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Dehradun Best Nonveg Shop: अगर आप नॉनवेज लवर हैं और मछली खाना पसंद करते हैं, तो देहरादून के राजपुर रोड पर ‘काला मच्छी वाला’ बेहद ही लजीज फिश फ्राई बनाते हैं. इसमें न चर्बी होती है और न ही काटें होते हैं. यहां शाम 4 बजते ही इनकी कार्ट शुरू हो जाती है. आइए इस दुकान की खासियत के बारे में जानते हैं.
देहरादून: इन दिनों देहरादून का मौसम खुशनुमा बना हुआ है, जिसके चलते यहां पर्यटक घूमने के लिए पहुंच रहे हैं. अगर आप भी उन लोगों में से हैं तो आपको देहरादून में कई तरह के लजीज पकवान खाने के लिए मिल जाएंगे. अगर आप नॉनवेज लवर हैं और मछली खाना पसंद करते हैं, तो देहरादून के राजपुर रोड पर ‘काला मच्छी वाला’ बेहद ही लजीज फिश फ्राई बनाते हैं. इसमें न चर्बी होती है और न ही काटें होते हैं. यहां शाम 4 बजते ही इनकी कार्ट शुरू हो जाती है.
देहरादून के राजपुर रोड पर काला मच्छीवाला के नाम से ठेला संचालित करने वाले आयुष ने बताया कि उनके पिता पिछले 40 सालों से ठेला लगाकर लोगों के पेट भरने का काम कर रहे हैं. वह पहले राजमा-चावल बनाते थे, फिर लगभग 15 साल पहले उन्होंने नॉनवेज का काम शुरू किया. बचपन से वह पिता को इस काम में लगा हुआ देखते थे. उन्होंने भी इस काम का अपना करियर बना लिया.
छोटे से बिजनेस को बढ़ाना चाहते हैं आगे
उन्होंने कहा कि उन्होंने बीए का कोर्स किया और अपने पिता के बिजनेस को बढ़ाने के लिए आगे बढ़ गए. उन्होंने कहा, ‘मैं दूसरे की गुलामी नहीं करना चाहता हूं, बल्कि पिता का नाम और काम आगे बढ़ाना चाहता हूं. आयुष ने कहा कि यह जायका वह लोगों तक हमेशा पहुंचाना चाहते हैं. मुस्कुराते हुए आयुष बोले, ‘अपना मालिक बनना सबसे बेहतर है’. वाकई जहां एक तरफ बच्चे पढ़-लिखकर नौकरी के लिए भटकते हैं, वहीं आयुष जैसे युवा अपने छोटे से बिजनेस को ही आगे बढ़ाने की सोचते हैं.
मेल्टिंग मोमेंट का एक्सपीरियंस देती फिश फ्राई
आयुष ने कहा कि पहले वह लोग अंडे फ्राई और चिकन फ्राई तैयार किया करते थे. इसके बाद एक बार उनके पिता ने फिश फ्राई बनाकर कस्टमर्स को खिलाया, तब से अब तक शाम होते ही फिश फ्राई के ग्राहकों की यहां भीड़ लग जाती है. उन्होंने कहा कि वह देहरादून के मछली बाजार से खास तरह की मछली लेते हैं, जिसमें न कांटा होता है और न ही चर्बी होती है. यही वजह है कि लोग यहां मछली खाने से नहीं डरते हैं. वह तड़के ही ताजी मछली लेकर आते हैं. इसके बाद खुद का सीक्रेट मसाला तैयार करके उसे मैरीनेट करके कुछ घंटों के लिए छोड़ देते हैं. इसके बाद वह शाम के समय इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर सरसों के तेल में डीप फ्राई करके देते हैं.
उन्होंने बताया कि यह खास होती है, क्योंकि बाहर का कवर क्रिस्पी और अंदर से मुंह में घुलने वाली होती है. इसका स्वाद बढ़ाने का काम करती इनकी तीखी हरी चटनी. प्याज और चटनी के साथ परोसी जाने वाली फिश फ्राई हर कोई बड़े शौक से खाता है. देहरादून के रहने वाले सोनू ने बताया कि वह कई सालों से इनकी फिश फ्राई खा रहे हैं. उन्होंने और अन्य जगहों पर भी ट्राई किया, पर यहां जैसा जायका उन्हें कहीं भी नहीं मिला.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.