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Tisiyouri Recipe: पहले के समय में जब कुरकुरे, चिप्स जैसे विकल्प नहीं होते थे, तब भी महिलाएं घर पर क्रिस्पी स्नैक तैयार करती थी. मिथिला की खास तिसियौरि इन्हीं में से एक है. धुली उड़द दाल और भुने तिल से बना यह स्नैक सालों स्टोर करके खाया जा सकता है. इसे देसी कुरकुरे कहें तो गलत नहीं होगा. इसमें केमिकल और प्रिजर्वेटिव भी नहीं होते.
दरभंगा: मिथिलांचल सिर्फ मखाने और मधुबनी पेंटिंग की धरती नहीं है. यह सदियों से सुखी-सम्पन्न ऐसा अंचल है, जो आधुनिक भारत में कई चीजों का इकलौता हकदार है. आज हम पैकेट वाले चिप्स-कुरकुरे दुकान से खरीदकर खाते हैं. लेकिन मिथिला में दादी-नानी के जमाने से एक ऐसी चीज बनती आ रही है, जो कुरकुरे से भी ज्यादा कुरकुरी है, स्वाद में लाजवाब है और सेहत के लिए वरदान है. उसका नाम है – तिसियौरि. लेकिन अफसोस, अब मिथिलांचल में भी यह कला खत्म होती जा रही है. कुछ बुजुर्ग महिलाएं ही आज इसे बनाने की परंपरा संभाले हुए हैं.
परंपरा की रक्षक राजकुमारी देवी
दरभंगा जिले की बुजुर्ग महिला राजकुमारी देवी इस पारंपरिक कला को आज भी जीवित रखे हुए हैं. वे बताती हैं कि तिसियौरि बनाने की विधि बहुत आसान है, लेकिन इसमें मेहनत और ममता लगती है साथ ही धैर्य भी चाहिए होता है. जानते हैं इसे कैसे तैयार किया जा सकता है.
घर पर ऐसे बनाएं तिसियौरि
सबसे पहले उड़द की दाल को पानी में भिगोकर फूलने के लिए छोड़ दें. जब दाल अच्छी तरह फूल जाए, तो उसे मिक्सी जार में पीस लें. मालती देवी कहती हैं, ‘हो सके तो सिलबट्टे पर पीसिए, स्वाद दोगुना हो जाएगा.’ पिसी हुई दाल में स्वाद अनुसार नमक और भुना तिल डालकर अच्छे से मथ लें, ताकि मिश्रण एकदम मुलायम हो जाए.
अब इस मिश्रण को अपने मनचाहे आकार में लें. चाहें तो गोल टिक्की बनाएं, चाहें तो लंबी सेव की तरह. किसी सूती कपड़े या सही थाली पर फैलाकर इसे तेज धूप में सूखने के लिए रख दें. जब तिसियौरि पूरी तरह कड़क हो जाए, तब उसे उठाकर डिब्बे में स्टोर कर लें. पैकिंग अगर हवा बंद है, तो यह एक साल से भी ज्यादा समय तक खराब नहीं होती.
खाने का आनंद
जब भी मन करे कुछ चटपटा खाने का, शाम के नाश्ते में या चाय के साथ नमकीन लेने का, कड़ाही में तेल गर्म करें और तिसियौरि को तल लें. गरम-गरम तिसियौरि कुरकुरे से भी ज्यादा कुरकुरी लगती है. तलने के बाद आप चाहें तो स्वाद को बढ़ाने के लिए ऊपर से सूखे मसाले जैसे काला नमक, चाट मसाला, लाल मिर्च पाउडर, जरा सी खटाई को एक साथ मिलाकर इन पर छिड़क सकते हैं. इससे ये बच्चों को बिलकुल बाजार वाला टेस्ट देगी.
कुरकुरे में मैदा, प्रिजर्वेटिव और नुकसान पहुंचाने वाले रंग होते हैं, जो सेहत बिगाड़ते हैं. वहीं उड़द दाल और तिल से बनी तिसियौरि प्रोटीन, कैल्शियम और फाइबर से भरपूर है. यह पचने में हल्की है और पूरे साल स्टोर हो जाती है. मिथिला की इस धरोहर को बचाना जरूरी है. तिसियौरि सिर्फ नाश्ता नहीं, मिथिलांचल की ममता और मेहनत का स्वाद है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें