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राजस्थान की शान ‘केर’ की सब्जी! अनोखे खट्टे-तीखे स्वाद से भर देगी आपकी थाली

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Marwari Ker Sabzi Recipe: राजस्थान की पारंपरिक रसोई में केर की सब्जी का अपना अलग ही स्थान है. यह एक जंगली फल है, जो मुख्य रूप से गर्मियों के मौसम में लगभग तीन महीने ही उपलब्ध होता है. अपने अनोखे खट्टे-तीखे स्वाद के कारण केर की सब्जी मारवाड़ और शेखावाटी क्षेत्र में बेहद लोकप्रिय है. इसे पारंपरिक मसालों, दही और तेल के साथ खास विधि से तैयार किया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी लाजवाब हो जाता है. केर न केवल स्वाद बढ़ाती है, बल्कि इसमें कई पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जो इसे सेहत के लिए लाभदायक बनाते हैं. बाजरे की रोटी, मिस्सी रोटी या दाल-बाटी के साथ इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है.

राजस्थान की पहचान केवल उसकी संस्कृति और लोककला से ही नहीं, बल्कि उसके पारंपरिक व्यंजनों से भी है. इन्हीं में से एक है केर की सब्जी, जो अपने अनोखे खट्टे-तीखे स्वाद और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की क्षमता के कारण बेहद लोकप्रिय है. केर एक जंगली फल होता है, जिसे सुखाकर इस्तेमाल किया जाता है. इसे विशेष मसालों और तेल में पकाया जाता है, जिससे इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. यह सब्जी बाजरे की रोटी, मिस्सी रोटी, ज्वार की रोटी या पराठे के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है.

ग्रहणी ममता देवी ने बताया कि सबसे पहले लगभग 100 ग्राम सूखी केर लें और उसे अच्छी तरह साफ करके 8–10 घंटे या पूरी रात पानी में भिगो दें. इसके बाद उसी पानी को फेंककर केर को दो से तीन बार साफ पानी से धो लें ताकि उसकी अतिरिक्त कड़वाहट निकल जाए. अब एक बर्तन में पानी उबालें और उसमें केर को 10–15 मिनट तक उबाल लें. उबालने के बाद पानी निकाल दें और केर को अलग रख दें.

अब कड़ाही में 3–4 बड़े चम्मच सरसों का तेल गर्म करें. तेल अच्छी तरह धुआँ छोड़ने लगे तो आंच धीमी कर दें. इसमें आधा चम्मच जीरा, चुटकीभर हींग और चाहें तो थोड़ा राई डालें. तड़का तैयार होने पर इसमें एक चम्मच सौंफ, आधा चम्मच धनिया पाउडर, आधा चम्मच हल्दी, एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर, आधा चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च, आधा चम्मच गरम मसाला, आधा चम्मच अमचूर पाउडर और स्वादानुसार नमक डालकर मसालों को हल्का भून लें.

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अब उबली हुई केर को मसालों में डालकर अच्छी तरह मिलाएं ताकि प्रत्येक दाना मसालों से अच्छी तरह लिपट जाए. लगभग 8–10 मिनट तक धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए पकाएं. इसके बाद 2–3 बड़े चम्मच फेंटा हुआ दही डालें और लगातार चलाते रहें ताकि दही फटे नहीं. दही के साथ सब्जी को 5 मिनट तक और पकाएं. अंत में स्वाद संतुलित करने के लिए एक छोटा चम्मच चीनी या गुड़ और थोड़ा सा नींबू का रस मिला सकते हैं. इससे सब्जी में हल्का खट्टा-मीठा स्वाद आ जाता है, जो इसे और भी लाजवाब बनाता है.

यदि आप पारंपरिक राजस्थानी स्वाद चाहते हैं, तो इसमें थोड़ा भुना हुआ जीरा पाउडर, कुटी हुई काली मिर्च और एक चम्मच सूखी कसूरी मेथी भी मिला सकते हैं. कुछ लोग इसमें साबुत सूखी लाल मिर्च और हरी मिर्च का तड़का भी लगाते हैं, जिससे स्वाद और सुगंध दोनों बढ़ जाते हैं. तैयार सब्जी को 10 मिनट ढककर रख दें ताकि मसाले अच्छी तरह मिल जाएं.

गरमा-गरम केर की सब्जी को बाजरे की रोटी, मिस्सी रोटी, तंदूरी रोटी या दाल-बाटी के साथ परोसें. यदि इसे एक दिन पहले बनाकर रखा जाए, तो अगले दिन इसका स्वाद और भी निखरकर आता है. यही कारण है कि राजस्थान के घरों में केर की सब्जी खास अवसरों, त्योहारों और मेहमानों के स्वागत में बड़े चाव से बनाई जाती है. यह स्वाद के साथ-साथ लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाली पारंपरिक राजस्थानी डिश भी मानी जाती है.

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