Last Updated:
Famous Shukla Dahi Bada Gonda: गोंडा का नाम आते ही अब खान-पान के शौकीनों की जुबान पर ‘शुक्ला दही बड़ा’ का नाम आ जाता है. 1982 में एक छोटी सी चाय की दुकान से शुरू हुआ यह सफर आज सात समंदर पार विदेशों तक पहुंच चुका है. शुद्धता का आलम यह है कि दही के लिए अपनी खुद की डेयरी चलाई जाती है और स्वाद ऐसा कि दूर-दराज के राज्यों से लोग खिंचे चले आते हैं. ‘वन जिला वन प्रोडक्ट’ (ODOP) में शामिल हो चुका यह जायका आज अपनी दूसरी पीढ़ी के हाथों में है, जो आज भी वही पुराना और शुद्ध पारंपरिक स्वाद बरकरार रखे हुए है.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले का एक खास स्वाद अब सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपनी पहचान बना चुका है. हम बात कर रहे हैं इटियाथोक के मशहूर ‘शुक्ला दही बड़ा’ की (Shukla Dahi Bada Gonda). अपनी खास रेसिपी और शुद्धता की वजह से यह दही बड़ा आज एक ब्रांड बन चुका है. जो भी व्यक्ति एक बार इसे चख लेता है, वह इसके लाजवाब स्वाद को कभी भूल नहीं पाता.
दुकान के मालिक कृपा शंकर शुक्ला बताते हैं कि इस कामयाबी के पीछे उनके पिताजी की कड़ी मेहनत है. साल 1982 में उनके पिताजी चंडीगढ़ से वापस आए और इटियाथोक में एक छोटी सी चाय-पकौड़े की दुकान खोली. करीब छह साल तक उन्होंने चाय बेची, लेकिन 1988 में उन्होंने पहली बार दही बड़ा बनाने का प्रयोग किया. लोगों को यह स्वाद इतना पसंद आया कि देखते ही देखते दही बड़े की मांग बढ़ गई. आज कृपा शंकर अपनी दूसरी पीढ़ी के साथ मिलकर उसी विरासत और स्वाद को आगे बढ़ा रहे हैं.
अपनी डेयरी और खास मसाले, शुद्धता को गारंटी
आज के दौर में जहां बाजार में शुद्ध चीजें मिलना मुश्किल है, वहीं शुक्ला दही बड़ा अपनी क्वालिटी से समझौता नहीं करता. कृपा शंकर बताते हैं कि दही की शुद्धता बनाए रखने के लिए वे खुद की डेयरी चलाते हैं. अपनी ही डेयरी के दूध से ताजा दही तैयार किया जाता है, जिसका इस्तेमाल दुकान पर होता है. दही बड़े को तैयार करने के लिए उड़द की दाल को अच्छी तरह धोकर और पीसकर बड़े बनाए जाते हैं. इन बड़ों की खास बात यह है कि इनके अंदर ड्राई फ्रूट्स (मेवे) भरे जाते हैं, जो इसके स्वाद को शाही बना देते हैं. अंत में खास मसालों के साथ इसे ग्राहकों को परोसा जाता है.
ODOP में मिली जगह, कुशीनगर तक है दीवानगी
शुक्ला दही बड़ा की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि इसे सरकार की ‘वन जिला वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना में भी शामिल किया गया है. साफ-सफाई और बिना किसी केमिकल के तैयार होने वाले इस दही बड़े की चर्चा दूर-दूर तक है. कुशीनगर से स्वाद चखने आए नसीम अंसारी बताते हैं कि उन्होंने इस दुकान का बहुत नाम सुना था, और आज यहां आकर जब इसे खाया तो वाकई स्वाद उम्मीद से कहीं ज्यादा बेहतर निकला.
शुक्ला दही बड़ा का स्वाद लोगों को लुभा रहा है. कृपा शंकर शुक्ला का कहना है कि वे पूरी कोशिश करते हैं कि उनके पिताजी ने जो स्वाद शुरू किया था, उसमें कभी कमी न आए. भविष्य को लेकर उनकी योजना है कि वे अपने इस खास दही बड़े को अन्य शहरों की दुकानों तक भी पहुंचा सकें, ताकि हर कोई इस पारंपरिक स्वाद का आनंद ले सके.
About the Author
सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें