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Chhattisgarh Food: बरसात में मिलने वाली जंगली सब्जी इन दिनों बालोद में 150 रुपये प्रति पाव बिक रहा है, जो 15 दिन पहले 250 रुपये प्रति पाव थी. धमतरी से इसे लाकर बेच रहीं नूरजहां ने बताया कि सरई पेड़ों के नीचे मिलने वाली इस सब्जी का स्वाद मटन जैसा होता है. जानें और खासियत…

Chhattisgarh Food: छत्तीसगढ़ में बरसात का मौसम आते ही जंगलों की कई दुर्लभ वन उपज बाजारों में दिखाई देने लगती है. इनमें सबसे खास माना जाता है सरई बोड़ा, जिसकी मांग हर साल काफी बढ़ जाती है. स्वाद और सीमित उपलब्धता के कारण इसकी कीमत कई बार चिकन और मटन से भी अधिक हो जाती है. बालोद शहर में इन दिनों सड़क किनारे सरई बोड़ा बेच रहीं नूरजहां बताती हैं कि लोग इसके स्वाद के दीवाने हैं और इसे ‘जंगल का मटन’ भी कहा जाता है.

नूरजहां ने बताया कि वे पूरे साल मौसम के अनुसार अलग-अलग सब्जियों का कारोबार करती हैं. इस बार बरसात शुरू होते ही उन्होंने धमतरी से सरई बोड़ा लाकर बालोद में बेचना शुरू किया है. उनके अनुसार सरई बोड़ा छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में सरई के पेड़ों के नीचे प्राकृतिक रूप से उगता है. यह साल में केवल एक बार, बरसात के मौसम में ही मिलता है. यही वजह है कि इसकी उपलब्धता बेहद सीमित रहती है और कीमत काफी ऊंची होती है.

कीमत 600 से हजार रुपये किलो तक
उन्होंने बताया कि फिलहाल बालोद में सरई बोड़ा 150 रुपये प्रति पाव बिक रहा है, जबकि करीब 15 दिन पहले इसकी कीमत 250 रुपये प्रति पाव तक पहुंच गई थी, यानी एक किलो की कीमत 600 से 1000 रुपये तक बैठती है. यही कारण है कि कई बार यह बाजार में मिलने वाले चिकन और मटन से भी महंगा साबित होता है. इसके बावजूद लोग स्वाद के कारण इसे खरीदने से पीछे नहीं हटते.

बरसता का करते इंतजार
नूरजहां के अनुसार, सरई बोड़ा का सबसे बड़ा आकर्षण उसका स्वाद है. उन्होंने कहा कि इसकी सब्जी खाने पर स्वाद काफी हद तक मटन जैसा महसूस होता है. यही वजह है कि छत्तीसगढ़ के लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं और कई लोग इसे ‘शाकाहारी मटन’ भी कहते हैं. बरसात का इंतजार करने वाले लोग खास तौर पर इसके बाजार में आने का इंतजार करते हैं.

जानें पारंपरिक रेसिपी
उन्होंने इसकी पारंपरिक रेसिपी भी बताई. नूरजहां कहती हैं कि सबसे पहले सरई बोड़ा को अच्छी तरह साफ पानी से धोया जाता है. इसके बाद इसे तेल में हल्का फ्राई करके अलग निकाल लिया जाता है. फिर प्याज, लहसुन, अदरक और अन्य मसालों के साथ इसे पकाया जाता है. उनका कहना है कि इसकी रसेदार सब्जी की बजाय सूखी और लपेटेदार सब्जी ज्यादा स्वादिष्ट लगती है, जिससे इसका मटन जैसा स्वाद और भी बेहतर महसूस होता है.

बस्तर में सबसे ज्यादा डिमांड
नूरजहां ने बताया, छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में सरई बोड़ा की सबसे अधिक मांग रहती है. हालांकि, अब बालोद सहित अन्य जिलों के लोग भी इसे खूब पसंद करने लगे हैं. सीमित समय के लिए मिलने वाली यह वन उपज अपने अनोखे स्वाद, ऊंची कीमत और खास पहचान के कारण हर बरसात में लोगों की पहली पसंद बन जाती है. यही वजह है कि बाजार में सरई बोड़ा आते ही इसकी खरीदारी शुरू हो जाती है और लोग इसे स्वाद का अनोखा अनुभव मानकर अपने घर जरूर ले जाते हैं.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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