Natural Mango Ripening: गर्मी का मौसम आते ही लोगों को जिस फल का सबसे ज्यादा इंतजार रहता है, वह है आम. फलों का राजा कहलाने वाला आम स्वाद, खुशबू और मिठास के लिए पूरी दुनिया में पसंद किया जाता है, लेकिन आजकल बाजार में मिलने वाले कई आमों को जल्दी पकाने के लिए अलग-अलग तरह के केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे उनका स्वाद तो प्रभावित होता ही है, सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है. दूसरी तरफ कई लोग अपने बगीचे या खेत से समय से पहले आम तोड़ लेते हैं, जिसके कारण फल ठीक तरह से पक नहीं पाता और सड़ने लगता है.
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आम को सही समय पर कैसे तोड़ा जाए और बिना किसी केमिकल के उसे प्राकृतिक तरीके से कैसे पकाया जाए, अगर आप भी इस बार शुद्ध, मीठे और पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से पके हुए पीले आम खाना चाहते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद काम की साबित हो सकती है.
आम तोड़ने से पहले सही साइज जानना जरूरी
कई बार लोग आम का आकार पूरी तरह विकसित होने से पहले ही उसे पेड़ से तोड़ लेते हैं. यही सबसे बड़ी गलती साबित होती है. फल अगर पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है तो वह बाद में भी अच्छी तरह नहीं पकता.
विशेषज्ञों के मुताबिक हर किस्म के आम का एक तय आकार और वजन होता है, जिसके बाद ही उसकी तुड़ाई करनी चाहिए. उदाहरण के तौर पर दशहरी आम का आकार करीब 4 इंच हो जाए तो वह तोड़ने के लिए तैयार माना जाता है. वहीं लंगड़ा आम भी लगभग 4 इंच का होना चाहिए या उसका वजन करीब 200 ग्राम होना चाहिए. चौसा आम की बात करें तो उसका वजन 150 से 250 ग्राम के बीच पहुंचने पर उसकी तुड़ाई की जा सकती है.
जून का महीना क्यों माना जाता है सबसे बेहतर?
आम की तुड़ाई के लिए जून का महीना सबसे अच्छा माना जाता है. इस समय तक अधिकांश फल पेड़ पर पूरी तरह तैयार हो चुके होते हैं और उनमें प्राकृतिक मिठास भी विकसित हो जाती है. अगर मानसून की शुरुआत हो चुकी हो और एक अच्छी बारिश हो जाए तो उसके बाद तुड़ाई करना और भी बेहतर माना जाता है. बारिश के बाद फल का स्वाद और मिठास दोनों बढ़ जाते हैं. हालांकि अगर बारिश न भी हो, तब भी जून में आम की तुड़ाई करना सही रहता है क्योंकि इस समय तक फल पकने की अवस्था में पहुंच चुका होता है.
तुड़ाई के दौरान इन बातों का रखें खास ध्यान
आम तोड़ते समय थोड़ी सी लापरवाही पूरे फल को खराब कर सकती है. इसलिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. सबसे पहले इस बात का ध्यान रखें कि फल सीधे जमीन पर न गिरे. जमीन पर गिरने से आम में अंदरूनी चोट लग सकती है, जो बाद में सड़न की वजह बनती है. पेड़ के नीचे प्लास्टिक शीट, बोरा या कोई मुलायम चीज बिछा देना बेहतर रहता है. इससे फल सुरक्षित रहता है. इसके अलावा आम को हमेशा डंठल सहित तोड़ना चाहिए. डंठल टूट जाने पर निकलने वाला रस फल की सतह पर फैल जाता है, जिससे काले धब्बे पड़ सकते हैं और सड़न शुरू हो सकती है.
केमिकल से पकाए गए आम क्यों हो सकते हैं नुकसानदायक?
बाजार में कई जगह आम को जल्दी पीला दिखाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड जैसे खतरनाक पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे आम देखने में आकर्षक लग सकते हैं, लेकिन उनका स्वाद प्राकृतिक नहीं होता. इसके अलावा ऐसे फलों के सेवन से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं. यही वजह है कि विशेषज्ञ हमेशा प्राकृतिक तरीके से पके आम खाने की सलाह देते हैं.
बिना केमिकल के आम पकाने का आसान घरेलू तरीका
अगर आप घर पर प्राकृतिक तरीके से आम पकाना चाहते हैं तो इसके लिए किसी महंगे सामान की जरूरत नहीं है. सबसे आसान तरीका है कि आमों को पुआल, सूखे भूसे या गेहूं के पैरे के बीच रख दिया जाए. इससे फल को प्राकृतिक गर्मी मिलती है और वह धीरे-धीरे समान रूप से पकता है. अगर भूसा उपलब्ध नहीं है तो गत्ते का डिब्बा भी इस्तेमाल किया जा सकता है. डिब्बे के अंदर अखबार बिछाकर आमों को डंठल वाली तरफ नीचे रख दें. इसके बाद ऊपर से भी अखबार ढककर डिब्बा बंद कर दें. यह प्रक्रिया आम को धीरे-धीरे प्राकृतिक रूप से पकने में मदद करती है और फल का स्वाद भी बरकरार रहता है.
हर दो से तीन दिन में करें जांच
आमों को बंद करके कई दिनों तक छोड़ देना सही नहीं है. हर दो से तीन दिन के अंतराल पर डिब्बा या भूसा खोलकर फल की स्थिति जरूर देखें. जो आम पीले हो जाएं और उनमें प्राकृतिक खुशबू आने लगे, उन्हें अलग निकाल लें. बाकी आमों को दोबारा ढककर रख दें. इस तरह सभी फल धीरे-धीरे सही तरीके से पक जाएंगे.
प्राकृतिक तरीके से पके आम की खासियत
प्राकृतिक रूप से पके आम का स्वाद ज्यादा मीठा और सुगंधित होता है. ऐसे आम अंदर से पूरी तरह पके होते हैं और उनमें सड़न की संभावना भी कम रहती है. सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें किसी तरह के हानिकारक केमिकल का असर नहीं होता, जिससे परिवार के सभी सदस्य बेफिक्र होकर उनका आनंद ले सकते हैं.