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Famous Food Recipe In Summer Season: अलवर जिले में इन दिनों भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है. तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. गर्मी से बचाव के लिए लोग तरह-तरह के उपाय अपना रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग भीषण गर्मी से बचने के लिए पारंपरिक पेय पदार्थों का सेवन कर राहत पा रहे हैं.

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Summer Food Recipe Special: अलवर जिले में इन दिनों भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है. तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. गर्मी से बचाव के लिए लोग तरह-तरह के उपाय अपना रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए पारंपरिक पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं. जिले के गांवों में जौ से बनी राबड़ी इन दिनों खूब पी जा रही है, जो शरीर के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है. राबड़ी एक तरह का प्राकृतिक टॉनिक बनकर उभर रही है और गर्मियों में यह खास पेय के रूप में इस्तेमाल की जा रही है. राजस्थान के लगभग हर गांव में यह पारंपरिक पेय आसानी से मिल जाता है.

गांवों में सुबह चाय की जगह राबड़ी
ग्रामीण क्षेत्रों में लोग सुबह 7 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक राबड़ी का सेवन करते हैं. खास बात यह है कि गर्मियों में कई लोग चाय की जगह राबड़ी पीना पसंद करते हैं. यह शरीर को ठंडक पहुंचाती है और लंबे समय तक भूख भी नहीं लगने देती. यही वजह है कि भीषण गर्मी के बीच यह पेय लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है.

बाजारों में भी बढ़ी राबड़ी की मांग
अब राबड़ी की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई है कि शहरों के बाजारों में भी इसकी स्टॉल लगने लगी हैं. सुबह-सुबह दुकानदार मुख्य चौराहों पर अपनी दुकान लगा लेते हैं और दोपहर तक लोगों को राबड़ी परोसते हैं. गर्मी और लू से बचाव के लिए लोग बाजारों में मिलने वाली राबड़ी का सेवन कर रहे हैं. यह न केवल ठंडक देती है, बल्कि शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करती है. ग्रामीण इलाकों में महिलाएं रात को ही राबड़ी तैयार कर लेती हैं और सुबह उसे ठंडा करके पीती हैं. बुजुर्गों का मानना है कि यह शरीर में शीतलता बनाए रखती है.

राबड़ी बनाने का तरीका
अलवर जिले में गेहूं और जौ की खेती बड़े पैमाने पर होती है. फसल कटाई के बाद किसान गेहूं की तरह जौ को भी अपने घरों में सुरक्षित रखते हैं और उससे राबड़ी तैयार करते हैं. इसे बनाना काफी आसान है. सबसे पहले जौ का दलिया यानी घाट पिसवा लिया जाता है. इसके बाद उसे छलनी से अच्छी तरह छान लिया जाता है. फिर इस घाट को छाछ और पानी में घोलकर धीमी आंच पर करीब एक घंटे तक पकाया जाता है. जब मिश्रण अच्छे से तैयार हो जाए, तो उसे ठंडा होने के लिए रख दिया जाता है. सुबह इसमें ठंडी छाछ मिलाकर इसका सेवन किया जाता है, जिससे शरीर को तुरंत ठंडक और राहत मिलती है.

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Anand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें



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