Famous Food Outlets In Delhi: (डॉ. रामेश्वर दयाल)आज हम आपको एक ऐसी मीठी डिश का स्वाद चखवाते हैं, जो सिर्फ सर्दी के मौसम में ही बन सकती है, सर्दी में ही बिकती है और खास बात यह है कि उसकी तासीर भी ठंडी होती है. मजेदार बात यह है कि किसी भी मिठाई या मिष्ठान्न से इसकी तुलना नहीं की जा सकती है. अजब-गजब है यह व्यंजन. इसका नाम है ‘दौलत की चाट’, जो पुरानी दिल्ली में सर्दी के दौरान कुछ ही खोमचों में मिलती है और सर्दी खत्म होते ही गायब हो जाती है. इस डिश को लोग हैरानी के साथ खाते हैं लेकिन मजा पाते हैं.
इस मिष्ठान्न को उसके नाम से पारिभाषित नहीं किया जा सकता
इस मिठाई का कोई प्रामाणिक इतिहास नहीं है, लेकिन कहा जाता है कि जब पुरानी दिल्ली बसी थी, तभी से सर्दियों में यह खाई जाती है. यह कयास लगाए जाते हैं कि चूंकि इसका नाम ‘दौलत की चाट’ है, इसलिए धन-दौलत वाले लोग ही इसे खा पाते होंगे. असल में इस डिश को उसके नाम से बिल्कुल भी पारिभाषित (Define) नहीं किया जा सकता, क्योंकि दौलत का तो इससे दूर-दूर का नाता नहीं है और चाट तो यह बिल्कुल भी नहीं है. तो फिर असल में यह है क्या? असल में यह दूध और क्रीम से निकाला गया झाग है जो बड़ी ही मेहनत से तैयार किया जाता है. पुरानी दिल्ली के बाजार सीताराम इलाके में दो-चार परिवार हैं जो इसे रातभर तैयार करते हैं और फिर दिन निकलते ही खोमचे (छाबे) पर रखकर इसे बेचने के लिए निकल पड़ते हैं. पुरानी दिल्ली के लोग तो इसके बारे में जानते हैं, लेकिन बाहर के लोग जो बाजारों में खरीदारी करने के लिए आते हैं, वह खोमचे पर रखी इस डिश को देखकर हैरान होते हैं और जब उन्हें बताया जाता है कि यह दूध और क्रीम का झाग है तो वह हैरान होते हैं, लेकिन खाकर अलग ही अनुभव लेते हैं.
35 साल से एक ही जगह पर लग रहा है इसका खोमचा
जब सर्दी शुरू होती है तो चांदनी चौक, नई सड़क, चावड़ी बाजार, फतेहपुरी, खारी बावली जैसे भीड़ भरे इलाकों में इसके खोमचे दिखाई देंगे. करीब 35 साल से इस डिश को खेमचंद अपने परिवार के साथ कुछ छाबे लगाकर इसे बेच रहे हैं. वह पुरानी दिल्ली के रहने वाले हैं और वह खुद नई सड़क पर इसका खोमचा लगाते हैं. उनका कहना है कि उनके पिता और फिर उन्हें उनके उस्ताद जयमल ने इसे बनाना सिखाया. इससे पहले उनको उनके उस्ताद ने इसे बनाने की कारीगरी सिखाई. खेमचंद अपने बेटे आदेश कुमार व अन्य रिश्तेदारों के साथ बाजार सीताराम में रहते हैं. वह बताते हैं कि शाम ढलते ही दूध व क्रीम को शीतल करने के लिए खुले में रख दिया जाता है. ओस में इसकी तासीर अलग ही बन जाती है. रात दो बजे परिवार के सदस्य एक के बाद एक इस क्रीम वाले दूध को मथानी से मथते हैं, ऊपर जो झाग उभरता है, उसे परात में इकट्ठा कर लिया जाता है. सुबह तक यह क्रम चलता रहता है और फिर इसे बेचने के लिए बाजारों में भेज दिया जाता है.
करीब 35 साल से इस डिश को खेमचंद अपने परिवार के साथ कुछ छाबे लगाकर इसे बेच रहे हैं.
दूध-क्रीम-केसर और पिस्ता-खुरचन-बूरा इसका स्वाद निखार देता है
असल में ‘दौलत की चाट’ बिल्कुल फीकी होती है. आधे दूध में केसर डालकर तैयार किया जाता है, इसलिए सफेद व केसर दो रंग की यह बनती है. ग्राहको को देते समय इसके ऊपर बारीक पिस्ता, खुरचन (पेड़ा) व करारा (बूरा) डालकर दिया जाता है, जिससे इसका स्वाद उभरता हे. यह ऐसा मिष्ठान्न है जिसकी किसी भी मिठाई से तुलना नहीं की जा सकती है. इसका सबसे छोटा दोना 50 रुपये का है. उसके बाद जितने भी पैसे देकर इसे खा सकते हैं या पैक कर ले जाते हैं.
‘दौलत की चाट’ बिल्कुल फीकी होती है.
खेमचंद के पुरानी दिल्ली में चार खोमचे लगते हैं. यह सर्दियों के मौसम में 15 अक्टूबर से 15 मार्च तक मिलती है. गर्मी पड़ते ही बंद कर दी जाती है क्योंकि गर्मी-उमस में इसे बनाया नहीं जा सकता. यह शुद्ध प्राकृतिक और मिलावट रहित व्यंजन है, जिसका स्वाद आपको चमत्कृत करता है. कभी पुरानी दिल्ली जाएं तो ‘दौलत की चाट’ का स्वाद जरूर चखें.
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