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राबड़ी, मलाई और खोया से भरपूर! बलिया की इस लस्सी का नहीं है कोई जवाब, जानिए

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गर्मी के मौसम में जहां लोग ठंडक पाने के लिए कोल्ड ड्रिंक की ओर रुख करते हैं, वहीं बलिया की एक पारंपरिक लस्सी आज भी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. पांच पीढ़ियों से चल रही यह दुकान अपने खास स्वाद और पारंपरिक तरीके से तैयार की गई लस्सी के लिए जानी जाती है. राबड़ी, मलाई और खोया से भरपूर यह लस्सी न केवल स्वाद का अनोखा अनुभव देती है, बल्कि हर दिन बड़ी संख्या में ग्राहकों को भी अपनी ओर आकर्षित करती है.

बलिया. दिन में चिलचिलाती धूप और शाम को उमस भरी गर्मी में लोगों का जीवन अस्त व्यस्त हो गया है. ऐसे में लोग खाना कम, बल्कि शीतल पेय पदार्थों का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. आज हम आपके शहर के उस प्राचीन और फेमस दुकान के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां की लस्सी बेहद खास और सबसे अलग होती है.

इस लस्सी के स्वाद के दीवाने दूर-दूर से आते हैं, एक बार पीने के बाद बार-बार पीने के लिए लोग मजबूर होते हैं, कारण यह है कि इसका स्वाद बेहद ही लाजवाब और अलग होता है. आज के दौर में कोल्डड्रिंक के बढ़ते चलन के बीच भी इस लस्सी का कोई जवाब नहीं है. यहां सुबह से लेकर शाम तक लोगों का जमावड़ा देखने को मिलता है.

रामपुर महावल निवासी ग्राहक, साहब खान ने कहा कि वह यहां लस्सी पीने लगभग 4 साल से आ रहे हैं, यह लस्सी बेहद लजीज होती हैं. आज के दौर में जो कोल्ड्रिंक्स का चलन बढ़ा है, उससे यह देसी लस्सी लाख गुना बेहतर है. इसको पीने से स्वाद के साथ स्वास्थ्य भी सही रहता है.

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यह पूरा आइटम एकदम भैंस के दूध से तैयार होता हैं. इसमें ठंडी लस्सी, खोया, मलाई और राबड़ी आदि डाला जाता हैं. यह ग्राहकों को मिट्टी के बर्तन में परोसा जाता हैं, जिससे इसका स्वाद दोगुना हो जाता है. यह दिनाप्रसाद लस्सी भंडार की दुकान बलिया रेलवे स्टेशन से बस थोड़ी सी दूरी पर ठीक शहीद पार्क के सामने हनुमान गढ़ी रोड में स्थित हैं.

दुकानदार दिनाप्रसाद ने कहा कि, यह दुकान बहुत पुरानी है, इसमें उनकी पांच पीढ़ी काम कर चुकी हैं, अब यह लस्सी पिला रहे हैं. इस देसी लस्सी को बनाने के लिए सबसे पहले भैंस के दूध को खुद से घर पर दही तैयार किया जाता है. इसके बाद तैयार दही, केवड़ा, बर्फ और चीनी डालकर बिल्कुल पारंपरिक तरीके से लकड़ी के मथनी से फेंटा जाता है. इसमें ऊपर से राबड़ी, मलाई और खोया डाला जाता है.

यह लस्सी इस दुकान पर बहुत पहले लेकिन दीनानाथ के ही समय पांच रुपए का मिलता था. उससे पहले तो इनके पीढ़ी दर पीढ़ी बहुत कम रेट में लस्सी बेचे होंगे. हालांकि, फिलहाल यह लस्सी 50 रुपए में बिक रही हैं. फिर भी इस लस्सी को पीने वाले लोगों की भीड़ कम नहीं हुई है. इस लस्सी को पीने के लिए बलिया जनपद के अलावा अन्य जिले से भी लोग आते हैं.

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