जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपने पहले ही इलेक्शन में इतिहास रच दिया है। सोमवार को बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव का परिणाम सामने आया। प्रशांत किशोर ने बीजेपी का गढ़ कही जाने वाली इस सीट पर बड़ी जीत हासिल कर ली है। प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज के खेमे में जश्न का माहौल है। वहीं, ये रिजल्ट भारतीय जनता पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि ये सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से जुड़ी हुई थी। उनके राज्यसभा जाने के बाद बांकीपुर सीट खाली हुई जिस कारण उपचुनाव हुए। भाजपा ने बांकीपुर सीट जीतने के लिए पूरा जोर लगा दिया था लेकिन प्रशांत किशोर की रणनीति भाजपा की स्ट्रेटजी पर भारी पड़ गई है। आइए जानते हैं कि प्रशांत किशोर ने भाजपा के इस किले को कैसे हिला दिया है।
बांकीपुर सीट क्यों थी अहम?
पटना की बांकीपुर सीट बिहार में बीजेपी का गढ़ रही है। इस सीट पर 1995 से बीजेपी का कब्जा रहा है। 1995 से 2005 तक नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर इस सीट लगातार चुनाव जीते। तब ये सीट पटना पश्चिम के नाम से जानी जाती थी। पिता के निधन के बाद साल 2006 में नितिन नवीन ने इस सीट से उपचुनाव जीता था। वहीं, 2010 से नितिन नवीन लगातार बांकीपुर से चुनाव जीतते आ रहे हैं। अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन ने बांकीपुर से इस्तीफा दे दिया था।
बांकीपुर में भाजपा और जनसुराज में थी टक्कर।
कौन-कौन थे उम्मीदवार?
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया था। पार्टी ने नाामंकन खत्म होने से ठीक पहले अपना उम्मीदवार बदल दिया था। वहीं, बिहार में मुख्य विपक्षी दल राजद ने रेखा गुप्ता को उम्मीदवार घोषित किया। रेखा गुप्ता ने साल 2025 में हुए विधानसभा चुनाव में भी बांकीपुर से राजद के टिकट पर चुनाव लड़ा था। वहीं, जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार खुद चुनाव मैदान में उतरे और बांकीपुर से चुनाव लड़ने का ऐलान किया। ऐसे में बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव पर पूरे देश की राजनीति टिकी हुई थी। अब प्रशांत किशोर ने इस सीट से जीत हासिल कर ली है।
प्रशांत किशोर ने भाजपा को पछाड़ा।
बीजेपी के वोट बैंक में जबरदस्त सेंधमारी
भाजपा को पूरा भरोसा था कि वो इस सीट को जीत लेगी। ऐसा इसलिए था कि बांकीपुर में 33 परसेंट सवर्ण वोटर थे। उसमें भी 14% कायस्थ वोटर थे जो कि नितिन नवीन के समाज से हैं। भाजपा के उम्मीदवार नीरज कुमार भी कायस्थ समाज से थे। भाजपा को उम्मीद थी कि ये लोग उसे एकतरफा वोट करेंगे। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। चुनाव परिणाम से साफ पता चलता है कि प्रशांत किशोर ने बीजेपी के वोट बैंक में भी जबरदस्त सेंधमारी कर दी है।
बांकीपुर का जातीय समीकरण
| जाति | प्रतिशत |
| सवर्ण | 33% |
| कायस्थ | 14% |
| गैर-कायस्थ सवर्ण | 19% |
| यादव | 12% |
| वैश्य | 12% |
| दलित | 8% |
| मुस्लिम | 9% |
खुशी में झूमते दिखे प्रशांत किशोर के समर्थक।
खुशी में झूमते दिखे प्रशांत किशोर के समर्थक।
प्रशांत किशोर ने कैसे हिलाया भाजपा का किला?
बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने कैसे बीजेपी को डेंट दिया इस बात पर लगातार चर्चा जारी है। आपको बता दें कि प्रशांत किशोर ब्राह्मण जाति से हैं। बांकीपुर सीट पर 7 परसेंट ब्राह्मण हैं, 7 परसेंट भूमिहार और 5 परसेंट राजपूत हैं। प्रशांत किशोर ने पूरे प्रचार के दौरान खुद को भाजपा का विकल्प बताकर पेश किया। उन्होंने चुनाव में अपर कास्ट और ईबीसी ( 12% से 15% वोट) के वोट में की सेंधमारी की। इसके साथ ही माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर ने आरजेडी के मुस्लिम वोट को भी तोड़ा है जिसका नतीजा चुनाव परिणाम में सामने दिख रहा है। खुद आरजेडी के नेताओं का भी कहना है कि भाजपा और नीतीश कुमार की जदयू का वोट प्रशांत किशोर को ट्रांसफर हुआ है।
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