नई दिल्ली: सोनम वांगचुक दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिस ने कल उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए जंतर-मंतर से अस्पताल में भर्ती कराया। इस बीच सोनम वांगचुक की पत्नी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाकर उन्हें किसी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की है। अस्पताल में भी वांगचुक की भूख हड़ताल जारी है। आज उनकी भूख हड़ताल का 22वां दिन है। उन्होंने ड्रिप, ORS और दवा लेने से इनकार कर दिया है। दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन भी जारी है। 20 मार्च को प्रदर्शनकारियों की संसद भवन तक मार्च की तैयारी है, लेकिन दिल्ली पुलिस ने परमिशन देने से इनकार कर दिया है।
कैसी है सोनम वांगचुक की हेल्थ रिपोर्ट
VMMC और सफदरजंग अस्पताल की रविवार सुबह की रिपोर्ट के अनुसार, वांगचुक का जरूरी मेडिकल इलाज चल रहा है। हालांकि उनके वाइटल साइन (शरीर के जरूरी संकेत) स्थिर हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि उनके ब्लड पैरामीटर में थोड़ा बदलाव बना हुआ है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक उपवास के कारण शरीर पर पड़ने वाले तनाव और असर को देखते हुए, उन्हें विशेषज्ञों की एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम की लगातार मेडिकल देखरेख और कड़ी निगरानी में रखा जाएगा। इससे पहले शनिवार रात जारी एक बयान में अस्पताल ने कहा कि वांगचुक होश में हैं और उनकी हीमोडायनामिक स्थिति स्थिर है। उनकी पल्स, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन सैचुरेशन सामान्य सीमा के भीतर हैं, लेकिन डॉक्टरों ने उनके लंबे उपवास के असर पर चिंता जताई है और कहा है कि अब समय पर मेडिकल मदद की ज़रूरत है।
वांगचुक की पत्नी ने हाई कोर्ट में दाखिल की अर्जी
वहीं सोनम वांगचुक की पत्नी ने उन्हें सफदरजंग अस्पताल से किसी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की इजाजत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी दी है। वह रविवार को अपनी अर्जी पर तुरंत सुनवाई की मांग करेंगी। अस्पताल से “भरोसा उठने” की बात कहते हुए गीतांजलि जे. आंग्मो ने कहा कि वह एक्टिविस्ट की सेहत और बिगड़ने से पहले उन्हें सफदरजंग अस्पताल से अपनी पसंद के किसी प्राइवेट अस्पताल में ले जाना चाहती हैं। हाई कोर्ट में अपनी अर्जी में आंग्मो ने कहा कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद, सफदरजंग प्रशासन ने उन्हें “सिर्फ चुनिंदा जानकारी” दी और वांगचुक को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने से इनकार करने के कारण उनकी “मेडिकल स्थिति की स्वतंत्र जांच” नहीं हो पाई।
अपने पति की सेहत को लेकर “गहरी चिंता” जाहिर करते हुए आंग्मो ने कहा कि वह इलाज के “गुप्त और पूरी तरह से अपारदर्शी तरीके” से “दुखी” हैं, जबकि विरोध स्थल से हटाए जाते समय वांगचुक के ज़रूरी मेडिकल पैरामीटर स्थिर थे। उन्होंने आगे कहा कि वांगचुक की सेहत पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर मेडिकल दखल देने के लिए अधिकारियों को दिया गया हाई कोर्ट का 16 जुलाई का आदेश एकतरफा था और पुलिस ने शनिवार को किसी मेडिकल इमरजेंसी के बिना उस आदेश का “गलत फायदा” उठाकर जंतर-मंतर से अनशन कर रहे एक्टिविस्ट को जबरदस्ती हटा दिया।
गीतांजलि ने बताया गैर-कानूनी हिरासत
इससे पहले अपने X हैंडल पर एक पोस्ट में, वांगचुक की पत्नी ने कहा कि किसी भी परिवार को अपने प्रियजन के चिकित्सा देखभाल के स्थान का चुनाव करने के लिए व्यवस्था से लड़ना नहीं चाहिए और सफदरजंग द्वारा जारी सार्वजनिक स्वास्थ्य बुलेटिन में उनके पोटेशियम स्तर से संबंधित वास्तविक संख्या को “सुविधाजनक रूप से छोड़ दिया गया” है। उन्होंने कहा, “बार-बार अनुरोध करने के बावजूद, अस्पताल ने उन्हें डिस्चार्ज करने या हमें उन्हें अपनी पसंद के प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। हमारे फ्लोर पर लगभग 30 पुलिसकर्मी और पूरे अस्पताल में 100 से ज़्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिससे हमारी आवाजाही पर बहुत ज़्यादा रोक लगी हुई है। यह मेडिकल केयर नहीं है। यह गैर-कानूनी हिरासत है।”
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