चंडीगढ़: हरियाणा में  ग्रुप ‘ए’ और ग्रुप ‘बी’ पदों पर कार्यरत अनुसूचित जाति (SC) के कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण के लिए अब कोर्ट के फैसले का इंतजार करना होगा। सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित मामले पर फैसला आने तक इन कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण देने के प्रावधान के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। सरकार ने इस संबंध में नए निर्देश जारी करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आने तक सात अक्टूबर 2023 की नीति के तहत आरक्षण का लाभ देते हुए कोई भी पदोन्नति नहीं दी जाएगी। यह फैसला उस कानूनी विवाद के बाद आया है जिसमें हाईकोर्ट ने एससी कर्मचारियों को प्रमोशन में 20 प्रतिशत आरक्षण की नीति को बरकरार रखा था लेकिन क्रीमी लेयर को इसके दायरे से बाहर रखने का निर्देश दिया था।

मानव संसाधन विभाग ने जारी किए नए निर्देश

हरियाणा सरकार के मानव संसाधन विभाग ने इस संबंध में नए निर्देश जारी किए, जो इस विषय पर 19 दिसंबर 2023 को जारी आदेशों का स्थान लेंगे। यह कदम राज्य सरकार की ओर से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक अप्रैल 2025 के फैसले के खिलाफ दायर अपील के बाद उठाया गया। मामला ‘कमलजीत सिंह एवं अन्य बनाम हरियाणा राज्य’ से संबंधित है। 

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अनुसूचित जाति कर्मचारियों को प्रमोशन में 20 प्रतिशत आरक्षण देने की हरियाणा सरकार की नीति को बरकरार रखा था। अदालत ने हालांकि निर्देश दिया था कि इस नीति के क्रियान्वयन में ‘क्रीमी लेयर’ को आरक्षण के दायरे से बाहर रखा जाए। 

सरकार ने LPA के जरिए हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती

राज्य सरकार के एक आधिकारिक बयान में सोमवार शाम बताया गया कि सरकार ने हाईकोर्ट के इस निर्देश को ‘लेटर्स पेटेंट अपील’ (एलपीए) के माध्यम से चुनौती दी है, जो फिलहाल अदालत में लंबित है। नए आदेशों के तहत, हाईोकर्ट का अंतिम फैसला आने तक सात अक्टूबर 2023 की नीति के तहत आरक्षण का लाभ देते हुए कोई प्रमोशन नहीं दिया जाएगा।

एक अप्रैल 2025 को हाईकोर्ट ने सुनाया था अहम फैसला

कमलजीत सिंह एवं अन्य बनाम हरियाणा राज्य मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अप्रैल 2025 को एक अहम फैसला सुनाया था। इस फैसले के तहत हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार की उस नीति को बरकरार रखा था जिसके तहत अनुसूचित जाति के कर्मचारियों को प्रमोशन में 20 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था। इसके साथ ही कोर्ट का यह भी कहना था कि इस नीति का लाभ देते समय क्रीमी लेयर को आरक्षण के दायरे से बाहर रखना चाहिए।

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