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उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की पारंपरिक ‘कोहड़ा पूड़ी’ अब नई पहचान हासिल कर रही है. सरकार ने इसे ‘एक जिला एक व्यंजन’ योजना में शामिल किया है. गांवों के शादी-विवाह, ब्रह्म भोज और धार्मिक आयोजनों में खास तौर पर बनने वाला यह व्यंजन अब सुल्तानपुर की सांस्कृतिक पहचान को देशभर में पहुंचाएगा.
सुल्तानपुर. जिले का ऐतिहासिक व्यंजन कोहड़ा पूड़ी पहचान बनने चल रहा है, सुल्तानपुर की ग्रामीण संस्कृति को सरकार द्वारा पहचान दिलाई जाएगी. इसके लिए एक जिला एक व्यंजन के तहत सुल्तानपुर की कोहड़ा पूड़ी को शामिल कर लिया गया. ऐसे में आपको बता दें, कि सुल्तानपुर के कई मांगलिक कार्यक्रमों में व्यंजन के रूप में इस्तेमाल की जाती रही हैं.
कोहड़ा जिसे कद्दू कहा जाता है यह सुल्तानपुर के कई कार्यक्रमों जैसे ब्रह्म भोज तेरहवीं या फिर मांगलिक कार्यक्रम में मुख्य व्यंजन होता है. उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर जिला अपनी ऐतिहासिक विरासत, लोक संस्कृति और पारंपरिक खानपान के लिए जाना जाता है.
यहां के त्योहार, मेले और पारिवारिक कार्यक्रम केवल रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भोजन की खुशबू भी यहां की पहचान बन जाती है. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में एक खास नाम है “कोहड़ा की सब्जी और पूड़ी”. जिला उपयुक्त नेहा सिंह ने बताया कि सुल्तानपुर जनपद के लिए अब इस पारंपरिक भोजन को एक जिला एक व्यंजन योजना में शामिल किया गया है, जिससे सुल्तानपुर की पहचान और भी मजबूत हो रही है.
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सुल्तानपुर के ग्रामीण अनिल कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि सुल्तानपुर में बड़ी पूड़ी का एक अलग महत्व है. बड़ी पूड़ी का मतलब है कि इसका आकार सामान्य पूड़ी की अपेक्षा काफी बड़ा होता है. इसके रखने का भी तरीका अलग होता है यानी कि जब लोहे के बड़े कड़ाहे से पूड़ी निकाली जाती है तो उसे बांस से बनाई गई खैंची में रखा जाता है. पूड़ी रखने वाले लोग भी ट्रेंड होते हैं, पूड़ी को इस हिसाब से रखा जाता है कि पूड़ी 24 घंटे से अधिक तक गर्म रहती है.
अनिल कुमार आगे कहते हैं कि बड़ी पूड़ी बनाने के लिए गेहूं के आटे में थोड़ा नमक और जरूरत के अनुसार पानी मिलाकर आटा गूंथा जाता है. इसके बाद छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें बेल लिया जाता है और गर्म तेल में सुनहरा होने तक तला जाता है.
गरमा-गरम पूड़ी के साथ जब कोहड़ा की सब्जी परोसी जाती है, तो उसका स्वाद लोगों को गांव की मिट्टी और पुराने समय की याद दिला देता है. एक जिला एक व्यंजन के तहत इस का चयन निश्चित रूप से सुल्तानपुर के लिए यहां की संस्कृति को आगे बढ़ाएगा.
सुल्तानपुर में कोहड़ा की सब्जी का विशेष महत्व है. गांवों में जब भी कोई शादी-विवाह, कथा, पूजा, भोज और धार्मिक आयोजन होता है, तो उस समय कोहड़ा पूड़ी जरूर बनाई जाती है.