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Rajju Chaat Corner Shahjahanpur: शाहजहांपुर के कैंट इलाके में अगर सुबह-सुबह लोगों की भारी भीड़ किसी ठेले पर नजर आए, तो समझ जाइए कि ‘रज्जू चाट कॉर्नर’ सज चुका है. पिछले 70 सालों से स्वाद की विरासत संभाल रही यह दुकान महज एक चाट का ठेला नहीं, बल्कि शहर की पहचान बन चुकी है. आलम यह है कि सुबह 9 बजे दुकान खुलती है और जायके के शौकीन इस कदर टूट पड़ते हैं कि दोपहर होने से पहले ही सारा सामान खत्म हो जाता है. शुद्ध मसाले, दादा रज्जू के हाथों का पुराना हुनर और वही पारंपरिक चटपटा स्वाद लिए जानिए क्यों आज भी नई पीढ़ी इस मटर-पपड़ी की दीवानी है.
शाहजहांपुर के कैंट इलाके में रज्जू चाट कॉर्नर सिर्फ एक ठेला नहीं, बल्कि स्वाद का बादशाह है. पिछले 70 वर्षों से यह दुकान अपनी शुद्धता और चटपटे स्वाद के दम पर लोगों के दिलों पर राज कर रही है. समय बदला, पीढ़ियां बदलीं, लेकिन रज्जू के हाथों का वह जादू आज भी बरकरार है. यही वजह है कि आज की नई पीढ़ी भी उसी चाव से यहां मटर-पपड़ी खाने पहुंचती है.
इस मशहूर चाट के पीछे की कहानी संघर्ष और परंपरा की है. ऋषभ बताते हैं कि इसकी शुरुआत उनके दादा रज्जू ने की थी. लगभग 19 साल पहले उनके निधन के बाद, परिवार ने इस विरासत को रुकने नहीं दिया. अब ऋषभ के पिता छोटे कश्यप, उनके फूफा अजय और खुद ऋषभ मिलकर इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं, ताकि दादा का नाम और स्वाद हमेशा बना रहे.
शाहजहांपुर में चाट की दुकानों की कोई कमी नहीं है, लेकिन जो बात रज्जू के ठेले में है, वह कहीं और नहीं मिलती. यहां आने वाले ग्राहक बताते हैं कि वर्षों से यहां आ रहे हैं और स्वाद में कभी कोई बदलाव नहीं आया है. चाहे बच्चे हों या बुजुर्ग, रज्जू की मटर-पपड़ी का चस्का हर किसी की जुबान पर चढ़ा हुआ है. यह स्थान अब एक लैंडमार्क बन चुका है.
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अगर आप शाहजहांपुर की यात्रा पर हैं या यहां के निवासी हैं और आपने रज्जू की चाट नहीं खाई, तो आप बहुत कुछ मिस कर रहे हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस चाट को खाए बिना शाहजहांपुर का भ्रमण अधूरा है. तो अगली बार जब आप कैंट की तरफ से गुजरें, तो रज्जू के ठेले पर रुककर इस ऐतिहासिक जायके का आनंद जरूर लें.
अक्सर दुकानों पर शाम तक भीड़ रहती है, लेकिन रज्जू चाट कॉर्नर की कहानी कुछ अलग है. यहां का स्वाद इतना लाजवाब है कि दुकान खुलने के कुछ ही घंटों के भीतर सारी चाट बिक जाती है. भारी मांग की वजह से ऋषभ और उनका परिवार दोपहर होने से पहले ही घर लौट जाते हैं. जो लोग थोड़ी भी देर करते हैं, उन्हें अगले दिन तक का इंतजार करना पड़ता है.
महंगाई के इस दौर में भी रज्जू चाट कॉर्नर ने अपनी क्वालिटी से कभी समझौता नहीं किया. ऋषभ का कहना है कि उनके पिता और दादा ने हमेशा सिखाया कि ग्राहक का भरोसा सबसे कीमती है. वो आज भी वही पुरानी विधि अपनाते हैं जिससे मटर को सही तापमान पर पकाया जाता है और पपड़ी को खास तौर पर कुरकुरा रखा जाता है. यही कारण है कि इनका स्वाद बेजोड़ है.
ऋषभ ने बताया कि उनकी सफलता का सबसे बड़ा राज उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मसाले हैं. चाट तैयार करने के लिए बाजार के साधारण मसालों के बजाय उच्च गुणवत्ता वाले खास मसालों का चुनाव करते हैं. इन मसालों का मिश्रण बेहद अनोखे तरीके से तैयार किया जाता है, जो मटर और पपड़ी के स्वाद को कई गुना बढ़ा देता है. यही खासियत उन्हें दूसरों से अलग बनाती है.
रज्जू चाट कॉर्नर की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुबह 9 बजे ठेला लगते ही ग्राहकों का तांता लग जाता है. कैंट इलाके में सुबह-सुबह ही चटपटी चाट के शौकीन जुटने लगते हैं. लोग बेसब्री से उस पल का इंतजार करते हैं जब ताजी मटर और कुरकुरी पपड़ी का मेल उनके ढोने में सजे और वे दिन की शुरुआत एक बेहतरीन स्वाद से करें.