Highlights
- रूस और चीन ने ईरान पर UN प्रतिबंधों की निगरानी बढ़ाने वाला अमेरिकी प्रस्ताव रोका।
- अमेरिका ने कहा, वीटो से ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों की निगरानी कमजोर होगी।
- ईरान के पास 440.9 किलो 60 फीसदी तक समृद्ध यूरेनियम होने का दावा है।
संयुक्त राष्ट्र: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका और रूस-चीन के बीच टकराव एक बार फिर सामने आया है। रूस और चीन ने गुरुवार को अमेरिका के उस प्रस्ताव पर वीटो कर दिया, जिसमें ईरान पर लगाए गए संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों की निगरानी करने वाले विशेषज्ञों के पैनल का कार्यकाल एक साल और बढ़ाने की बात कही गई थी। प्रस्ताव के पक्ष में 11 देशों ने वोट दिया, जबकि रूस और चीन ने इसका विरोध किया। सोमालिया और पाकिस्तान ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। रूस और चीन के वीटो के कारण प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
ईरान पर कौन-कौन से प्रतिबंध लागू हैं?
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध अभी लागू हैं। इनके तहत विदेशों में मौजूद ईरान की संपत्तियों को फ्रीज किया जा सकता है, ईरान के साथ हथियारों की खरीद-बिक्री पर रोक है और उसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ी गतिविधियों पर भी पाबंदियां हैं। इन प्रतिबंधों को 2025 में फिर से लागू किया गया था। 2015 के ईरान परमाणु समझौते में शामिल फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने उस समझौते के तहत मौजूद ‘स्नैपबैक’ व्यवस्था का इस्तेमाल किया। इसके बाद 27 सितंबर 2025 को ईरान पर संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रतिबंध दोबारा लागू हो गए और प्रतिबंधों की निगरानी के लिए समिति को फिर से सक्रिय किया गया। UN रिकॉर्ड के मुताबिक, इसके साथ विशेषज्ञों के पैनल की व्यवस्था भी बहाल हुई थी।
अमेरिका ने क्या प्रस्ताव रखा था?
अमेरिका ने विशेषज्ञों के पैनल का कार्यकाल एक साल और बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि ईरान पर लगे प्रतिबंधों को लागू किया जा रहा है या नहीं, इसकी निगरानी जारी रहे। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब अमेरिका ईरान को उसके बचे हुए आर्थिक साझेदारों से अलग-थलग करने की कोशिश भी कर रहा है। ईरान में 6 महीने से ज्यादा समय से चल रहा युद्ध फिलहाल गतिरोध में फंसा हुआ है। अमेरिका का कहना है कि स्वतंत्र विशेषज्ञ प्रतिबंधों के उल्लंघन और ईरान के साथ प्रतिबंधित सहयोग पर नजर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अमेरिका बोला, ‘वीटो से निगरानी कमजोर होगी’
अमेरिका की उप राजदूत जेनिफर लोसेटा ने कहा कि रूस और चीन के वीटो से अमेरिका को हैरानी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि UN के विशेषज्ञ ईरान और उसके सहयोगियों के बीच हो रहे प्रतिबंधित सहयोग पर नजर रख सकते थे। लोसेटा के मुताबिक, वीटो का मकसद प्रतिबंधों की निगरानी और विशेषज्ञों की नियुक्ति को रोकना है। उन्होंने कहा कि इससे उन गतिविधियों की जानकारी सामने नहीं आ पाएगी, जिनमें प्रतिबंधों का उल्लंघन हो रहा है। लोसेटा ने चेतावनी दी कि विशेषज्ञों के बिना सुरक्षा परिषद को प्रतिबंधों के उल्लंघन की निष्पक्ष जानकारी नहीं मिल सकेगी। इसका फायदा ईरान और प्रतिबंधों से बचने वालों को हो सकता है।
रूस ने कहा, ‘प्रतिबंधों की वापसी ही गैरकानूनी थी’
रूस के संयुक्त राष्ट्र राजदूत वासिली नेबेंजिया ने कहा कि ईरान पर ‘स्नैपबैक’ के जरिए प्रतिबंध दोबारा लागू करना ही गैरकानूनी था। इसलिए विशेषज्ञों के पैनल का कार्यकाल बढ़ाने का अमेरिकी प्रस्ताव भी कानूनी आधार से रहित था। उन्होंने कहा कि रूस और चीन ने अमेरिका और उसके सहयोगियों से इस प्रस्ताव को मतदान के लिए नहीं रखने की अपील की थी। उनका कहना था कि इससे सुरक्षा परिषद में तनाव और बढ़ेगा। नेबेंजिया के मुताबिक, इसके बावजूद अमेरिका ने टकराव का रास्ता चुना।
ईरान ने रूस और चीन को धन्यवाद दिया
ईरान ने रूस और चीन को प्रस्ताव पर वीटो करने के लिए धन्यवाद दिया। ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने सोशल मीडिया पर कहा कि दोनों देशों ने अमेरिका और उसके सहयोगियों की उस कोशिश को रोक दिया, जिसमें सुरक्षा परिषद का इस्तेमाल राजनीतिक मकसद के लिए किया जा रहा था। वहीं, फ्रांस ने ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को जरूरी बताया। संयुक्त राष्ट्र में फ्रांस के राजदूत जेरोम बोनाफों ने कहा कि प्रतिबंधों से ईरान को अपने परमाणु समझौते और दायित्वों का पालन करने के लिए दबाव बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि फ्रांस प्रतिबंधों को लागू रखने के लिए आगे के विकल्पों पर विचार करेगा।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी बढ़ी चिंता
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता इसलिए भी बनी हुई है क्योंकि जून 2025 में इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमलों के बाद संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षक ईरान के पास मौजूद समृद्ध यूरेनियम के भंडार की स्थिति की पुष्टि नहीं कर पाए हैं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के मुताबिक, ईरान के पास 440.9 किलोग्राम यूरेनियम था, जिसे 60 प्रतिशत तक शुद्ध किया गया था। यह स्तर हथियार बनाने लायक करीब 90 प्रतिशत शुद्धता से तकनीकी तौर पर एक कदम नीचे माना जाता है।
पहले उत्तर कोरिया में भी खत्म हुई थी ऐसी निगरानी
यह पहली बार नहीं है जब रूस ने संयुक्त राष्ट्र में प्रतिबंधों की निगरानी से जुड़े पैनल का विरोध किया है। मार्च 2024 में रूस के वीटो के बाद उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर नजर रखने वाले UN विशेषज्ञों का काम बंद हो गया था। अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, माली में भी प्रतिबंध खत्म किए जा चुके हैं। वहीं, यमन और मध्य अफ्रीकी गणराज्य में विशेषज्ञों की नियुक्ति में देरी हुई या उन्हें मंजूरी नहीं मिली। ईरान के मामले में भी विशेषज्ञों के पैनल को एक साल पहले मंजूरी मिली थी। UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सदस्यों के नाम सुझाए थे, लेकिन उन्हें अब तक मंजूरी नहीं मिल सकी।
अब आगे क्या होगा?
फ्रांस ने कहा है कि UN विशेषज्ञों का पैनल खत्म होने के बाद ईरान पर लगे प्रतिबंधों की निगरानी के लिए दूसरा तरीका अपनाया जा सकता है। एक विकल्प यह है कि फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका मिलकर एक नई निगरानी टीम बनाएं। उत्तर कोरिया के मामले में भी विशेषज्ञों का पैनल खत्म होने के बाद इसी तरह दूसरे तरीकों से निगरानी की गई थी। अब ईरान के लिए भी ऐसा विकल्प सामने आ सकता है। रूस और चीन के वीटो से ईरान के प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच मतभेद एक बार फिर सामने आए हैं। साथ ही, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम भंडार को लेकर चिंता बनी हुई है। (AP से इनपुट्स के साथ)
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