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काला जामुन तैयार करने के लिए नीरा से बने खोये में थोड़ा आटा या पनीर मिलाकर लोई बनाई जाती है. फिर छोटे-छोटे गोले बनाकर उन्हें तेल या घी में तला जाता है. इसके बाद इन तले हुए जामुनों को नीरा से बनी चाशनी में डाला जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी खास हो जाता है. रसगुल्ला बनाने में भी नीरा….
प्रभात कुमार/वैशाली: ग्रामीण क्षेत्रों में अब पारंपरिक संसाधनों का बेहतर उपयोग कर स्वरोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं. इसी कड़ी में “नीरा” से बनने वाले उत्पाद आज लोगों के बीच खासे लोकप्रिय हो रहे हैं. खजूर या ताड़ के पेड़ों से निकाला जाने वाला ताजा रस, जिसे नीरा कहा जाता है, पोषक तत्वों से भरपूर होता है. इससे कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए जाते हैं. नीरा को सबसे पहले स्वच्छ तरीके से पेड़ों से निकाला जाता है. यह रस सुबह-सुबह ताजा अवस्था में इकट्ठा किया जाता है, ताकि इसकी मिठास और पौष्टिकता बनी रहे.
इसके बाद इसके रस को छानकर उबालने की प्रक्रिया शुरू की जाती है. धीरे-धीरे उबालने पर नीरा गाढ़ा होने लगता है और इसमें प्राकृतिक मिठास बढ़ जाती है. यही गाढ़ा नीरा आगे विभिन्न मिठाइयों का आधार बनता है. पेड़ा बनाने की प्रक्रिया में गाढ़े किए गए नीरा को लगातार चलाते हुए तब तक पकाया जाता है जब तक वह खोये जैसी बनावट में न आ जाए. इसके बाद इसमें इलायची या सूखे मेवे मिलाकर छोटे-छोटे पेड़े बनाए जाते हैं. इसका स्वाद पूरी तरह प्राकृतिक होता है और इसमें अलग से चीनी डालने की जरूरत नहीं पड़ती.
काला जामुन तैयार करने के लिए नीरा से बने खोये में थोड़ा आटा या पनीर मिलाकर लोई बनाई जाती है. फिर छोटे-छोटे गोले बनाकर उन्हें तेल या घी में तला जाता है. इसके बाद इन तले हुए जामुनों को नीरा से बनी चाशनी में डाला जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी खास हो जाता है. रसगुल्ला बनाने में भी नीरा का इस्तेमाल किया जाता है. ताजे दूध से छेना तैयार कर छोटे-छोटे गोले बनाए जाते हैं और उन्हें नीरा की हल्की चाशनी में उबाला जाता है. इससे रसगुल्ले में अलग तरह की मिठास और खुशबू आती है, जो सामान्य रसगुल्लों से अलग होती है.
पुड़ुकिया एक पारंपरिक मिठाई है, जिसे नीरा के गाढ़े मिश्रण और आटे से तैयार किया जाता है. इसमें नारियल, गुड़ या मेवे भरकर इसे तला या सेंका जाता है. इसका स्वाद ग्रामीण संस्कृति की झलक दिखाता है. नीरा से बनने वाले ये सभी उत्पाद न सिर्फ स्वादिष्ट हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं. आज कई किसान और युवा इसे अपनाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ा रहे हैं.
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