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Satna News: स्थानीय निवासी अंजलि चतुर्वेदी ने लोकल 18 से कहा कि सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार रविवार और बुधवार को घर में न तो बखरी बनाई जाती है और न ही इसका सेवन किया जाता है. इसके पीछे कई पारंपरिक और सांस्कृतिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं, जिन्हें लोग आज भी बड़े सम्मान के साथ मानते हैं.
सतना. क्या आपके घर में भी अक्सर रात को चावल बच जाते हैं और आप सुबह उठकर यही सोचते हैं कि अब इस बचे हुए चावल का क्या किया जाए, तो टेंशन को कहिए बाय-बाय क्योंकि भारत के पारंपरिक खानपान में हर समस्या का एक बेहद स्वादिष्ट समाधान छिपा है. आज हम आपको लेकर चल रहे हैं बघेलखंड की एक ऐसी पारंपरिक रसोई में, जहां दूध और चावल के मेल से एक ऐसी जादुई डिश तैयार होती है, जिसके बिना वहां का हर त्योहार, हर जश्न बिल्कुल अधूरा माना जाता है. इस पारंपरिक और मुंह में पानी ला देने वाली खीर को लोग लोकल भाषा में बखीर या बखरी कहते हैं. यह न सिर्फ आपकी मीठे की क्रेविंग को शांत करेगी बल्कि बचे हुए चावलों का ऐसा लाजवाब इस्तेमाल होगा कि आप उंगलियां चाटते रह जाएंगे.
बघेलखंड की लोक संस्कृति और खानपान में बखरी का स्थान किसी शाही पकवान से कम नहीं है. पुराने समय से लेकर आज के आधुनिक दौर तक इसे खास अवसरों, तीज-त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों में बड़े चाव से बनाया जाता है. इसे खासतौर पर गरमागरम दाल पूरी या सुहारी के साथ परोसने की परंपरा आज भी उतनी ही जिंदा है, जितनी सदियों पहले थी. यह सिर्फ एक पकवान नहीं बल्कि बघेलखंड के लोगों का अपनी जड़ों से जुड़े रहने का एक जरिया भी है.
हफ्ते के इन दो दिनों में भूलकर भी न बनाएं बखरी
स्वाद की इस महफिल में एक बेहद दिलचस्प ट्विस्ट भी है. भले ही यह डिश बेहद लोकप्रिय हो लेकिन इसे बनाने और खाने को लेकर कुछ कड़े नियम भी हैं, जिनका पालन आज भी बघेलखंड के घरों में कड़ाई से किया जाता है. स्थानीय निवासी अंजलि चतुर्वेदी लोकल 18 को बताती हैं कि सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार हफ्ते के रविवार और बुधवार को घर में न तो बखरी बनाई जाती है और न ही इसका सेवन किया जाता है. इसके पीछे कई सांस्कृतिक और पारंपरिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं, जिन्हें लोग आज भी बड़े सम्मान के साथ मानते हैं.
बखरी बनाने का सबसे आसान तरीका
अगर आप भी इस पारंपरिक स्वाद को अपने घर पर चखना चाहते हैं, तो इसकी मेकिंग प्रोसेस बेहद सिंपल है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक भारी तले वाले बर्तन या कड़ाही में एक लीटर दूध लेकर उसे अच्छी तरह गर्म करें. जब दूध में एक बढ़िया उबाल आ जाए, तो उसमें आधा कप अच्छी तरह धुले हुए और करीब आधे घंटे के लिए पानी में भीगे हुए बासमती चावल डालें. ध्यान रहे कि चावल को दूध में डालने से पहले हल्के हाथों से थोड़ा मैश कर लें. अब गैस की आंच को धीमा कर दें. फिर दूध और चावल के इस मिक्सचर को बीच-बीच में चमचे से चलाते रहें ताकि यह तली में चिपके नहीं. इसे तब तक पकाना है, जब तक चावल पूरी तरह से मुलायम न हो जाएं और दूध गाढ़ा होकर अपनी मात्रा का आधा न रह जाए.
काजू-बादाम और इलायची का तड़का
जब दूध गाढ़ा हो जाए और चावल अच्छी तरह मिक्स हो जाएं, तब इसमें आधा कप चीनी, एक छोटा चम्मच हरी इलायची का पाउडर और अपनी पसंद के बारीक कटे हुए काजू, बादाम और पिस्ता डालें. अब इस मलाईदार खीर जैसी बखरी को चीनी पूरी तरह घुलने तक पांच मिनट और धीमी आंच पर पकाएं. आपकी गरमागरम खुशबूदार बखरी तैयार है. आप चाहें तो इसे एकदम गरमागरम परोसें या फिर फ्रिज में रखकर ठंडी-ठंडी रबड़ी जैसी बखरी का आनंद लें.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.