हैदराबाद. अगर आप हैदराबाद की सड़कों या बाहरी इलाकों के हाईवे से गुजर रहे हैं और कुछ अलग व सेहतमंद खाने का मन है, तो सड़क किनारे मिलने वाली एक खास चीज आपका ध्यान जरूर खींचेगी. पहली नजर में यह किसी मखमली सफेद कपड़े या पतले पापड़ जैसी दिखाई देती है, लेकिन असल में इसे सेहत का खजाना माना जाता है. इन दिनों सोशल मीडिया और हैदराबाद के आसपास के इलाकों में ताड़ के पेड़ से निकलने वाली यह खास चीज लोगों के बीच काफी चर्चा का विषय बनी हुई है.
इसे स्थानीय भाषा में ताड़ की मलाई या एक विशेष प्रकार का कंद कहा जाता है. इसे ताड़ के पेड़ के तने या उसके अंदरूनी हिस्से से बेहद सावधानी और कुशलता के साथ निकाला जाता है. दुकानदार बड़े तने को चाकू से छीलकर उसकी बेहद बारीक, पारदर्शी और मुलायम परतें निकालते हैं. देखने में यह जितनी अनोखी लगती है, स्वाद में भी उतनी ही अलग होती है.
शहद के साथ परोसी जाती है
इसे परोसने का तरीका भी बेहद पारंपरिक और साधारण है. दुकानदार इस सफेद परत को अखबार या पत्ते पर रखता है और स्वाद बढ़ाने के लिए इसके ऊपर शुद्ध शहद की कुछ बूंदें डाल देता है. शहद के साथ इसका स्वाद हल्का मीठा और मखमली हो जाता है, जिसे आसानी से चबाया जा सकता है.
भगवान राम के वनवास से भी जुड़ी है मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण 14 वर्ष के वनवास पर थे, तब उन्होंने कंद-मूल खाकर ही अपना समय बिताया था. ऐसी मान्यता है कि रामकंद मूल उन्हीं प्रमुख कंदों में से एक था, जिसे भगवान राम ने वनवास के दौरान भोजन के रूप में ग्रहण किया था. इसी वजह से कई लोग इसे भगवान राम के नाम से भी जोड़कर देखते हैं.
स्वास्थ्य के लिए बताए जाते हैं कई फायदे
डॉक्टर आसिया बताती हैं कि तेलुगु संस्कृति में लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं. उनके अनुसार इसे सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि इसके औषधीय गुणों के कारण भी पसंद किया जाता है.
पेट की समस्याओं में राहत: इसे गैस, एसिडिटी और सीने में जलन जैसी समस्याओं में लाभदायक माना जाता है.
जोड़ों के दर्द में सहायक: बढ़ती उम्र या थकान के कारण होने वाले घुटनों और पैरों के दर्द में भी इसे फायदेमंद माना जाता है.
त्वचा के लिए उपयोगी: यह त्वचा से जुड़ी कुछ समस्याओं और संक्रमण से बचाव में भी सहायक माना जाता है.
शरीर को पहुंचाता है ठंडक: गर्म मौसम में इसे शरीर की आंतरिक गर्मी कम करने और प्राकृतिक ठंडक देने वाला माना जाता है.
अगर आप अगली बार हैदराबाद के बाहरी इलाकों से गुजरें और सड़क किनारे यह प्राकृतिक खाद्य पदार्थ दिखाई दे, तो इसका स्वाद जरूर चख सकते हैं. स्थानीय लोगों के बीच यह लंबे समय से पसंद किया जाता रहा है.