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Recipe Of Kalakand: भरतपुर का देसी कलाकंद अपनी शुद्धता, दानेदार बनावट और लाजवाब स्वाद के लिए दूर-दूर तक मशहूर है. ताजे दूध को घंटों तक धीमी आंच पर पकाकर और पारंपरिक तरीके से तैयार की जाने वाली यह मिठाई आज भी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. लगभग 10 से 12 घंटे की मेहनत और धैर्य के बाद तैयार होने वाला कलाकंद हर निवाले में देसी स्वाद और परंपरा की मिठास घोल देता है. त्योहारों, खास अवसरों और मेहमाननवाजी में इसकी अलग ही पहचान है. आधुनिक मिठाइयों के दौर में भी भरतपुर का देसी कलाकंद अपनी अनोखी खुशबू, शुद्धता और बेहतरीन स्वाद के दम पर लोगों के दिलों पर राज कर रहा है.

भरतपुर. यह जिला अपनी समृद्ध संस्कृति और स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए दूर-दूर तक जाना जाता है. यहां की पारंपरिक मिठाइयों में देसी कलाकंद एक खास पहचान रखता है. यह मिठाई न केवल शहर के लोगों की पसंद है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी इसे बड़े चाव से खाया जाता है. खास अवसरों त्योहारों और मेहमाननवाजी में देसी कलाकंद का विशेष स्थान होता है. देसी कलाकंद की सबसे बड़ी खासियत इसकी पारंपरिक बनाने की प्रक्रिया है. जो मेहनत और धैर्य से भरपूर होती है. इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले ताजा और शुद्ध दूध लिया जाता है. दूध की गुणवत्ता जितनी अच्छी होगी कलाकंद का स्वाद भी उतना ही बेहतर होगा. इस दूध को बड़े कढ़ाई में धीमी आंच पर लगातार पकाया जाता है. इस दौरान इसे बार-बार चलाना बेहद जरूरी होता है. ताकि दूध नीचे लगकर जले ना. इसके बाद धीरे-धीरे दूध गाढ़ा होकर मावा जैसा बनने लगता है. इसी समय इसमें आवश्यकतानुसार चीनी मिलाई जाती है.

सही तरीके से जमने में 12 घंटे का लगता है समय

चीनी मिलाने के बाद मिश्रण को लगातार चलाया जाता है, जिससे इसमें एक खास दानेदार बनावट तैयार होती है. यही दानेदारपन देसी कलाकंद की असली पहचान माना जाता है. जब मिश्रण पूरी तरह से तैयार हो जाता है, तब इसे एक थाली या ट्रे में निकालकर फैलाया जाता है. इसके बाद इसे ठंडा होने और जमने के लिए छोड़ दिया जाता है. सही तरीके से जमने में लगभग 10 से 12 घंटे का समय लग सकता है. जमने के बाद इसे मनचाहे आकार में काटकर परोसा जाता है. ऊपर से पिस्ता या बादाम की कतरन डालकर इसका स्वाद और भी बढ़ाया जाता है. भरतपुर का देसी कलाकंद बाजारों में भी आसानी से मिल जाता है. लेकिन घर पर बनने वाला कलाकंद स्वाद और शुद्धता के मामले में अलग ही पहचान रखता है. स्थानीय हलवाई भी इसे पारंपरिक तरीके से तैयार करते हैं. जिसमें किसी तरह के आधुनिक शॉर्टकट का इस्तेमाल नहीं किया जाता. आज के समय में जब बाजार में तरह-तरह की आधुनिक मिठाइयां उपलब्ध हैं. तब भी देसी कलाकंद का स्वाद लोगों के दिलों में खास जगह बनाए हुए है. इसकी शुद्धता और मेहनत से तैयार होने वाली प्रक्रिया इसे अन्य मिठाइयों से अलग बनाती है. भरतपुर का देसी कलाकंद सिर्फ एक मिठाई नहीं बल्कि यहां की परंपरा मेहनत और स्वाद का प्रतीक है जो हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



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