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Bhojpur Sonali Chicken: भोजपुर में देशी मुर्गा 500 से 700 रुपये किलो में मिलता है. ऐसे में लोग सस्ते रंगीन मुर्गे जैसे सोनाली, डबल एफजी, आरआईआर को पसंद कर रहे हैं. कम लागत में मांस और अंडे से अच्छी कमाई कर रहे हैं. आइये जानते हैं इसकी कीमत के बारे में.
भोजपुर: देशी मुर्गे की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की पहुंच से इसे धीरे-धीरे दूर कर दिया है. कई जगहों पर देशी मुर्गा 500 से 700 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है. ऐसे में पोल्ट्री क्षेत्र में रंगीन मुर्गियों की नस्लें तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं. इन नस्लों को इस तरह विकसित किया गया है कि इसका स्वाद, मांस की बनावट और दिखावट काफी हद तक देशी मुर्गे जैसी हो, लेकिन इन्हें तैयार करने में कम समय और कम लागत लगती है. आइये जानते हैं इसके बारे में.
भोजपुर के मुर्गी पालक अभिषेक बताते हैं कि रंगीन मुर्गियां सामान्य बॉयलर की तुलना में अधिक मजबूत होती हैं और खुले वातावरण में भी आसानी से पाली जा सकती हैं. इनके मांस में देशी मुर्गे जैसी कसावट होती है, जिसके कारण बाजार में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है. होटल, ढाबे और घरेलू उपभोक्ता भी अब इन मुर्गियों को पसंद करने लगे हैं.
जानें सोनाली मुर्गे की खासियत
बता दें कि इन रंगीन मुर्गियों में सोनाली नस्ल सबसे अधिक लोकप्रिय मानी जाती है. यह पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड समेत कई राज्यों में बड़े पैमाने पर पाली जा रही है. सोनाली मुर्गे का रंग-रूप और स्वाद देशी मुर्गे से काफी मिलता-जुलता है. इसलिए ग्राहक इसे आसानी से स्वीकार करते हैं. इसकी बाजार कीमत भी देशी मुर्गे की तुलना में काफी कम होती है.
जानें इसके मांस की कीमत
मांस उत्पादन के लिए डबल एफजी नस्ल को किसानों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है. यह नस्ल तेजी से वजन बढ़ाती है और लगभग 8 से 10 सप्ताह में बिक्री के लिए तैयार हो जाती है. इसकी वृद्धि दर बॉयलर के समान होती है, लेकिन स्वाद और गुणवत्ता रंगीन मुर्गे जैसी रहती है. यही कारण है कि बाजार में इसकी अच्छी मांग बनी रहती है. वर्तमान में इसका मांस लगभग 140 से 150 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है.
इसके अलावा ट्रिपल एफजी और फोर एफजी नस्लें भी मांस उत्पादन के लिए बेहतर मानी जाती है. इन नस्लों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत अधिक होती है और ग्रामीण क्षेत्रों में इन्हें खुले या अर्ध-खुले सिस्टम में आसानी से पाला जा सकता है. कम निवेश में अच्छा उत्पादन मिलने के कारण छोटे और मध्यम किसान भी इन नस्लों की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
सालाना देती हैं 300 अंडे
यदि कोई किसान अंडा उत्पादन करना चाहता है तो आरआईआर नस्ल सबसे बेहतर विकल्पों में से एक मानी जाती है. यह मुर्गी सालाना लगभग 250 से 300 अंडे देने की क्षमता रखती है. इसके अंडों का आकार अच्छा होता है और बाजार में इनकी मांग भी बनी रहती है. अंडा उत्पादन के साथ-साथ इसके नर चूजों का उपयोग मांस उत्पादन में भी किया जा सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि रंगीन मुर्गी पालन ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए कम लागत वाला लाभकारी व्यवसाय बन सकता है। कम दाना खर्च, बेहतर बाजार मूल्य, देशी स्वाद और तेजी से बढ़ती मांग के कारण आने वाले वर्षों में रंगीन मुर्गियों की हिस्सेदारी पोल्ट्री क्षेत्र में और बढ़ने की संभावना है। यही वजह है कि देशी मुर्गे का स्वाद पसंद करने वाले उपभोक्ताओं और अतिरिक्त आय की तलाश कर रहे किसानों के लिए रंगीन मुर्गियां एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभर रही हैं.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें