बिहार की बांकीपुर सीट, मध्य प्रदेश की दतिया सीट और गुजरात के मांजलपुर सीट पर हो रहे उपचुनाव के लिए 30 जुलाई यानी कल मतदान होगा और तीन अगस्त को नतीजे आएंगे। दतिया में जहां भाजपा  के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह के बीच कांटे की टक्कर है, वहीं बांकीपुर सीट पर भाजपा ने नीरज कुमार सिन्हा को टिकट दिया है, तो वहीं जनसुराज के प्रशांत किशोर भाजपा प्रत्याशी को कड़ी टक्कर देंगे। इस सीट पर राजद ने रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाया है। मांजलपुर सीट पर भाजपा ने सतीश पटेल को चुनावी मैदान में उतारा है, कांग्रेस ने भीखाभाई रबारी को टिकट दिया है।

भाजपा के लिए बांकीपुर सीट जीतना क्यों है जरूरी

बिहार का बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव भाजपा के लिए जीतना जरूरी है, क्योंकि इस सीट से भाजपा नेता नितिन नबीन चुनाव जीतते आ रहे हैं। उनके भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, इस वजह से इस सीट पर उपचुनाव हो रहा है। बीजेपी का गढ़ रही इस सीट पर हो रहे उपचुनाव में जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की एंट्री ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। प्रशांत किशोर इस सीट से अपनी चुनावी राजनीति की शुरुआत कर रहे हैं।

पहले भाजपा ने इस सीट पर नितिन नबीन के क़रीबी अभिषेक कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया था, उन्होंने नामांकन भी कर दिया था लेकिन 10 जुलाई को अभिषेक कुमार ने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए अचानक अपना नाम वापस ले लिया था।

दतिया सीट पर है कांटे की टक्कर

 

मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर हो रहे उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है। दिल्ली की एक अदालत ने धोखाधड़ी के एक मामले में कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई थी। इसी वजह से दतिया सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं। इस सीट से कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को हराया था। 

इस सीट पर हो रहे उपचुनाव में मुख्य मुकाबला बीजेपी के प्रत्याशी आशुतोष तिवारी और कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह के बीच है। बता दें कि कांग्रेस के घनश्याम सिंह स्थानीय पूर्व शाही परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जबकि आशुतोष तिवारी की उम्मीदवारी को लेकर शुरुआत में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों में नाराजगी की खबरें आई थीं। ऐसे में सवाल है कि क्या इस बार भी क्षेत्र की जनता रिकॉर्ड मतदान कर अपना पिछला फैसला पलटेगी या रिकॉर्ड मतदान का लाभ भाजपा को नहीं, कांग्रेस को मिलेगा। तीन अगस्त को मतगणना के बाद इन सारे सवालों का जवाब मिल जाएगा। 

कांग्रेस या भाजपा, कौन जीतेगा मांजलपुर सीट?

भाजपा विधायक योगेश पटेल के निधन के बाद मंजलपुर सीट खाली हो गई थी, जिसकी वजह से इस सीट पर उपचुनाव हो रहा है। 79 वर्षीय पटेल का हाल ही में निधन हुआ था। मांजलपुर में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी। भाजपा ने इस सीट से  सतीश पटेल को उम्मीदवार बनाया है, तो वहीं कांग्रेस ने गुजरात कांग्रेस के उपाध्यक्ष और पूर्व राज्य मंत्री भीखाभाई रबारी को चुनाव मैदान में उतारा है। अब जीत या हार का फैसला तीन अगस्त को होगा। तीनों सीटों पर हो रहे उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने पूरा दम खम लगा दिया है। 

 

 





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