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उसिना चार तरह की दालों से बनने वाला पौष्टिक बघेली व्यंजन है, जिसे बिना तेल के भाप में पकाया जाता है। मूंग, उड़द, मसूर और चना दाल से तैयार यह डिश हल्की, हेल्दी और स्वादिष्ट होती है. पारंपरिक चूल्हे पर सूखी घास के ऊपर टिक्कियां बनाकर पकाई जाती है, जिससे इसका देसी स्वाद और खास बन जाता है.

मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में आज भी पारंपरिक स्वाद और देसी रसोई का खास महत्व है. बघेलखंड का मशहूर व्यंजन उसिना यहां की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है. चार प्रकार के दालों से बनने वाली यह डिश स्वाद के साथ सेहत का भी खजाना है. मूंग, उड़द, मसूर और चना दाल से तैयार उसिना बिना तेल के भाप में पकाया जाता है, जिससे यह हल्का और पौष्टिक रहता है. ग्रामीण इलाकों में इसे बड़े चाव से खाया जाता है.अब इसकी लोकप्रियता धीरे-धीरे अन्य जगहों तक भी पहुंच रही है.

स्थानीय रसोइया प्रियंका सिंह ने लोकल 18 से कहा कि उसिना बनाने की प्रक्रिया भी बेहद खास और पारंपरिक है. सबसे पहले सभी दालों को एक दिन पहले भिगोया जाता है. फिर इन्हें पीसकर गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जाता है. इस पेस्ट में डोडा, काली मिर्च, नमक, हींग और चैली पत्ता जैसे देसी मसाले मिलाए जाते हैं, जो इसके स्वाद को और भी खास बना देते हैं.

भाप में पकाया जाता है ये पारंपरिक डिश
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी उसिना पारंपरिक चूल्हे पर बनाया जाता है. एक बड़े भगोने में पानी उबालने के बाद उसके ऊपर सूखी घास बिछाई जाती है.महिलाएं दाल के पेस्ट से छोटी-छोटी टिक्कियां बनाकर घास पर सजा देती हैं. इन्हें 10 से 12 मिनट तक भाप में पकाया जाता है. पकने के बाद ये मुलायम और स्वादिष्ट तैयार हो जाती हैं.हालांकि उसिना को बिना तले ही खाया जाता है, लेकिन कुछ लोग इसे हल्का तलकर कुरकुरा बनाना भी पसंद करते हैं. इसे टमाटर या दही की चटनी के साथ परोसा जाता है, जिससे इसका स्वाद और बढ़ जाता है. समय के साथ इसमें विविधता भी आई है. अब लोग इससे कढ़ी और सब्जी बनाकर भी मुख्य भोजन के रूप में इस्तेमाल करने लगे हैं.

शरीर के लिए फायदेमंद
बघेलखंड के घरों में यह व्यंजन एक-दो महीने के अंतराल में जरूर बनाया जाता है, जिससे पारंपरिक स्वाद और संस्कृति दोनों का जुड़ाव बना रहता है. कई दालों से बनने के कारण यह प्रोटीन से भरपूर होता है. शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है.धीरे-धीरे उसिना की लोकप्रियता बघेलखंड से निकलकर देश के अन्य हिस्सों तक पहुंच रही है। पारंपरिक, स्वादिष्ट और पौष्टिक होने के कारण यह व्यंजन लोगों के बीच अपनी खास पहचान बना रहा है। अगर आप भी देसी और हेल्दी खाने के शौकीन हैं, तो बघेली उसिना आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है, जिसमें स्वाद के साथ संस्कृति की भी खुशबू मिलती है.



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