी में भी लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं और इसे एक देसी कूलिंग मिठाई के रूप में पसंद कर रहे हैं.

रबड़ी की बढ़ती मांग और खासियत
यहां रोजाना करीब 10 से 12 किलो रबड़ी तैयार की जाती है, लेकिन मांग इतनी ज्यादा रहती है कि कई बार पहले से ऑर्डर देना पड़ता है. शादी-समारोह और खास मौकों पर भी इस रबड़ी की डिमांड लगातार बढ़ रही है. 450 रुपये प्रति किलो की कीमत पर मिलने वाली यह रबड़ी अब सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि आहोर की पहचान बन चुकी है.

इस रबड़ी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आम लोगों के साथ-साथ कई वीआईपी भी इसका स्वाद चख चुके हैं. इनमें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पाली के पूर्व विधायक पुष्पराज जैन और सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा भी शामिल हैं.

परंपरा और स्वाद की विरासत
दुकानदार मुकेश राठी ने लोकल 18 को बताया कि हमारी यह रबड़ी लगभग 125 सालों से बन रही है. हमारे परदादा के समय से यह काम शुरू हुआ था. हम आज भी उसी पारंपरिक तरीके से गाय के शुद्ध दूध से रबड़ी बनाते हैं. इसमें शक्कर बहुत कम डालते हैं ताकि इसका असली स्वाद बना रहे. गर्मी में लोग इसे ठंडक के लिए ज्यादा पसंद करते हैं और दूर-दूर से लोग खास तौर पर इसका स्वाद लेने आते हैं.

ग्राहक भंवरलाल बताते हैं कि वह कई सालों से यहां की रबड़ी खा रहे हैं. उनके अनुसार यह रबड़ी 100 साल से भी ज्यादा पुरानी परंपरा से जुड़ी है और इसका स्वाद बेहद लाजवाब है. उन्होंने कहा कि उन्होंने आबूरोड की रबड़ी भी खाई है, लेकिन आहोर की इस रबड़ी का स्वाद उन्हें ज्यादा पसंद आता है, इसलिए वह यहां बार-बार आते हैं.

राठी परिवार की पीढ़ियां इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं और स्वाद की गुणवत्ता को बनाए हुए हैं. यही वजह है कि आहोर की यह रबड़ी आज जालौर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान बना चुकी है.

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Anand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें



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