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Balaghat News: बालाघाट का कान्हा नेशनल पार्क पूरी दुनिया में अपनी डायवर्सिटी के लिए प्रसिद्ध है. ऐसे में यहां की खूबसूरती को निहारने के लिए पूरी दुनिया के पर्यटक आते हैं. यहां पर एक ऐसा ढाबा है, जो कान्हा नेशनल पार्क के आसपास काफी चर्चा का विषय रहता है. हर कोई यहां आता है, तो इसका नाम पढ़कर हंस देता है. ढाबे का नाम ऐसा क्यों है ये जानने के लिए उत्सुक रहता है. तो चलिए जान लेते हैं इसके बारे में ज्यादा जानकारी…

बालाघाट का कान्हा नेशनल पार्क पूरी दुनिया में अपनी डायवर्सिटी के लिए प्रसिद्ध है. ऐसे में यहां की खूबसूरती को निहारने के लिए पूरी दुनिया के पर्यटक आते हैं. यहां पर एक ऐसा ढाबा है, जो कान्हा नेशनल पार्क के आसपास काफी चर्चा का विषय रहता है. हर कोई यहां आता है, तो इसका नाम पढ़कर हंस देता है. ढाबे का नाम ऐसा क्यों है ये जानने के लिए उत्सुक रहता है. दरअसल, कान्हा नेशनल पार्क के मुक्की गेट के पास भाटो का ढाबा है. यह ढाबा काफी प्रचलित है, जो लोगों को काफी पसंद आता है. ऐसे में वहां पर न सिर्फ देसी सैलानी आते हैं बल्कि विदेशी पर्यटकों को यह ढाबा खूब भाता है.

जानिए क्यों पड़ा नाम भाटों का ढाबा
बालाघाट के बैहर में स्थित भाटों का ढाबा है. ऐसे में इसके नाम पड़ने की कहानी काफी दिलचस्प है. दरअसल, महाराष्ट्र के गोंदिया में रहने वाले श्रीचंद डोडवानी है. वहीं, उन्होंने सालों पहले बैहर में शादी की. श्रीचंद डोडवानी के ससुर पूरे बैहर में अपना एक रसूख रखते थे. वह भी ढाबा चलाते थे. ऐसे में ससूर की वजह से सभी उन्हें भाटो-भाटो कहते हैं. भाटो का मतलब होता है जीजा. यानी की पूरे बैहर के श्रीचंद जीजा हो गए और वह भाटो के नाम से प्रसिद्ध हो गए. वहीं, उनके ससुर ने उन्हें बैहर में बसने और अपना एक ढाबा खोलने की सलाह दी और इसके लिए मदद भी की. फिर क्या था उन्होंने भाटो का ढाबा नाम से भोजनालय यानी ढाबा खोल दिया. अब वह इलाके में काफी फेमस है.

पर्यटकों का पसंदीदा है भाटो का ढाबा
बैहर के भाटो श्रीचंद बताते हैं कि लोग यहां पर लोग बड़े प्यार से भोजन करने के लिए आते हैं. वहीं, कान्हा नेशनल पार्क में आने वाले पर्यटक भी इसके कायल है. दरअसल, यहां पर कम दाम में बेहतर खाना मिलता है. यहां की खास बात ये हैं कि इस ढाबे में खड़े भट्टे की सब्जी. खड़े भट्टे यानी सगे बैंगन खाने के शौकिनों को खूब भाता है. वहीं, बालाघाट का प्रसिद्ध दाल भात की काफी डिमांड रहती है.

लोकल व्यंजन भी बनाते हैं इसे खास
भाटो के ढाबे नाम में ग्राहकों को जितना अपनापन लगता है. उतना है ढाबा में मिलने वाले भोजन लोकल टेस्ट का जायका है. जो बालाघाट की संस्कृति और स्वाद का हिस्सा है. ऐसे में यह ढाबे में एक बार आता है वह बार-बार आता है. ऐसे में कान्हा नेशनल पार्क में इस ढाबे ने अपनी एक अलग पहचान बनाकर रखा है.

भाटो है इस बात से परेशान
भाटो श्रीचंद को छोटी सी बात से परेशान है. भाटो का कहना है कि उनके ढाबे पर देश और विदेश से सैलानी आते हैं. ऐसे में वह न सिर्फ अपने ढाबा को रिप्रेजेंट करते हैं बल्कि बालाघाट और पूरे एमपी को रिप्रेजेंट करते हैं. ऐसे में आने वाले पर्यटकों को भरी गर्मी रहना पड़ता है. दरअसल, यहां पर वोल्टेज कम रहने की वजह से इनका विद्युत उपकरण काम नहीं करते हैं. ऐसे में पर्यटकों को यह बेहतर सेवा नहीं दे पाते हैं. वह चाहते हैं कि इस समस्या पर प्रशासन ध्यान दें.

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Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें



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