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Rajasthani Khoba Roti Food Recipe : भीलवाड़ा में पारंपरिक राजस्थानी खोबा रोटी फिर चर्चा में, गेहूं और घी से बनी यह मोटी रोटी खास डिजाइन के साथ बनती है, स्वादिष्ट होने के साथ 7 दिन तक सुरक्षित रहती है. तम्मना कंवर शेखावत बताती हैं कि खोबा रोटी बनाने में ज्यादा सामग्री या विशेष मेहनत की जरूरत नहीं होती. सबसे पहले गेहूं के आटे में थोड़ा घी और स्वादानुसार नमक मिलाकर सख्त आटा गूंथा जाता है. इसके बाद मोटी रोटी बनाकर उस पर उंगलियों की सहायता से गड्ढेनुमा डिजाइन तैयार की जाती है.

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भीलवाड़ा. गर्मियों की छुट्टियों में परिवार और दोस्तों के साथ पिकनिक या घूमने जाने का प्लान बनते ही खाने-पीने की चिंता भी शुरू हो जाती है. सफर के दौरान ऐसा भोजन चाहिए होता है जो स्वादिष्ट होने के साथ लंबे समय तक खराब भी न हो. ऐसे में पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन खोबा रोटी एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है. अपने खास स्वाद, पौष्टिकता और कई दिनों तक ताजा रहने की खूबी के कारण यह रोटी आज भी लोगों की पसंद बनी हुई है.

वर्षों से बनाई जा रही खोबा रोटी साधारण रोटी से काफी अलग होती है. इसे गेहूं के आटे, घी और हल्के मसालों की मदद से तैयार किया जाता है. रोटी को मोटा बेलने के बाद उस पर हाथों की उंगलियों से विशेष प्रकार के निशान बनाए जाते हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में “खोबा” कहा जाता है. यही निशान इसकी सबसे बड़ी पहचान हैं और इन्हीं की वजह से इसका नाम खोबा रोटी पड़ा. ग्रामीण इलाकों में आज भी यह रोटी पारंपरिक तरीके से बनाई जाती है और विशेष अवसरों पर इसे बड़े चाव से खाया जाता है.

ऐसे तैयार की जाती है खोबा रोटी

तम्मना कंवर शेखावत बताती हैं कि खोबा रोटी बनाने में ज्यादा सामग्री या विशेष मेहनत की जरूरत नहीं होती. सबसे पहले गेहूं के आटे में थोड़ा घी और स्वादानुसार नमक मिलाकर सख्त आटा गूंथा जाता है. इसके बाद मोटी रोटी बनाकर उस पर उंगलियों की सहायता से गड्ढेनुमा डिजाइन तैयार की जाती है. फिर इसे धीमी आंच पर तवे या कंडों की गर्मी में अच्छी तरह सेंका जाता है. धीमी आंच पर पकने के कारण यह अंदर तक पूरी तरह तैयार हो जाती है और इसका स्वाद भी काफी बढ़ जाता है. खोबा रोटी को दही, लहसुन की चटनी, आम के अचार या सूखी सब्जी के साथ खाया जा सकता है. घी के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. यह पेट भरने वाली होने के साथ पौष्टिक भी होती है, इसलिए बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इसे पसंद करते हैं.

7 दिन तक रहती है सुरक्षित

खोबा रोटी की सबसे बड़ी विशेषता इसका लंबे समय तक सुरक्षित रहना है. सामान्य रोटियां एक-दो दिन में खराब होने लगती हैं, लेकिन खोबा रोटी को सही तरीके से रखा जाए तो यह करीब सात दिन तक ताजा बनी रह सकती है. यही वजह है कि पुराने समय में लोग लंबी यात्राओं, मेलों और धार्मिक यात्राओं पर जाते समय इसे अपने साथ लेकर जाते थे. आज भी कई परिवार पिकनिक, ट्रेन यात्रा और सड़क मार्ग से लंबी दूरी की यात्रा के दौरान खोबा रोटी को प्राथमिकता देते हैं. गर्मी के मौसम में जब भोजन जल्दी खराब होने का खतरा रहता है, तब यह पारंपरिक रोटी स्वाद और सुविधा दोनों का बेहतरीन मेल साबित होती है.

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Anand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें



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