भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे कारोबारी दिन भी भारी बिकवाली देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये में गिरावट और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ घोषणा ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। इसका असर यह रहा कि सेंसेक्स तीन दिनों में करीब 1,500 अंक टूटकर 78,250 से 76,755 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी 24,000 के अहम स्तर से नीचे फिसलकर 23,996 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट

बुधवार को कारोबार के अंत में सेंसेक्स 715.06 अंक गिरकर 76,755.05 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 191.45 अंक टूटकर 23,996.25 पर आ गया। बाजार में बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा रहा कि 2,600 से ज्यादा शेयर लाल निशान में बंद हुए, जबकि केवल करीब 1,400 शेयरों में बढ़त देखने को मिली।

इन सेक्टरों ने सबसे ज्यादा कराया नुकसान

बुधवार के कारोबार में सबसे ज्यादा दबाव मीडिया, रियल्टी, बैंकिंग, आईटी और फार्मा सेक्टर पर देखने को मिला। निफ्टी मीडिया इंडेक्स करीब 2.7%, रियल्टी 2.6%, पीएसयू बैंक 1.8%, प्राइवेट बैंक 1.4% और आईटी इंडेक्स 1.5% तक टूट गया। इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेज बिकवाली रही। हालांकि FMCG और ऑटो सेक्टर में मामूली बढ़त देखने को मिली।

इन शेयरों ने बढ़ाई बाजार की परेशानी

निफ्टी पर इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo), जियो फाइनेंशियल, इंफोसिस, एसबीआई और डॉ. रेड्डीज लैब सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे। वहीं बजाज ऑटो, नेस्ले इंडिया, टाटा कंज्यूमर, पावर ग्रिड और ओएनजीसी जैसे कुछ शेयरों ने बढ़त दर्ज कर बाजार को थोड़ी राहत देने की कोशिश की।

क्यों टूटा शेयर बाजार?

बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रही। ब्रेंट क्रूड लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जिससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ने का खतरा बढ़ गया। दूसरी ओर, रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 96.36 के स्तर पर पहुंच गया। इससे विदेशी निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयातित जेनेरिक दवाओं पर भविष्य में भारी टैरिफ लगाने की घोषणा का असर भारतीय फार्मा कंपनियों पर पड़ा। इसी कारण सन फार्मा, सिप्ला और डॉ. रेड्डीज जैसे शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली।

आगे क्या रहेगी नजर?

जब तक कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली में राहत नहीं मिलती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक घटनाक्रम बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।

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