यमन के हूती विद्रोहियों की तरफ से सऊदी अरब की नाकेबंदी के ऐलान से ईरान की जंग के और फैलने और इंटरनेशनल ऑयल सप्लाई-ग्लोबल ट्रेड में और रुकावट आने का खतरा पैदा हो गया है। दरअसल, हूती विद्रोहियों के मुताबिक, उन्होंने यमन पर सऊदी अरब के नेवल ब्लॉकेड और हूती विद्रोहियों के कब्जे वाली राजधानी सना में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हाल ही में हुए अटैक के जवाब में सऊदी-लिंक्ड शिपिंग के लिए Bab el-Mandeb स्ट्रेट को बंद कर दिया है। हूती विद्रोहियों का दावा है कि उन्होंने बीते मंगलवार को 6 शिप को अपना रास्ता बदलने के लिए मजबूर कर दिया, हालांकि इसकी कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जानें अगर Bab el-Mandeb स्ट्रेट बंद होती है तो यह कितना खतरनाक हो सकता है।
Bab el-Mandeb स्ट्रेट कहां है?
बता दें कि अरब प्रायद्वीप के दक्षिणी सिरे पर मौजूद Bab el-Mandeb, अरब की खाड़ी से लाल सागर को जोड़ने वाला चोकपॉइंट है। दुनिया का करीबन 12 फीसदी व्यापार इसी के जरिए होता है। इसमें ग्लोबल कंटेनर ट्रैफिक का 25 प्रतिशत हिस्सा शामिल है जो Bab el-Mandeb के संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।
क्यों अहम है Bab el-Mandeb?
सऊदी अरब के ऑयल एक्सपोर्ट के लिए Bab el-Mandeb स्ट्रेट और भी ज्यादा अहम हो गया है, क्योंकि ईरान की जंग के दौरान होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी होने से फारस की खाड़ी से होने वाला व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।
हूती की धमकी से बढ़ी शिपिंग कंपनियों की टेंशन
हालांकि, हूती विद्रोहियों का कहना है कि वे सिर्फ उन्हीं जहाजों को रोकेंगे जो सऊदी अरब के होंगे या उसके लाल सागर वाले पोर्ट्स पर आ-जा रहे होंगे। ध्यान देने वाली बात है कि इससे पहले गाजा युद्ध के दौरान हूती विद्रोहियों ने इसी तरह इजरायल के विरुद्ध नाकेबंदी की घोषणा की थी, लेकिन हूती विद्रोहियों ने कई ऐसे जहाजों पर भी हमले किए थे जिनका उस युद्ध से कोई लेना-देना नहीं था। हूती विद्रोहियों की इस धमकी के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां, Bab el-Mandeb स्ट्रेट के समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करने से बच सकती हैं।
छिटपुट हमले भी जलमार्ग को कर सकते हैं प्रभावित
जान लें कि यमन के तट का जो भाग Bab el-Mandeb के पास है, उस पर हूती विद्रोहियों का कब्जा नहीं है- वह हिस्सा अभी यमन में उनके विरोधियों के कंट्रोल में है। लेकिन वे हूती वहां से करीब 100 किलोमीटर से भी कम दूरी वाले क्षेत्र पर कब्जा जमाए हुए हैं।
हूती विद्रोही 3 महीने से कर रहे नाकेबंदी की तैयारी
हूती गुट के तीन अधिकारियों के मुताबिक, उनका गुट कई महीने से इस Bab el-Mandeb स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही में रुकावट डालने की प्लानिंग कर रहा है। हूती अफसरों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि उनके प्लान में नौसैनिक बारूदी सुरंगों को लगाना, विस्फोटक से लदी नावों से हमला, ड्रोन्स और हेलीकॉप्टर्स का इस्तेमाल शामिल है, ताकि हूती लड़ाके जहाजों पर चढ़ सकें।
वॉर्निंग को नजरअंदाज करने वाले जहाजों पर हूती करेंगे हमला
हूती के अधिकारियों ने कहा कि Bab el-Mandeb से निकलने वाले जहाजों को पहले वॉर्निंग दी जाएगी कि वे स्ट्रेट में तय सीमाओं को पार न करें। अगर जहाज उनकी वॉर्निंग को नजरअंदाज करते हैं, तो हूती विद्रोही मिलिट्री एक्शन करेंगे। इससे पहले, होर्मुज में ईरान यह दिखा चुका है कि जहाजों पर छिटपुट हमले भी रिस्क और बीमा प्रीमियम बढ़ाकर जलमार्ग को प्रभावी ढंग से बंद करने के लिए काफी हैं। स्ट्रेट को पूरी तरह बंद ना भी कर पाएं तो भी छिटपुट हमले पर्याप्त हो सकते हैं।
नाकेबंदी से ग्लोबल ट्रेड में आ सकती है रुकावट
इसको लेकर कॉन्फ्लिक्ट मॉनिटरिंग सर्विस ACLED की फाउंडर क्लियोना राले ने कहा, “अगर खाड़ी में शिपिंग के साथ-साथ Bab el-Mandeb पर भी प्रेशर बनता है, तो विश्व के दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर एक साथ रुकावट आ सकती है।”
वहीं, अटलांटिक काउंसिल के ‘प्रोजेक्ट फॉर मिडिल ईस्ट इंटीग्रेशन’ की डायरेक्टर एलिसन माइनर का मानना है कि जून में Bab el-Mandeb से हर दिन 70 लाख बैरल से ज्यादा पेट्रोलियम गुजरा, जबकि ईरान जंग से पहले यह आंकड़ा करीबन 40 लाख बैरल ही था।
सऊदी अरब के पास है दूसरा रास्ता
सऊदी अरब अभी अपने रेड सी पोर्ट Yanbu से हर दिन करीबन 40 लाख बैरल तेल एक्सपोर्ट कर रहा है। इससे होर्मुज के बंद होने का प्रभाव कम हुआ है। गौरतलब है कि सऊदी अरब Bab el-Mandeb स्ट्रेट का प्रयोग किए बिना भी कच्चा तेल ग्लोबल मार्केट तक पहुंचा सकता है। वह लाल सागर के रास्ते मिस्र तक हर दिन 25 लाख बैरल तक तेल भेज सकता है, जहां से SUMED पाइपलाइन के माध्यम से इसे भूमध्य सागर तक पहुंचाया जा सकता है। साथ ही, वह स्वेज नहर के माध्यम से भी हर दिन 10 लाख बैरल तेल भेज सकता है।
नए रास्ते के इस्तेमाल से बढ़ेगा ट्रांसपोर्ट का खर्च
दूसरी तरफ, इंटरनेशनल शिपिंग कंपनियां भी अपने शिप के आने-जाने का रास्ता बदल सकती हैं, जैसा कि उन्होंने गाजा युद्ध के चरम पर पहुंचने पर किया था। लेकिन इससे दक्षिण अफ्रीका के पास Cape of Good Hope से होकर लंबा समुद्री मार्ग तय करना, जिससे यात्रा में एक या दो सप्ताह ज्यादा लगेंगे और खर्च भी बढ़ जाएगा।
(इनपुट- AP)