बेंगलुरु के एक किराएदार के घर खाली करने के अनुभव ने यूजर्स को हैरत में डाल दिया है। वायरल पोस्ट में एक्स यूजर ने शख्स के हवाले से दावा किया है कि उसे अपनी 1 लाख रुपये की सिक्योरिटी मनी में से केवल 20,000 रुपये ही वापस मिले। कथित तौर पर मकान मालिक ने 80,000 रुपये से अधिक की राशि उन खर्चों के लिए काट ली। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने किराएदार के इस नुकसान को नियमित रखरखाव बताया तो कुछ ने इसे सरासर लूट करार दिया। 

एक्स यूजर की पोस्ट हुई वायरल 

इस पोस्ट को एक्स पर @poojaofficial5 नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इसमें महिला ने बताया कि, शख्स ने बेंगलुरु में 1 लाख रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट मनी देकर 2BHK अपार्टमेंट किराए पर लिया था। किराएदार एक साल तक अपार्टमेंट में रहा और उसने हर महीने बिना किसी देरी के समय पर किराया चुकाया। फ्लैट किराए पर लेने के बावजूद, बताया जाता है कि काम की वजह से वह व्यक्ति वहां बहुत कम समय बिताता था। वह अक्सर यात्रा करता रहता था और हर महीने केवल छह से सात दिन ही अपार्टमेंट में रहता था। वायरल पोस्ट में आगे दावा किया गया कि उसने घर के सभी नियमों का पालन किया, कभी पार्टियां आयोजित नहीं कीं, संपत्ति के अंदर स्मोकिंग नहीं की और अपनी पूरी किरायेदारी के दौरान अपार्टमेंट की अच्छी देखभाल की। जब मकान खाली करने का समय आया, तो किरायेदार को उम्मीद थी कि उसे अपनी सिक्योरिटी डिपॉजिट मनी का अधिकांश हिस्सा वापस मिल जाएगा, बशर्ते कि वास्तविक नुकसान के लिए मामूली कटौती ही की जाए। हालांकि, मकान मालिक का बिल मिलने के बाद वह दंग रह गया। 

इन चीजों के काटे गए पैसे

वायरल पोस्ट के अनुसार, मकान मालिक ने 1 लाख रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट मनी में से 80,396 रुपये काट लिए, जिससे किरायेदार को बदले में केवल 20,000 रुपये ही मिले। रिपोर्ट के अनुसार, बिल में अपार्टमेंट की पेंटिंग, गहन सफाई, सोफे की सफाई, रेफ्रिजरेटर की सर्विसिंग, शॉवर रिप्लेसमेंट, दरवाजे के ताले का रिप्लेसमेंट, तौलिया रैक की इंस्टॉलेशन, सेवा शुल्क, सुविधा शुल्क और कई अन्य खर्च शामिल थे। पोस्ट में कहा गया कि कटौती किरायेदार द्वारा किए गए नुकसान की मरम्मत के बारे में कम और संपत्ति को अगले किरायेदार को सौंपने से पहले उसके पूर्ण रेनोवेशन के लिए भुगतान करने के बारे में ज्यादा लगती है। 

पोस्ट में उठाए गए सवाल

इस पोस्ट में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या सिक्योरिटी डिपॉजिट मनी का उपयोग नियमित रखरखाव और सामान्य टूट-फूट के लिए किया जाना चाहिए या इसे केवल किरायेदारों द्वारा किए गए नुकसान तक ही सीमित रखा जाना चाहिए। इसमें यूजर्स से यह भी पूछा गया कि क्या किरायेदारी के सिर्फ एक साल बाद 1 लाख रुपये की जमा राशि में से केवल 20,000 रुपये वापस मिलना उचित होगा। 

यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया 

यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर अपने विचार शेयर किए। एक यूजर ने लिखा, ‘सिक्योरिटी डिपॉजिट मनी में सामान्य टूट-फूट नहीं बल्कि वास्तविक नुकसान की भरपाई होनी चाहिए। अन्यथा यह जमा राशि नहीं बल्कि किराए का एक अतिरिक्त छिपा हुआ खर्च बन जाता है।’

दूसरे ने लिखा कि, ‘यह सरासर अन्याय है। मकान मालिक सुरक्षा जमा राशि को रेनोवेशन के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते, खासकर तब जब किरायेदार वहां मुश्किल से ही रहा हो और उसने घर को बिल्कुल साफ-सुथरा रखा हो। मैंने अमेरिका में कई बार किराए पर मकान लिए हैं, और उस अनुभव के आधार पर मैं यही सलाह दूंगा… हमेशा हर चीज को तस्वीरों के साथ दस्तावेज बनाएं और वापसी की शर्तों को लिखित में स्पष्ट रूप से तय कर लें। एक अच्छा किराया समझौता दोनों पक्षों की सुरक्षा करता।’ 

एक यूजर ने लिखा कि, ‘बेंगलुरु में यही चलन है।’ 

चौथे यूजर ने लिखा, ‘सिक्योरिटी डिपॉजिट मनी केवल वास्तविक नुकसान के लिए होती है, सामान्य टूट-फूट के लिए नहीं। किरायेदार को इसे तस्वीरों और एक समझौते के साथ सुरक्षित रखना चाहिए।’

कानूनी कार्रवाई का सुझाव देते हुए एक ने लिखा कि, ‘न्याय के लिए उपभोक्ता न्यायालय का रुख करना बेहतर होगा।’ 

एक अन्य यूजर ने इस मुद्दे को संक्षेप में बताते हुए लिखा, ‘किरायेदार ने बैंगलोर अपार्टमेंट का शायद ही कभी इस्तेमाल किया हो, फिर भी मकान मालिक ने नियमित मरम्मत कार्यों के लिए विस्तृत चालान के माध्यम से 1 लाख रुपये की जमा राशि में से 80,000 रुपये से अधिक की कटौती कर ली।’ 

गौरतलब है कि, इससे पहले बेंगलुरु की एक महिला ने मकान मालिक द्वारा अचानक किराया बढ़ाने के बारे में पोस्ट शेयर की थी। 

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है। 

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