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Jimikand Sukhdi Recipe: जिमी कांदा सुखड़ी सिर्फ एक स्वादिष्ट व्यंजन नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ राज्य की पारंपरिक खाद्य संस्कृति का अहम हिस्सा है. सब्जी को सुखाकर भविष्य के लिए सुरक्षित रखने की यह परंपरा आज भी ग्रामीण इलाकों में देखने को मिलती है.

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रसोई में जिमी कांदा से बनने वाले कई व्यंजन बेहद लोकप्रिय हैं. इनमें जिमी कांदा की सुखड़ी एक ऐसी देसी रेसिपी है, जिसे ग्रामीण इलाकों में सालभर के लिए सहेजकर रखा जाता है. जिमी कांदा जब आसानी से उपलब्ध नहीं होता, तब यही सुखड़ी घर के काम आती है. इसके लिए जिमी कांदा को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर अच्छी तरह धूप में सुखाया जाता है. पूरी तरह सूख जाने के बाद इसे डिब्बे में भरकर सुरक्षित रख लिया जाता है और जरूरत पड़ने पर निकालकर स्वादिष्ट सब्जी तैयार की जाती है. खास बात यह है कि मसालों के साथ पकाने के बाद जिमी कांदा सुखड़ी का स्वाद इतना लाजवाब होता है कि इसे खाने वालों को नॉनवेज जैसा स्वाद महसूस होता है.

जिमी कांदा की सुखड़ी बनाने के लिए सबसे पहले जिमी कांदा को साफ करके छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है. इसके बाद इन टुकड़ों को धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है. पर्याप्त धूप मिलने पर जिमी कांदा के टुकड़ों का पानी पूरी तरह निकल जाता है और वे लंबे समय तक सुरक्षित रखने लायक हो जाते हैं.

डिब्बे में रख लंबे समय तक करते हैं इस्तेमाल
जब जिमी कांदा के टुकड़े पूरी तरह सूख जाते हैं, तो इन्हें साफ और सूखे डिब्बे में भरकर रख लिया जाता है. इस तरह तैयार की गई सुखड़ी को जरूरत के हिसाब से निकालकर सब्जी बनाई जा सकती है. ग्रामीण क्षेत्रों में यह पारंपरिक तरीका लंबे समय से अपनाया जाता रहा है, जिससे मौसम के अनुसार उपलब्ध न होने वाली सब्जी को बाद के लिए सुरक्षित रखा जा सके.

बरसात में जिमी कांदा नहीं मिले तो आती है काम
बरसात के दिनों में कई जगहों पर ताजा जिमी कांदा आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता. ऐसे समय में घर में रखी जिमी कांदा सुखड़ी निकालकर बनाई जाती है. इसे पानी में भिगोकर या जरूरत के अनुसार तैयार करने के बाद प्याज, टमाटर, अदरक-लहसुन और देसी मसालों के साथ पकाया जाता है. मसाले अच्छी तरह पकने के बाद सुखड़ी को डालकर धीमी आंच पर तैयार किया जाता है.

नॉनवेज जैसा जायका
जिमी कांदा सुखड़ी की खासियत इसका अनोखा स्वाद और बनावट है. देसी मसालों के साथ पकने के बाद इसकी सब्जी काफी स्वादिष्ट लगती है. कई लोग इसके स्वाद की तुलना नॉनवेज से करते हैं. गरम चावल, दाल या रोटी के साथ जिमी कांदा सुखड़ी की सब्जी का स्वाद और भी बढ़ जाता है.

छत्तीसगढ़ की देसी रसोई में आज भी कायम है परंपरा
जिमी कांदा सुखड़ी सिर्फ एक स्वादिष्ट व्यंजन नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की पारंपरिक खाद्य संस्कृति का हिस्सा है. सब्जी को सुखाकर भविष्य के लिए सुरक्षित रखने की यह पुरानी परंपरा आज भी ग्रामीण इलाकों में देखने को मिलती है. मौसम बदलने के बाद जब ताजा जिमी कांदा उपलब्ध नहीं होता, तब यही सुखड़ी लोगों को उसी देसी स्वाद का आनंद देती है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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