जालोर. राजस्थान की रसोई में अगर किसी एक मिठाई को हर शुभ अवसर की पहचान कहा जाए, तो वह है लापसी. शादी-ब्याह हो, घर में कोई मांगलिक कार्य हो या फिर कोई छोटी-सी खुशखबरी, रसोई में सबसे पहले गुड़, घी और गेहूं की खुशबू से तैयार होती है लापसी. जैसे ही कढ़ाई में घी गरम होता है और उसमें दलिया भुनना शुरू होता है, वैसे ही पूरे घर में एक अलग ही खुशबू फैल जाती है और यही खुशबू मानो किसी शुभ काम की शुरुआत का संकेत देती है.
शादी या अन्य मांगलिक कार्यो में लाेग बनाते हैं लावसी
खासतौर पर अगर शादी-ब्याह की बात करें, तो एक परंपरा ऐसी है जो हर घर में बेहद खास मानी जाती है और वह है पाट बिठाई. जैसे ही पाट बिठाई का कार्यक्रम होता है, उसी समय रसोई में लापसी बनना शुरू हो जाती है. इसे बनाना सिर्फ एक रिवाज नहीं, बल्कि एक अनिवार्य परंपरा मानी जाती है. बिना लापसी के यह रस्म अधूरी मानी जाती है. इसके साथ ही जब विनायक पूजन होता है, तब भी लापसी का विशेष महत्व होता है. सबसे पहले इस लापसी का भोग भगवान को लगाया जाता है, और उसके बाद ही इसे परिवार के लोगों और मेहमानों में बांटा जाता है. यह परंपरा इस बात को दर्शाती है कि हर शुभ कार्य की शुरुआत आस्था और मिठास के साथ होनी चाहिए.
राजस्थान का पारंपरिक भोजन है लापसी
लापसी के साथ जो पारंपरिक भोजन परोसा जाता है, वह भी अपने आप में खास होता है. गरमा-गरम कढ़ी, चने की सब्जी और फूली हुई पूरी और जब ये सब एक साथ थाली में सजते हैं, तो उसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग लापसी को कढ़ी के साथ खाना पसंद करते हैं, और यह स्वाद पीढ़ियों से चला आ रहा है. अगर बात करें इसकी रेसिपी की तो इसको घर पर बनाने वाली बुजुर्ग महिला लीला देवी ने लोकल18 को जानकारी दी कि तो यह जितनी खास है, उतनी ही सरल भी है. सबसे पहले कढ़ाई में देसी घी गरम किया जाता है और उसमें गेहूं का दलिया डालकर उसे धीमी आंच पर लगातार भुना जाता है. जैसे-जैसे दलिया सुनहरा होता है, उसकी खुशबू और भी तेज होने लगती है, जो पूरे माहौल को और भी खास बना देती है.
ऐसे तैयार किया जाता है पारंपरिक लापसी
जब तक दलिया पकता है, तब तक एक अलग बर्तन में पानी गरम कर उसमें गुड़ डाला जाता है, ताकि उसका मीठा घोल तैयार हो सके. जब दलिया अच्छी तरह भुन जाता है, तब उसमें गरम पानी डाला जाता है. पानी डालते ही उसमें उबाल आता है और फिर इसे ढककर कुछ मिनट तक पकाया जाता है, ताकि दलिया पूरी तरह नरम हो जाए. इसके बाद इसमें गुड़ का तैयार घोल छानकर डाला जाता है और साथ ही काजू, बादाम जैसे ड्राय फ्रूट्स भी मिलाए जाते हैं. फिर इसे धीमी आंच पर कुछ मिनट और पकाया जाता है, जिससे सभी स्वाद आपस में अच्छी तरह घुल-मिल जाएं.
धीरे-धीरे यह गाढ़ी होती जाती है, और कुछ ही देर में तैयार हो जाती है गरमा-गरम, स्वादिष्ट और खुशबूदार लापसी, जिसे ड्राय फ्रूट्स से सजाकर परोसा जाता है. आज के समय में भले ही बाजार में कई तरह की मिठाइयां उपलब्ध हों, लेकिन लापसी की जगह आज भी कोई नहीं ले पाया है. लोग आज भी इसे घर पर बनाना पसंद करते हैं, क्योंकि इसमें सादगी, शुद्धता और सेहत का खास ध्यान रखा जाता है.