नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदल दी है। अब प्रदर्शन स्थल और आसपास के मार्गों की सुरक्षा के लिए 18 डीसीपी तैनात किए जाएंगे। हर रूट की निगरानी अलग जिला पुलिस करेगी। गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक के बाद ये फैसला लिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
पूरे ऑपरेशन की निगरानी स्पेशल सीपी करेंगे। भीड़ नियंत्रण और ट्रैफिक पर खास फोकस रहेगा। पुलिस पर हमले के बाद रणनीति बदली गई है। पेलेट गन इस्तेमाल के आरोपों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है।
पेपर लीक पर दिल्ली पुलिस ने स्पेशल STF बनाई है, जिससे भर्ती परीक्षा माफिया पर शिकंजा कसा जाएगा।
गौरतलब है कि हाल ही में सीजेपी प्रोटेस्ट उग्र हो गया था, जिसके बाद पुलिस को प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा था और आंसू गैस के गोले भी दागने पड़े थे। भीड़ को नियंत्रित करने के चक्कर में कई पुलिसकर्मी घायल भी हुए। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव करना बेहद जरूरी था।
हाल ही में कर्तव्य पथ पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR में ये सामने आया कि 20 जुलाई को रेल भवन और संसद के बेहद नजदीक हुई हिंसा मामूली नहीं थी बल्कि इसमें हत्या की भी साजिश थी। FIR कर्तव्य पथ थाने में तैनात एक इंस्पेक्टर की शिकायत पर दर्ज हुई थी।
दिल्ली पुलिस की FIR के मुताबिक, भीड़ ने हत्या की नीयत से पुलिस पर हमला किया। इसमें कई जवान घायल हुए हैं। इस दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है।
जंतर-मंतर पर क्यों हो रहा प्रदर्शन?
NEET-UG 2026 और अन्य परीक्षाओं (NEET, CUET, CBSE आदि) में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियां सामने आई थीं, जिसके बाद NEET पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्रों और युवाओं का प्रदर्शन चल रहा है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। इसके अलावा छात्र, पेपर लीक से प्रभावित/आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये मुआवजा मांग रहे हैं।
ये आंदोलन शुरू में इतना बड़ा नहीं था लेकिन देखते ही देखते इस आंदोलन की चर्चा देशभर में हो रही है।
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