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Famous Rose Halwa Of Pali : पाली का मशहूर गुलाब हलवा अपनी अनोखी स्वाद और खास बनाने की विधि के लिए देशभर में पहचान बना चुका है. 60 साल पुराने इस हलवे को अब रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर भी आसानी से खरीदा जा सकेगा. इससे यात्रियों को सुविधा मिलेगी और पाली की इस खास मिठाई की पहुंच और ज्यादा बढ़ेगी.
इस हलवे का इतिहास बेहद रोचक है. करीब 60 साल पहले शहर के भीतरी बाजार में मूलचंद कास्टिया की दुकान पर दूध बचने के कारण एक प्रयोग किया गया. कारीगर गुलाब पुरी ने दूध में शक्कर डालकर उसे धीमी आंच पर तब तक पकाया जब तक वह गहरे मैरून रंग के मावे में नहीं बदल गया. जब इसे चखा गया, तो इसका स्वाद लाजवाब था. वहीं से इसका नाम ‘गुलाब हलवा’ पड़ा और आज यह पाली की ग्लोबल पहचान बन चुका है.
इस हलवे की सबसे बड़ी खासियत इसकी सादगी है. इसमें कोई मिलावट नहीं होती, बस दूध को घंटों तक कड़ाही में पकाया जाता है. पाली के खास क्लाइमेट और स्थानीय कारीगरों के हाथों का हुनर ही इसे वह मैरून रंग और दानेदार बनावट देता है जो दुनिया में कहीं और नहीं मिलता. यही वजह है कि 280 से 300 रुपये किलो मिलने वाली यह मिठाई हर आम और खास की थाली का हिस्सा है.
जब भी गुलाब हलवे की बात होती है, ‘चैन जी का हलवा’ नाम लोगों की जुबान पर सबसे पहले आता है. व्यास कॉलोनी के पास स्थित यह दुकान 40 साल से भी ज्यादा पुरानी है. शुद्ध दूध, शक्कर और इलायची के सही तालमेल से बना यहाँ का हलवा न केवल भारत के कोने-कोने में जाता है, बल्कि विदेशों में रहने वाले मारवाड़ी भी इसे बड़े चाव से मंगवाते हैं. अब स्टेशन पर उपलब्धता से इस ब्रांड की पहुंच और बढ़ेगी.
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अब रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर ऑथेंटिक गुलाब हलवा मिलने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. यात्रियों को अब नकली मिलावटी मिठाइयों के डर से मुक्ति मिलेगी और वे सीधे नामी दुकानों के आउटलेट्स से ताजा हलवा पैक करवा सकेंगे. पाली से गुजरने वाली हर बस और ट्रेन अब गुलाब हलवे की महक के साथ आगे बढ़ेगी, जिससे स्थानीय व्यापारियों और शहर की ब्रांडिंग को नई मजबूती मिलेगी.
पाली आने वाले यात्रियों के लिए अब गुलाब हलवा खरीदना बेहद आसान हो गया है. अक्सर समय की कमी के कारण ट्रेन या बस से सफर करने वाले लोग शहर के मुख्य बाजारों तक नहीं पहुंच पाते थे. इसी को ध्यान में रखते हुए अब रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस स्टैंड पर भी गुलाब हलवे के काउंटर उपलब्ध रहेंगे. अब राजस्थान भर से आने वाले यात्री अपनी यात्रा के दौरान ही पाली की इस विरासत को साथ ले जा सकेंगे.